कैप्टन ने एडीजीपी को दिए निर्देश, कहा- नशा तस्करों से मिले पुलिसवालों पर हो कड़ी कार्रवाई
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एडीजीपी (एसटीएफ-ड्रग) को नशा तस्करी में शामिल पुलिस कर्मचारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य के सरहदी जिलों में तैनात पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ खास तौर पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है।
कैप्टन ने शुक्रवार को नशे से निपटने के लिए बनाई विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उन्होंने एडीजीपी को सभी सरहदी जिलों में एसटीएफ की दो टीमें गठित करने के निर्देश दिए ताकि वह पुलिस के साथ तालमेल बनाकर नशा तस्करी में शामिल पुलिसकर्मियों पर नजर रखें।
मुख्यमंत्री ने जगदीश भोला के केस में उसके साथियों को जल्द भारत प्रत्यर्पित करने के लिए यह मामला विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाने के मुख्य सचिव को निर्देश दिए।
साथ ही मुख्यमंत्री ने निजी नशा मुक्ति केंद्रों के कामकाज पर नियमित तौर पर नजर रखने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए। इन केंद्रों के बारे में शिकायत है कि यह निम्न स्तर की सेवाएं देते हैं और इलाज के नाम पर ऊंची दरें वसूलते हैं।
मुख्यमंत्री ने नशे के आदी लोगों और उनके परिवारों से अपील की कि वह सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास केंद्रों में बढ़िया इलाज के लिए आगे आएं और निजी संस्थाओं के जाल में न फंसें।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, एडवोकेट जनरल अतुल नंदा, मुख्य सचिव करण अवतार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, कार्यकारी डीजीपी वीके भावरा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) एनएस कलसी, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव हरप्रीत सिंह सिद्धू, एसटीएफ के एडीजीपी गुरप्रीत देयो और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य सतीश चंद्रा शामिल थे।
पुलिसकर्मियों को कानूनी पहलुओं की दी जाए जानकारी
कैप्टन ने अदालतों में मामलों को प्रभावी ढंग से पेश करने के लिए पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा कि वे पूर्व जजों, वकीलों, कानून विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार करें। इस पैनल द्वारा नशा तस्करों के मामलों की जांच में शामिल पुलिस कर्मचारियों को कानूनी पहलुओं की जानकारी दी जाए ताकि वे प्रभावी ढंग से केस को पेश कर सकें।