फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Climate change will have adverse effect in coming times in Punjab

Punjab: पंजाब में जलवायु परिवर्तन से बढ़ेगा संकट, 2050 तक पानी की कमी के साथ उत्पादन भी घटेगा

Mon, 03 Apr 2023 10:50 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 03 Apr 2023 10:50 AM IST
सार

जलवायु परिवर्तन के कारण ही वर्षा के पैटर्न में आए बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी से फसलों की पैदावार पर प्रभाव पड़ना तय है। यह किसानों की आजीविका के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डालेगा।
 

विज्ञापन
Climate change will have adverse effect in coming times in Punjab
जलवायु परिवर्तन - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में पिछले कुछ साल से देखे जा रहे जलवायु परिवर्तन के आने वाले समय में विपरीत प्रभाव होंगे। जलवायु परिवर्तन के मामले में पंजाब विशेष रूप से अतिसंवेदनशील राज्य है। फिलहाल राज्य देश के लिए जितना खाद्यान्न पैदा करता है, 2050 तक उसमें प्रमुख खरीफ और रबी फसलों में 13 फीसदी की गिरावट आ सकती है। यह निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन पर इंटर गवर्नमेंट पैनल सिंथेसिस रिपोर्ट में सामने आया है।

विज्ञापन


इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के पंजाब पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ बढ़ते जोखिम को रोकने के विकल्पों पर सुझाव भी दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब को सर्वाधिक पानी की कमी से जूझना पड़ सकता है क्योंकि राज्य हिमालय से उतरने वाली नदियों और मानसून के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। जलवायु परिवर्तन से जहां वर्षा के पैटर्न में बदलाव आने लगा है वहीं इसके परिणामस्वरूप सूखे जैसे हालात का सामना भी करना पड़ सकता है। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें : शिक्षकों की गाड़ी पर गिरा सफेदे का पेड़, तीन गंभीर जख्मी, तेज हवाओं के कारण हुआ हादसा
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर गंभीर खतरे में हैं और पंजाब की नदियों में जलस्तर घट सकता है। इसका सीधा असर कृषि और मानव आजीविका पर पड़ेगा। इसके अलावा, गर्म और आर्द्र जलवायु वाले पंजाब को जलवायु परिवर्तन के चलते उच्च तापमान के कारण भीषण गर्मी और हीटवेव का सामना करना पड़ेगा, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में कमजोर इम्यून वाली आबादी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।


जलवायु परिवर्तन के कारण ही वर्षा के पैटर्न में आए बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी से फसलों की पैदावार पर प्रभाव पड़ना तय है। यह किसानों की आजीविका के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डालेगा। कृषि उत्पादन, विशेष रूप से मक्का, चावल और कपास की उपज पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

डॉ. अंजल प्रकाश, रिसर्च डायरेक्टर, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस का कहना है कि इन घटनाओं के कृषि, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। रिपोर्ट में आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए निवेश को प्राथमिकता देने की नीति बनाने पर जोर दिया गया है ताकि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, निकासी योजना और कमजोर आबादी की रक्षा के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed