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Chandigarh News: नीड बेस्ड चेंज पर राहत की राह खुली, चार सदस्यीय टीम गठित
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में नीड बेस्ड चेंज को लेकर लंबे समय से राहत की मांग कर रहे एमआईजी, एचआईजी और एलआईजी फ्लैट धारकों के सुझावों पर अब बोर्ड स्तर पर काम तेज हो गया है। सीएचबी ने रेजिडेंट्स, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), क्राफ्ड, फॉस्वेक और अन्य रेजिडेंट संगठनों की ओर से दिए गए लिखित सुझावों का अध्ययन करने के लिए चार अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम गठित की है।
टीम विभिन्न संगठनों और फ्लैट धारकों की मांगों व सुझावों का विस्तृत अध्ययन करेगी। जरूरत के अनुसार टीम संबंधित मकानों और क्षेत्रों का ग्राउंड विजिट भी करेगी। इसका उद्देश्य मकानों में किए गए बदलावों की वास्तविक स्थिति समझना और यह देखना है कि किन बदलावों को आवंटियों की जरूरत के आधार पर नियमों में राहत देकर स्वीकार किया जा सकता है।
नियमों में छूट की संभावनाएं तलाशेगी टीम
टीम यह अध्ययन करेगी कि नीड बेस्ड चेंज के तहत सीएचबी मकानों में किन नियमों और शर्तों के आधार पर राहत दी जा सकती है। इसमें मौजूदा बदलावों, आवंटियों की जरूरत और अलग-अलग श्रेणी के मकानों की स्थिति को शामिल किया जाएगा। अध्ययन के बाद टीम अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद को सौंपेगी।
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चार अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारी
सीएचबी ने एसडीई नवनीत शर्मा, एचडीएम नवनीत बत्रा, सीनियर असिस्टेंट वीरेंद्र कुमार और आउटसोर्स डीईओ अनिल कुमार को नीड बेस्ड चेंज से संबंधित कार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है। ये सभी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर-2 के अधीन यह काम संभालेंगे। टीम रेजिडेंट संगठनों के सुझावों, मकानों में किए गए बदलावों और मौके की स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर यह देखा जाएगा कि किन बदलावों को नियमित या कंपाउंड करने के लिए नियमों में प्रावधान अथवा छूट दी जा सकती है।
हजारों परिवारों को राहत की उम्मीद
नीड बेस्ड चेंज का मुद्दा सीएचबी के हजारों मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए अहम है। समय के साथ परिवार की जरूरतों के अनुसार कई आवंटियों ने मकानों में बदलाव किए हैं। इन्हीं बदलावों को लेकर बोर्ड की ओर से कार्रवाई और नोटिस की स्थिति भी सामने आती रही है। रेजिडेंट संगठन लंबे समय से व्यावहारिक और एक समान नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। अब चार सदस्यीय टीम के अध्ययन से इन परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है।
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टीम विभिन्न संगठनों और फ्लैट धारकों की मांगों व सुझावों का विस्तृत अध्ययन करेगी। जरूरत के अनुसार टीम संबंधित मकानों और क्षेत्रों का ग्राउंड विजिट भी करेगी। इसका उद्देश्य मकानों में किए गए बदलावों की वास्तविक स्थिति समझना और यह देखना है कि किन बदलावों को आवंटियों की जरूरत के आधार पर नियमों में राहत देकर स्वीकार किया जा सकता है।
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नियमों में छूट की संभावनाएं तलाशेगी टीम
टीम यह अध्ययन करेगी कि नीड बेस्ड चेंज के तहत सीएचबी मकानों में किन नियमों और शर्तों के आधार पर राहत दी जा सकती है। इसमें मौजूदा बदलावों, आवंटियों की जरूरत और अलग-अलग श्रेणी के मकानों की स्थिति को शामिल किया जाएगा। अध्ययन के बाद टीम अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद को सौंपेगी।
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चार अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारी
सीएचबी ने एसडीई नवनीत शर्मा, एचडीएम नवनीत बत्रा, सीनियर असिस्टेंट वीरेंद्र कुमार और आउटसोर्स डीईओ अनिल कुमार को नीड बेस्ड चेंज से संबंधित कार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है। ये सभी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर-2 के अधीन यह काम संभालेंगे। टीम रेजिडेंट संगठनों के सुझावों, मकानों में किए गए बदलावों और मौके की स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर यह देखा जाएगा कि किन बदलावों को नियमित या कंपाउंड करने के लिए नियमों में प्रावधान अथवा छूट दी जा सकती है।
हजारों परिवारों को राहत की उम्मीद
नीड बेस्ड चेंज का मुद्दा सीएचबी के हजारों मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए अहम है। समय के साथ परिवार की जरूरतों के अनुसार कई आवंटियों ने मकानों में बदलाव किए हैं। इन्हीं बदलावों को लेकर बोर्ड की ओर से कार्रवाई और नोटिस की स्थिति भी सामने आती रही है। रेजिडेंट संगठन लंबे समय से व्यावहारिक और एक समान नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। अब चार सदस्यीय टीम के अध्ययन से इन परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है।