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हरियाणा में 12 हजार शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को दी हरी झंडी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 19 Jul 2018 09:39 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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पिछले चार साल से लंबित 12 हजार पीजीटी व टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया है। याचिकाओं में हरियाणा में चल रही पीजीटी व टीजीटी भर्ती की तकनीकी जांच की मांग की गई थी। हरियाणा में साल 2014 में अलग-अलग विज्ञापन के माध्यम से अलग-अलग विषयों के पीजीटी व टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे।
सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के अनुरूप 12 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जानी थी। इस बीच हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर मांग की गई कि इन भर्ती में नियुक्ति से पूर्व उम्मीदवारों की प्रमाण पत्रों की तकनीकी जांच व प्रमाण पत्रों की अंगूठा जांच करवा कर ही उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाए।
याचिकाकर्ता की दलील थी कि इससे पहले राज्य में जेबीटी की जों भर्तियां हुई थीं, सरकार ने उनके प्रमाण पत्रों की जांच किए बगैर नियुक्ति दे दी। नियुक्ति के बाद जब इन टीचर के प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो काफी संख्या में सर्टिफिकेट फर्जी निकले। बाद में उनको हटाने पडे। याची ने कहा कि ऐसी नौबत दोबारा न आए इसलिए नियुक्ति से पहले प्रमाण पत्रों की जांच की जाए।
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शिक्षकों की कमी का हवाला देकर रोक हटाने की मांग की
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस भर्ती पर जांच होने तक रोक लगा दी थी। इस मामले में सरकार ने एक अर्जी दायर कर राज्य में शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए रोक हटाने की मांग की थी। साथ में कोर्ट को सीडेक की एक रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया कि अंगूठे के निशान बदलते रहते हैं और ऐसे मे अंगूठे के प्रमाण पत्रों पर लगी छाप की जांच संभव नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए भर्ती को हरी झंडी दे दी। हाईकोर्ट के इस आदेश से लगभग 12 हजार पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।
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सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के अनुरूप 12 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जानी थी। इस बीच हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर मांग की गई कि इन भर्ती में नियुक्ति से पूर्व उम्मीदवारों की प्रमाण पत्रों की तकनीकी जांच व प्रमाण पत्रों की अंगूठा जांच करवा कर ही उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाए।
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याचिकाकर्ता की दलील थी कि इससे पहले राज्य में जेबीटी की जों भर्तियां हुई थीं, सरकार ने उनके प्रमाण पत्रों की जांच किए बगैर नियुक्ति दे दी। नियुक्ति के बाद जब इन टीचर के प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो काफी संख्या में सर्टिफिकेट फर्जी निकले। बाद में उनको हटाने पडे। याची ने कहा कि ऐसी नौबत दोबारा न आए इसलिए नियुक्ति से पहले प्रमाण पत्रों की जांच की जाए।
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शिक्षकों की कमी का हवाला देकर रोक हटाने की मांग की
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस भर्ती पर जांच होने तक रोक लगा दी थी। इस मामले में सरकार ने एक अर्जी दायर कर राज्य में शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए रोक हटाने की मांग की थी। साथ में कोर्ट को सीडेक की एक रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया कि अंगूठे के निशान बदलते रहते हैं और ऐसे मे अंगूठे के प्रमाण पत्रों पर लगी छाप की जांच संभव नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए भर्ती को हरी झंडी दे दी। हाईकोर्ट के इस आदेश से लगभग 12 हजार पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।