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कुंवर विजय प्रताप के बढ़े कद से एसआईटी में जंग, अफसरों का आरोप- खुद ही फैसले लेते हैं आईजी
Sun, 02 Jun 2019 11:25 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 02 Jun 2019 11:25 AM IST
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कुंवर विजय प्रताप
- फोटो : फाइल फोटो
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बेअदबी के मामले और बहिबल कलां व कोटकपुरा में धरना दे रहे सिख श्रद्धालुओं पर पुलिस फायरिंग की घटनाओं की जांच कर रही एसआईटी अपने भीतरी विवाद में घिरती नजर आ रही है। चुनाव आचार संहिता की अवधि समाप्त होने के बाद ड्यूटी पर लौटे एसआईटी के प्रमुख सदस्य आईजी कुंवर विजय प्रताप की वापसी अब एसआईटी के मुखिया और अन्य सदस्यों को अखर गई है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के मुखिया और अन्य सदस्यों ने राज्य के डीजीपी को जानकारी दी है कि आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा बरगाड़ी और बहिबल कलां मामले में जो चालान अदालत में पेश किया गया है, उसे लेकर आईजी ने न तो एसआईटी के मुखिया से और न ही अन्य सदस्यों से कोई राय मश्विरा किया है। एसआईटी की ओर से डीजीपी को यहां तक कह दिया गया है कि अदालत में पेश किए गए चालान के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं है। वैसे डीजीपी को यह भी बताया गया है कि चालान में काफी गड़बड़ियां हैं।
ऐसे में अगर अदालत द्वारा चालान पर एसआईटी से कोई जवाब तलबी की गई तो अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले ही कुंवर विजय प्रताप सिंह की ओर से बेअदबी, बहिबल कलां फायरिंग मामलों को लेकर अदालत में चालान पेश किया गया है, जिसमें अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, जो पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री थे, के अलावा तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के नाम शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के मुखिया और अन्य सदस्यों ने राज्य के डीजीपी को जानकारी दी है कि आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा बरगाड़ी और बहिबल कलां मामले में जो चालान अदालत में पेश किया गया है, उसे लेकर आईजी ने न तो एसआईटी के मुखिया से और न ही अन्य सदस्यों से कोई राय मश्विरा किया है। एसआईटी की ओर से डीजीपी को यहां तक कह दिया गया है कि अदालत में पेश किए गए चालान के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं है। वैसे डीजीपी को यह भी बताया गया है कि चालान में काफी गड़बड़ियां हैं।
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ऐसे में अगर अदालत द्वारा चालान पर एसआईटी से कोई जवाब तलबी की गई तो अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले ही कुंवर विजय प्रताप सिंह की ओर से बेअदबी, बहिबल कलां फायरिंग मामलों को लेकर अदालत में चालान पेश किया गया है, जिसमें अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, जो पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री थे, के अलावा तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के नाम शामिल हैं।
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अकाली दल ने उठाए सवाल
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के लीगल सेल के प्रधान एडवोकेट परोपकार सिंह घुम्मन ने कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा अदालत में पेश किए चालान पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कुंवर विजय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इशारे पर केवल निजी रंजिश में काम कर रहे हैं।
इस चालान पर 23 मई को किए गए उनके हस्ताक्षर से साफ हो गया है कि वे चुनाव आयोग द्वारा एसआईटी से अलग किए जाने के बाद भी उसके अधिकारी के तौर पर काम करते रहे हैं और मुख्यमंत्री ने चुनाव आचार संहिता की अवधि खत्म होते ही सबसे पहले कुंवर विजय प्रताप को ही एसआईटी में दोबारा भेजने का फैसला लिया।
बादलों और सैनी की बचाने की चाल : खैरा
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने शनिवार को एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि बेअदबी के मामलों की जांच कर रही एसआईटी के चार सदस्यों द्वारा आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह की ओर से पेश किए गए चालान पर असहमति जताए जाने की खबरें और कुछ नहीं बल्कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता द्वारा जांच को पूरी तरह तारपीडो करने और दोषियों को बचाने की चाल है।
खैरा ने आरोप लगाया कि अब जबकि लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और कैप्टन व कांग्रेस ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी व बहिबल कलां में फायरिंग का मुद्दा उठाकर पंजाब में आठ सीटें जीत ली हैं तो कैप्टन व डीजीपी अपने दोस्तों बादलों और सुमेध सैनी को क्लीन चिट दिलाने की मुहिम में जुट गए हैं।
इस चालान पर 23 मई को किए गए उनके हस्ताक्षर से साफ हो गया है कि वे चुनाव आयोग द्वारा एसआईटी से अलग किए जाने के बाद भी उसके अधिकारी के तौर पर काम करते रहे हैं और मुख्यमंत्री ने चुनाव आचार संहिता की अवधि खत्म होते ही सबसे पहले कुंवर विजय प्रताप को ही एसआईटी में दोबारा भेजने का फैसला लिया।
बादलों और सैनी की बचाने की चाल : खैरा
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने शनिवार को एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि बेअदबी के मामलों की जांच कर रही एसआईटी के चार सदस्यों द्वारा आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह की ओर से पेश किए गए चालान पर असहमति जताए जाने की खबरें और कुछ नहीं बल्कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता द्वारा जांच को पूरी तरह तारपीडो करने और दोषियों को बचाने की चाल है।
खैरा ने आरोप लगाया कि अब जबकि लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और कैप्टन व कांग्रेस ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी व बहिबल कलां में फायरिंग का मुद्दा उठाकर पंजाब में आठ सीटें जीत ली हैं तो कैप्टन व डीजीपी अपने दोस्तों बादलों और सुमेध सैनी को क्लीन चिट दिलाने की मुहिम में जुट गए हैं।