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शहर में कूड़े और महिलाओं के सार्वजनिक शौचालय की सफाई होने की उम्मीद
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चंडीगढ़। बदलाव बहुत जरूरी था। क्योंकि पिछले कई सालों से निगम में एक ही पार्टी सत्ता में थी। जिसका नतीजा ये मिला कि शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी। उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी अपने वादों पर खरी उतरेगी। शहर के लोगों ने आप पर विश्वास जताया है। निगम चुनाव में फेरबदल का मुख्य कारण मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल था, सत्ताधारी पार्टियों ने शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर रखरखाव के मामले में लापरवाही बरती, जिससे जनता परेशान हो चुकी थी।
महिला शौचालय का बुरा हाल
सेक्टर के अंदर की सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सफाई न होने से पार्कों की हालत बुरी है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या पार्कों व सेक्टरों की मार्केट में बने महिला शौचालयों की सफाई नहीं होना है। कई जगह शौचालय के बाहर रखरखाव के 5 रुपये लिए जाते हैं। इसके बाद भी कहीं, साबुन नहीं मिलना को कहीं पानी किल्लत का सामना करना पड़ता है।
- प्रभजीत कौर, निवासी सेक्टर-35
मुख्य सेक्टरों में उखड़े पेवर ब्लॉक
शहर के मुख्य सेक्टर-8 और 9 में लाइन बिछाने के लिए पेवर ब्लॉक उखाड़ कर गड्ढे खोद दिए गये, लेकिन उन्हें बंद नहीं किया गया। छह महीना इंतजार करने के बाद लोगों ने खुद अपने घरों के सामने गड्ढे भरवाए और फुटपाथ सही करवाया। सेक्टरों की सड़कों, पार्कों के रखरखाव का बुरा हाल है। सेक्टर-8 को पॉश इलाका माना जाता है, लेकिन स्थिति दयनीय है।
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- डॉ. मधु, सेक्टर-8
शिक्षा व महिला सुरक्षा में सुधार की उम्मीद
उम्मीद है उभरने वाली नई पार्टी शहर के विकास पर फोकस करेगी। शहर में स्कूलों की स्थिति ठीक है, लेकिन गांव और कालोनी में शिक्षा में सुधार की जरूरत है। शहर में सत्ता का बदलाव जरूरी था। नई पार्टी के जीते उम्मीदवारों का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। आम लोगों से निकले हैं, इसलिए आम जनता को ज्यादा उम्मीद है।
- मोहिंदर कटारिया, सेक्टर-12
कूड़े और पानी के बिल में हुई बढ़ोतरी
भाजपा शासनकाल में कूड़े और पानी के बिलों में सिर्फ बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, शहर के अंदर की सड़कों की हालत नहीं सुधर पाई। समस्याओं के समाधान के लिए बदलाव जरूरी था। उम्मीद है कि इस बदलाव से शहर के रखरखाव और सफाई व्यवस्था में भी बदलाव आएगा। सत्ता में फेरबदल लोगों ने सोच समझकर किया है।
- डॉ. रूपिंदर कौर, सेक्टर-39
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महिला शौचालय का बुरा हाल
सेक्टर के अंदर की सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सफाई न होने से पार्कों की हालत बुरी है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या पार्कों व सेक्टरों की मार्केट में बने महिला शौचालयों की सफाई नहीं होना है। कई जगह शौचालय के बाहर रखरखाव के 5 रुपये लिए जाते हैं। इसके बाद भी कहीं, साबुन नहीं मिलना को कहीं पानी किल्लत का सामना करना पड़ता है।
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- प्रभजीत कौर, निवासी सेक्टर-35
मुख्य सेक्टरों में उखड़े पेवर ब्लॉक
शहर के मुख्य सेक्टर-8 और 9 में लाइन बिछाने के लिए पेवर ब्लॉक उखाड़ कर गड्ढे खोद दिए गये, लेकिन उन्हें बंद नहीं किया गया। छह महीना इंतजार करने के बाद लोगों ने खुद अपने घरों के सामने गड्ढे भरवाए और फुटपाथ सही करवाया। सेक्टरों की सड़कों, पार्कों के रखरखाव का बुरा हाल है। सेक्टर-8 को पॉश इलाका माना जाता है, लेकिन स्थिति दयनीय है।
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- डॉ. मधु, सेक्टर-8
शिक्षा व महिला सुरक्षा में सुधार की उम्मीद
उम्मीद है उभरने वाली नई पार्टी शहर के विकास पर फोकस करेगी। शहर में स्कूलों की स्थिति ठीक है, लेकिन गांव और कालोनी में शिक्षा में सुधार की जरूरत है। शहर में सत्ता का बदलाव जरूरी था। नई पार्टी के जीते उम्मीदवारों का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। आम लोगों से निकले हैं, इसलिए आम जनता को ज्यादा उम्मीद है।
- मोहिंदर कटारिया, सेक्टर-12
कूड़े और पानी के बिल में हुई बढ़ोतरी
भाजपा शासनकाल में कूड़े और पानी के बिलों में सिर्फ बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, शहर के अंदर की सड़कों की हालत नहीं सुधर पाई। समस्याओं के समाधान के लिए बदलाव जरूरी था। उम्मीद है कि इस बदलाव से शहर के रखरखाव और सफाई व्यवस्था में भी बदलाव आएगा। सत्ता में फेरबदल लोगों ने सोच समझकर किया है।
- डॉ. रूपिंदर कौर, सेक्टर-39