फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   City Beautiful Chandigarh Greenery in Danger

'ग्रीन सिटी' चंडीगढ़ की हरियाली को खतरा, 50 प्रतिशत पेड़ों की उम्र हुई पूरी, चल रहा गहन मंथन

Mon, 17 Feb 2020 01:52 PM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 17 Feb 2020 01:52 PM IST
विज्ञापन
City Beautiful Chandigarh Greenery in Danger
सांकेतिक तस्वीर
चंडीगढ़ की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली हरियाली पर खतरा मंडरा रहा है। हरे-भरे दिखने वाले 50 फीसदी पेड़ अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। प्रशासन भी इसे लेकर चिंतित है और पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरण विशेषज्ञों से सलाह लेने पर विचार कर रहा है। चंडीगढ़ में लगभग 14 लाख से अधिक पेड़ हैं। इनमें 16,500 पेड़ों की देखरेख नगर निगम करता है।
विज्ञापन


यूटी प्रशासन के पास 22 हजार पेड़ों की देखरेख का जिम्मा है। इसके अलावा लगभग 50 हजार पेड़ लोगों के घरों में लगे हुए हैं, जिनकी देखरेख लोग स्वयं करते हैं। 10 लाख से अधिक पेड़ों की देखरेख वन विभाग करता है। शहर में लगे पेड़ों को चंडीगढ़ की आधारशिला रखे जाने के बाद 1952 में रोपा गया था। 68 वर्ष बीत जाने के बाद अब ये कमजोर होने लगे हैं।
विज्ञापन


यह खुलासा वर्ष 2019 में एफआरआई देहरादून से पहुंची टीम ने अपनी रिपोर्ट में किया था। इसके बाद प्रशासन भी इसे लेकर चिंतित है और वह इन पेड़ों को बचाने के लिए रणनीति बना रहा है। चंडीगढ़ के डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने बताया कि इसके लिए पर्यावरण विशेषज्ञों से राय ली जाएगी। इसके बाद ही रणनीति बनाकर कार्य किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 साल में जा चुकी हैं 6 जानें

खोखले और कमजोर हो चुके इन पेड़ों से अब आमजन को खतरा हो गया है। तेज हवा के कारण छह सालों में छह स्थानों पर पेड़ गिरने से अब तक 6 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सेक्टर-10 में एक पेड़ गिरने से दो मासूम दब गए थे, जिसमें एक की मौके पर ही मौत हो गई थी।

इन कारणों से हो रहा नुकसान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ों की देखरेख पर्याप्त नहीं हो रही है। इस कारण से ऐसे हालात बने हुए हैं। इसके साथ ही पेड़ों में कीटनाशक का स्प्रे नहीं किए जाने के कारण पेड़ों को दीमक भी खोखला कर रही है।

2017 में मिला था ग्रीन क्लीन सिटी अवार्ड
चंडीगढ़ शहर को 2017 में ग्रीन एंड क्लीन सिटी का अवार्ड मिला था। यह अवार्ड केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नगर निगम चंडीगढ़ की तत्कालीन मेयर आशा जायसवाल को महाराष्ट्र में आयोजित हुए एक समारोह के दौरान दिया था।

10 करोड़ से अधिक होता है हर साल खर्च
शहर की हरियाली को बचाने के लिए सिटी ब्यूटीफुल में हर साल 10 करोड़ रुपये से अधिक का खर्चा किया जाता है। इस साल भी एमसी के द्वारा 15 करोड़ रुपये बजट की मांग की गई है।

ये पेड़ हैं शहर में

चंडीगढ़ शहर की हरियाली को बचाने में बड़, पीपल, पिल्खन, गुलमोहर, तुन, मोहगनी, मरोड़फली, ढाक, एल्स्ट्रोनिया, चकरेड़ा, शीशम आदि के पेड़ अहम भूमिका निभा रहे हैं।

विशेष अध्ययन के बाद रोपे थे पौधे
आपको यह जानकार हैरानी जरूर होगी कि चंडीगढ़ शहर में पौधे रोपित करने से पहले विशेष अध्ययन किया गया था। तत्कालीन पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आईसीएस डॉ. एमएस रंधावा ने शहर को हरा-भरा करने में अहम भूमिका निभाई थी। अध्ययन के अनुसार ही शहर में किस जगह कहां पर कौन-सी पौध लगाई जाएगी, उसी के अनुसार कार्य किया गया।

पेड़ों को लेकर एफआरआई से ली जा रही
शहर में कई ऐसे पेड़ हैं जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इसके साथ ही वह भारी भी हो चुके हैं। तेज हवा चलने पर वह कमजोर होने के कारण गिर रहे हैं। इन पेड़ों को बदलने की तैयारी चल रही है। एफआरआई देहरादून से भी इसके लिए राय ली जा रही है। -देवेंद्र दलाई, पर्यावरण निदेशक, चंडीगढ़

पर्यावरणविद् बोले- नहीं हो रही है पेड़ों की देखरेख
शहर की हरियाली को बचाने के लिए जो देखरेख आवश्यक है, वह नहीं की जा रही है। कई करोड़ रुपये पेड़ों की देखरेख के नाम पर अब तक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई भी नतीजा नहीं निकला है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। -राहुल महाजन, पर्यावरणविद्, चंडीगढ़

उद्यान विभाग कर रहा है देखरेख
नगर निगम के अंतर्गत आने वाले पेड़ों की पूरी देखरेख की जा रही है। समय-समय पर कीटनाशक का स्प्रे और अन्य उपाय निगम की ओर से हो रहे हैं।
- केपी सिंह, एससी, उद्यान विभाग, नगर निगम, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed