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CII एग्रोटेक-2016: खेती के नए उपकरणों ने खींचा किसानों का ध्यान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 21 Nov 2016 09:44 PM IST
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खेती के नए उपकरणों ने खींचा किसानों का ध्यान
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित परेड ग्राउंड में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एग्रोटेक-2016 में खेती की नवीनतम तकनीक और उपकरण, नए बीज और सौर ऊर्जा ने किसानों का ध्यान खींच लिया।
प्रदर्शनी देखने पहुंचे किसानों में से ज्यादातर का मानना है कि यहां कई चीजें ऐसी हैं जिनको अपनाकर उन्हें लाभ मिलेगा और वह अधिक मुनाफा कमाएंगे। अंबाला की बराड़ा तहसील के अधोई गांव के किसान सुखजिंदर सिंह ने कहा यह मशीन अच्छी हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा समाधान चाहते हैं कि फसल उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि वह पराली जलाने से हो रहे नुकसान से वाकिफ हैं।
इसके प्रसंस्करण के लिए नए सस्ते और प्रासंगिक समाधान चाहते हैं। जब उनको बताया गया कि सीआईआई एग्रोटेक-2016 में भूसे से जैविक खाद बनाने की विधि को एक स्टॉल में प्रदर्शित किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि वास्तव में, ऐसी चीजें इस आयोजन को सबसे अलग बनाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके ग्रुप के बहुत के किसान पॉलीहाउस खेती में रुचिकर हैं। एक किसान एसके रंधावा ने कहा कि वह ऐसे समाधान की तलाश में हैं जिससे वह कैटल-शेड को कम लागत में ज्यादा वातानुकुलित बना सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के मेले किसानों को प्रोत्साहन देते हैं। फगवाड़ा के किसान रामदेव सिंह ने कहा कि वह लाठी की मदद से चलते हैं,लेकिन वह अपने बेटे के साथ सीआईआई एग्रो टेक-2016 देखने आएं हैं।
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प्रदर्शनी देखने पहुंचे किसानों में से ज्यादातर का मानना है कि यहां कई चीजें ऐसी हैं जिनको अपनाकर उन्हें लाभ मिलेगा और वह अधिक मुनाफा कमाएंगे। अंबाला की बराड़ा तहसील के अधोई गांव के किसान सुखजिंदर सिंह ने कहा यह मशीन अच्छी हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा समाधान चाहते हैं कि फसल उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि वह पराली जलाने से हो रहे नुकसान से वाकिफ हैं।
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इसके प्रसंस्करण के लिए नए सस्ते और प्रासंगिक समाधान चाहते हैं। जब उनको बताया गया कि सीआईआई एग्रोटेक-2016 में भूसे से जैविक खाद बनाने की विधि को एक स्टॉल में प्रदर्शित किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि वास्तव में, ऐसी चीजें इस आयोजन को सबसे अलग बनाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके ग्रुप के बहुत के किसान पॉलीहाउस खेती में रुचिकर हैं। एक किसान एसके रंधावा ने कहा कि वह ऐसे समाधान की तलाश में हैं जिससे वह कैटल-शेड को कम लागत में ज्यादा वातानुकुलित बना सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के मेले किसानों को प्रोत्साहन देते हैं। फगवाड़ा के किसान रामदेव सिंह ने कहा कि वह लाठी की मदद से चलते हैं,लेकिन वह अपने बेटे के साथ सीआईआई एग्रो टेक-2016 देखने आएं हैं।
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किसानों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे मोबाइल एप्लिकेशन
सीआईआई एग्रोटेक के दौरान एग-हैक का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
सीआईआई एग्रोटेक-2016 के दौरान सोमवार को सीआईआई मुख्यालय में कार्यक्रम एग-हैक का आयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने किसानों की मदद के लिए मोबाइल एप्लिकेशन सॉल्यूशन का परीक्षण किया गया। साथ ही कई अच्छे सॉल्यूशन पर सुझाव दिए गए।
टीमों ने छह प्रमुख विषयों मृदा स्वास्थ्य, कृषि विपणन नेटवर्क, डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण, फसल बीमा लाभ और डेयरी फार्म प्रबंधन पर काम किया। भारत, ग्रीस, इजराइल, मलेशिया के 25 विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का आकलन किया। ग्रीस के डॉ. जोआना रोसाकी ने कहा कि यह ऐसा प्लेटफार्म है जहां छात्र कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने विचारों और समाधानों का परीक्षण कर सकते हैं। अगर कोई प्रतिभागी ग्रीस में स्टडी करना चाहता है, तो उसे शैक्षिक सहयोग दिया जाएगा।
आईआईटी मद्रास के शशांक गुप्ता ने तीन मुख्य समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की है। किसानों की लागत और राजस्व की समस्या, नीति निर्धारण में राज्य सरकारों की अक्षमता और कंपनियों द्वारा नए उत्पाद के लॉॅन्च के लिए सबसे अच्छे भौगोलिक हालात का मूल्यांकन शामिल है। आईआईटी मद्रास और कृषि प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा की टीम ने मोबाइल डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण पर योजना प्रस्तुत की।
टीमों ने छह प्रमुख विषयों मृदा स्वास्थ्य, कृषि विपणन नेटवर्क, डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण, फसल बीमा लाभ और डेयरी फार्म प्रबंधन पर काम किया। भारत, ग्रीस, इजराइल, मलेशिया के 25 विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का आकलन किया। ग्रीस के डॉ. जोआना रोसाकी ने कहा कि यह ऐसा प्लेटफार्म है जहां छात्र कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने विचारों और समाधानों का परीक्षण कर सकते हैं। अगर कोई प्रतिभागी ग्रीस में स्टडी करना चाहता है, तो उसे शैक्षिक सहयोग दिया जाएगा।
आईआईटी मद्रास के शशांक गुप्ता ने तीन मुख्य समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की है। किसानों की लागत और राजस्व की समस्या, नीति निर्धारण में राज्य सरकारों की अक्षमता और कंपनियों द्वारा नए उत्पाद के लॉॅन्च के लिए सबसे अच्छे भौगोलिक हालात का मूल्यांकन शामिल है। आईआईटी मद्रास और कृषि प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा की टीम ने मोबाइल डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण पर योजना प्रस्तुत की।