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क्राइम पर लगाम के लिए सीआईए-टू जल्द
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 19 Jan 2014 12:47 PM IST
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शहर में लूट, स्नैचिंग व चोरियों पर लगाम लगाने के लिए एक बार फिर क्राइम इंवेस्टीगेशन एजेंसी-टू (सीआईए-टू) बनाया जाएगा। पुलिम महकमे के आला अधिकारी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही सीआईए-टू काम करने लगेगा। फिलहाल पंचकूला में एक ही क्राइम ब्रांच है।
दरअसल, पंचकूला में पहले सीआईए और डिटेक्टिव स्टॉफ था। जो पंचकूला में क्राइम पर लगाम लगाने और उसे सुलझाने में काम करते थे। दोनों ही स्टॉफ में पर्याप्त पुलिस कर्मी और जांच अधिकारी थे।
करीब डेढ़ साल पहले डिटेक्टिव स्टॉफ को भंग कर दिया गया था और सिर्फ सीआईए ही रह गई थी। हालांकि, करीब पांच महीनें पहले भी दोबारा से सीआईए-टू बनाया गया, लेकिन चार दिन में ही स्टॉफ भंग कर दिया गया।
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अब एक बार फिर से इस दिशा में प्रयास शुरू हो गया है। सीआईए-टू मुख्य रूप से वाहन चोरी और स्नैचिंग पर कंट्रोल करेगा। क्योंकि पंचकूला में स्नैचिंग और वाहन चोरी का ग्राफ बढ़ा है। पिछले साल 100 से भी ज्यादा स्नैचिंग की वारदात हुई। जबकि, हर तीन दिन में दो वाहन चोरी के मामले दर्ज होते हैं।
डीसीपी की डायरेक्ट निगरानी में होता है स्टॉफ
सीआईए स्टॉफ डायरेक्ट डीसीपी की निगरानी में होता है। इसमें एक इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को इंचार्ज लगाकर अन्य स्टॉफ दिया जाता है। हालांकि, फिलहाल पंचकूला में इंस्पेक्टरों का टोटा हो गया है।
मौजूदा सीआईए की कमान भी अभी इंस्पेक्टर के हाथ मे नहीं है। क्योंकि आधा दर्जन इंस्पेक्टरों की ट्रांसफर या प्रमोशन हो गई है। जब नए इंस्पेक्टर आएंगे तो ही यह कमी पूरी हो सकेगी।
इस बारे में विचार किया जा रहा है। जल्द ही कोई फैसला ले लिया जाएगा।
अजय सिंघल, कमिश्नर ऑफ पुलिस
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दरअसल, पंचकूला में पहले सीआईए और डिटेक्टिव स्टॉफ था। जो पंचकूला में क्राइम पर लगाम लगाने और उसे सुलझाने में काम करते थे। दोनों ही स्टॉफ में पर्याप्त पुलिस कर्मी और जांच अधिकारी थे।
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करीब डेढ़ साल पहले डिटेक्टिव स्टॉफ को भंग कर दिया गया था और सिर्फ सीआईए ही रह गई थी। हालांकि, करीब पांच महीनें पहले भी दोबारा से सीआईए-टू बनाया गया, लेकिन चार दिन में ही स्टॉफ भंग कर दिया गया।
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अब एक बार फिर से इस दिशा में प्रयास शुरू हो गया है। सीआईए-टू मुख्य रूप से वाहन चोरी और स्नैचिंग पर कंट्रोल करेगा। क्योंकि पंचकूला में स्नैचिंग और वाहन चोरी का ग्राफ बढ़ा है। पिछले साल 100 से भी ज्यादा स्नैचिंग की वारदात हुई। जबकि, हर तीन दिन में दो वाहन चोरी के मामले दर्ज होते हैं।
डीसीपी की डायरेक्ट निगरानी में होता है स्टॉफ
सीआईए स्टॉफ डायरेक्ट डीसीपी की निगरानी में होता है। इसमें एक इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को इंचार्ज लगाकर अन्य स्टॉफ दिया जाता है। हालांकि, फिलहाल पंचकूला में इंस्पेक्टरों का टोटा हो गया है।
मौजूदा सीआईए की कमान भी अभी इंस्पेक्टर के हाथ मे नहीं है। क्योंकि आधा दर्जन इंस्पेक्टरों की ट्रांसफर या प्रमोशन हो गई है। जब नए इंस्पेक्टर आएंगे तो ही यह कमी पूरी हो सकेगी।
इस बारे में विचार किया जा रहा है। जल्द ही कोई फैसला ले लिया जाएगा।
अजय सिंघल, कमिश्नर ऑफ पुलिस