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बच्ची बोलीः अंकल! पूरा परिवार भूखा है...साफ करके धान के खराब दाने उठा लेने दो प्लीज
Fri, 17 Apr 2020 12:08 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2020 12:08 PM IST
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कूड़े के ढेर से धान के खराब दाने बटोरती बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
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भूख रोती है, तिलमिलाती है/सूखे होंठों को ये जलाती है/अपनी बेचैनी के सभी किस्से/झांक कर आंखों से दिखाती है.. कवि विजय यादव की यह पंक्तियां झकझोर कर रख देती हैं। लेकिन ये पंक्तियां उस वक्त जिंदा हो उठीं, जब चंडीगढ़ में सेक्टर-39 की ग्रेन मार्केट में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसे देखकर कलेजा कांप उठा। जिसने भी वो तस्वीर देखी, उसका दिल दहल गया। भूख से बेहाल एक मासूम बच्ची कूड़े के ढेर से साफ करके धान के खराब दाने बटोर रही थी। और कैसे दिन दिखाएगा भगवान, मासूम बच्चे भूख से छटपटाहट रहे हैं।
चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद इस बार सेक्टर-26 की ग्रेन मंडी की जगह सेक्टर-39 की मंडी में होगी। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। वीरवार को मंडी की सफाई की जा रही थी। इस दौरान यहां जो कूड़ा निकला, उसमें पहले हुई धान की खरीद से गिरे हुए धान के दाने भी थे। जब इस बात की खबर पास की झुग्गी में रहने वालों को हुई तो बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए, ताकि उस धान को बटोर सकें। एक बच्ची भी आई अपने परिवार के साथ धान बटोरने के लिए।
बच्ची ने कर्मचारियों से पूछा कि अंकल क्या मैं धान के खराब हो रहे इन दानों को ले लूं। बच्चे के चेहरे पर भूख का दर्द साफ झलक रहा था। अंकल ने पूछा कि बेटा, आप इसका क्या करोगी तो बच्ची ने कहा कि वह और उसका परिवार भूखा है। वह इसे ले जाकर पकाएगी, जिसे घर वाले खाएंगे। यह बात सुनकर कर्मचारियों का दिल दहल गया।
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चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद इस बार सेक्टर-26 की ग्रेन मंडी की जगह सेक्टर-39 की मंडी में होगी। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। वीरवार को मंडी की सफाई की जा रही थी। इस दौरान यहां जो कूड़ा निकला, उसमें पहले हुई धान की खरीद से गिरे हुए धान के दाने भी थे। जब इस बात की खबर पास की झुग्गी में रहने वालों को हुई तो बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए, ताकि उस धान को बटोर सकें। एक बच्ची भी आई अपने परिवार के साथ धान बटोरने के लिए।
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बच्ची ने कर्मचारियों से पूछा कि अंकल क्या मैं धान के खराब हो रहे इन दानों को ले लूं। बच्चे के चेहरे पर भूख का दर्द साफ झलक रहा था। अंकल ने पूछा कि बेटा, आप इसका क्या करोगी तो बच्ची ने कहा कि वह और उसका परिवार भूखा है। वह इसे ले जाकर पकाएगी, जिसे घर वाले खाएंगे। यह बात सुनकर कर्मचारियों का दिल दहल गया।
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प्रशासन का दावा, फिर भी गरीबों को नहीं मिल रहा खाना
यह दृश्य सोचने पर विवश करता है कि कोरोना महामारी से चंडीगढ़ जैसा शहर भी भुखमरी की तरफ बढ़ रहा है। प्रशासन चाहे खाना वितरित करने के लाख दावे करे, लेकिन ग्रेन मार्केट की हालात देखकर लग रहा था कि आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जो दो वक्त के खाने से भी महरूम हैं।
कहां बांटे गए 60 हजार से अधिक खाने के पैकेट
कर्फ्यू के दौरान चंडीगढ़ के घरों में कैद लोगों को अब तक 60 हजार से अधिक खाने के पैकेट वितरित किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही हर पात्र को 30 किलो गेहूं और अन्य खाद्य सामग्री दी जा रही है। कोरोना से बचने के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी बांटे जा रहे हैं। इसके बाद भी चंडीगढ़ में इस बच्ची जैसे लोग और परिवार खाने को मोहताज हैं। इन हालातों में यूटी प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।
कहां बांटे गए 60 हजार से अधिक खाने के पैकेट
कर्फ्यू के दौरान चंडीगढ़ के घरों में कैद लोगों को अब तक 60 हजार से अधिक खाने के पैकेट वितरित किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही हर पात्र को 30 किलो गेहूं और अन्य खाद्य सामग्री दी जा रही है। कोरोना से बचने के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी बांटे जा रहे हैं। इसके बाद भी चंडीगढ़ में इस बच्ची जैसे लोग और परिवार खाने को मोहताज हैं। इन हालातों में यूटी प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।