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नहीं दिखा विरोध का असर, चाइनीज लड़ियों से सजा बाजार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Oct 2016 05:36 PM IST
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मार्केट चाइनीज लड़ियों से गुलजार
- फोटो : अमर उजाला
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भारत-पाक के रिश्तों में आई खटास के बीच चीन के खिलाफ भी देश में विरोध के स्वर उठे थे। कारण, चीन का पाकिस्तान को हर तरह से समर्थन देना। सोशल साइट्स से लेकर हर ओर पाकिस्तान और चीन के सामान का विरोध होने लगा। दिवाली पर देश में सबसे अधिक चाइनीज सामान ही बिकता है। इसी को लेकर इस बार दिवाली पर चाइनीज सामान के बहिष्कार की मुहिम चलाई गईं।
चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट इन दिनों चाइनीज लड़ियों से गुलजार हैं। हर साल की तरह यहां इस बार भी चाइनीज लड़ियां बिक रहीं हैं। कहने को देसी लड़ियां भी यहां मौजूद हैं, लेकिन उनकी कीमत चाइनीज के मुकाबले बहुत अधिक है। इसलिए इसके खरीददार भी बहुत कम हैं।
चाइनीज सामान की ब्रिकी को लेकर दुकानदार पहले तो कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए, काफी कोशिश पर एक-दो दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चाइनीज लड़ियों और सामान के बहिष्कार का मार्केट पर कोई खास असर नहीं है। हर साल की तरह इस बार भी डिमांड वैसी ही है। उन्होंने बताया कि हर साल दिवाली के लिए जनवरी या फरवरी में आर्डर दे दिया जाता है, जबकि विरोध के स्वर तो अभी एक महीने से उठने लगे हैं। हालांकि इसका कोई खास असर नहीं है। हां ये जरूर है कि उन्होंने इस बार पिछले साल के मुकाबले कम सामान आर्डर किया था। क्योंकि पिछले वर्ष काफी सामान नहीं बिका था।
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दुकानदारों के अनुसार सरकार को अगर बैन लगाना होता तो बहुत पहले लगा चुकी होती। सरकार खुद तो इस पर 23 फीसदी टैक्स वसूलती है, ऐसे में इसे कैसे बंद कर सकती है। एक दुकानदार ने बताया कि लोगों को सस्ते से मतलब है। अब वह किस देश का है इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
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चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट इन दिनों चाइनीज लड़ियों से गुलजार हैं। हर साल की तरह यहां इस बार भी चाइनीज लड़ियां बिक रहीं हैं। कहने को देसी लड़ियां भी यहां मौजूद हैं, लेकिन उनकी कीमत चाइनीज के मुकाबले बहुत अधिक है। इसलिए इसके खरीददार भी बहुत कम हैं।
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चाइनीज सामान की ब्रिकी को लेकर दुकानदार पहले तो कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए, काफी कोशिश पर एक-दो दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चाइनीज लड़ियों और सामान के बहिष्कार का मार्केट पर कोई खास असर नहीं है। हर साल की तरह इस बार भी डिमांड वैसी ही है। उन्होंने बताया कि हर साल दिवाली के लिए जनवरी या फरवरी में आर्डर दे दिया जाता है, जबकि विरोध के स्वर तो अभी एक महीने से उठने लगे हैं। हालांकि इसका कोई खास असर नहीं है। हां ये जरूर है कि उन्होंने इस बार पिछले साल के मुकाबले कम सामान आर्डर किया था। क्योंकि पिछले वर्ष काफी सामान नहीं बिका था।
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दुकानदारों के अनुसार सरकार को अगर बैन लगाना होता तो बहुत पहले लगा चुकी होती। सरकार खुद तो इस पर 23 फीसदी टैक्स वसूलती है, ऐसे में इसे कैसे बंद कर सकती है। एक दुकानदार ने बताया कि लोगों को सस्ते से मतलब है। अब वह किस देश का है इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।