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Chandigarh: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बच्चों को स्कूल से बाहर किया, प्रिंसिपल के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल

Thu, 11 Aug 2022 11:01 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Aug 2022 11:01 AM IST
सार

चंडीगढ़ निवासी एमएम खान कोरोना के दौर में अपने बच्चों की फीस जमा नहीं करवा सके तो उनके बच्चों को कक्षा और परीक्षा से वंचित करने की तैयारी की गई थी। 2021 में उहाईकोर्ट ने आगे की फीस जमा करवाने का आदेश देते हुए बच्चों को कक्षा व परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी।

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children were thrown out of school, contempt petition filed against principal in Punjab Haryana High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

हाईकोर्ट द्वारा बच्चों को कक्षा में बैठाने के आदेश के बावजूद मनीमाजरा के डीसी मोंटेसरी स्कूल की ओर से बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने के खिलाफ पिता ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में याचिका पर 16 अगस्त को सुनवाई होगी।

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याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी एमएम खान ने बताया कि कोरोना के कठिन दौर में वह अपने बच्चों की फीस जमा नहीं करवा सका था। तब उसके बच्चों को कक्षा और परीक्षा से वंचित करने की तैयारी की गई थी। 2021 में उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी तो हाईकोर्ट ने आगे की फीस जमा करवाने का आदेश देते हुए बच्चों को कक्षा व परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद कोरोना के कठिन दौर के चलते वह फीस नहीं जमा करवा सका। इसके बाद फिर उसके बच्चों को कक्षाओं से वंचित कर दिया गया। फिर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई तो हाईकोर्ट ने आगे की फीस जमा करवाने का आदेश देते हुए बच्चों को स्कूल में वापस लेने का आदेश दिया था। 
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आदेश के बावजूद 25 जुलाई 2022 को जब याची अपने बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचा तो बच्चों को स्कूल में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। याची ने इसके बाद पुलिस बुलाई और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दिखाई लेकिन बच्चों को प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद याची ने अपने वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा। इसके बाद 29 जुलाई को याची अपने बच्चों को स्कूल छोड़ आया। कुछ देर बाद याची को स्कूल से फोन आया कि याची अपने बच्चों को स्कूल के बाहर से ले जाए। याची ने कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है। ऐसे में स्कूल की प्रिंसिपल के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाए।

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