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चंडीगढ़: बच्चो! मन से डर निकालें, कोरोना से बचने के लिए टीका लगवा लें
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चंडीगढ़। कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत विभाग को कोविशील्ड के बाद अब कोवैक्सीन की खुराक के उपयोग का लक्ष्य प्रदान किया गया है। पिछली बार दो हजार तो इस बार विभाग को तीन हजार खुराक का उपयोग एक्सपायरी से पहले सुनिश्चित करना होगा। काम कठिन है, लेकिन विभाग इस बार भी तैयार है। कोवैक्सीन की तीन हजार खुराक को 31 मार्च से पहले लाभार्थियों लगानी है अन्यथा बची हुई खुराक 31 मार्च को एक्सपायर हो जाएगी। लाभार्थियों में शामिल लगभग 20 हजार से ज्यादा बच्चों ने दूसरी खुराक नहीं लगवाई है। बच्चे परीक्षा के दौरान टीका लगवाने से डर रहे हैं जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि वे इस डर को मन से निकालकर जल्द से जल्द टीका लगवा लें। इसके लिए टीकाकरण की टीम ने ड्यू लिस्ट में शामिल लाभार्थियों को कॉल कर टीका लगवाने की याद दिला रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पूर्व विभाग को कोविशील्ड की दो हजार खुराक के उपयोग के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 28 दिसंबर 2022 को मिली दो हजार खुराक की एक्सपायरी 10 फरवरी 2023 थी। ऐसे में विभाग को लगातार अलग-अलग जगहों पर शिविर लगाकर उसका उपयोग सुनिश्चित करना पड़ा। अभियान के तहत अंतिम दिन 10 फरवरी को भी कोविशील्ड की खुराक लगाकर शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने में सफलता प्राप्त की गई।
बॉक्स
20 हजार से ज्यादा बच्चे दूसरी खुराक से हैं वंचित
टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत 15-17 साल के जिन लाभार्थियों को कोवैक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है उनमें से 20 हजार से ज्यादा बच्चे दूसरी खुराक से अब तक वंचित हैं। इसका मुख्य कारण कोरोना संक्रमण दर का नीचे आना है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण के दौरान लोग डरे होते हैं और खुद के साथ ही अपने पूरे परिवार को सुरक्षित करने का जतन करते हैं। लेकिन काफी ज्यादा समय से संक्रमण दर कम होने के कारण यह डर खतम हो गया है। इस कारण बच्चों को दूसरी खुराक लगवाने में लापरवाही कर रहे हैं। जबकि यह ठीक नहीं है। अभियान के तहत अब तक 104.37 प्रतिशत बच्चों को टीके की पहली और 75.44 प्रतिशत को दूसरी और महज 2.43 प्रतिशत को बूस्टर डोज लगाई गई है।
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इनसेट
जिन्होंने एक भी खुराक नहीं लगवाई, विलंब न करें
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिन्होंने किसी भी टीके की एक भी खुराक नहीं लगवाई है वे कोवैक्सीन लगवा सकते हैं। ऐसे में उन्हें और विलंब नहीं करना चाहिए अन्यथा बची हुई खुराक खत्म हो गई और संक्रमण बढ़ गया तो फिर वे खतरे में होंगे। क्योंकि एक बार स्टॉक खत्म होने के बाद अगली खेप कब तक मिलेगी उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
कोट-
शिक्षा विभाग के साथ मिलकर एक बार फिर स्कूलों में विशेष शिविर लगाकर बच्चों का टीकाकरण करने की योजना बनाई जा रही है। परीक्षा के कारण टीका लगवाने से डरने की जरूरत नहीं है। यह संक्रमण से बचाएगा, जिससे आप बेफिक्र होकर परीक्षा देंगे।
-डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी
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गौरतलब है कि इससे पूर्व विभाग को कोविशील्ड की दो हजार खुराक के उपयोग के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 28 दिसंबर 2022 को मिली दो हजार खुराक की एक्सपायरी 10 फरवरी 2023 थी। ऐसे में विभाग को लगातार अलग-अलग जगहों पर शिविर लगाकर उसका उपयोग सुनिश्चित करना पड़ा। अभियान के तहत अंतिम दिन 10 फरवरी को भी कोविशील्ड की खुराक लगाकर शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने में सफलता प्राप्त की गई।
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20 हजार से ज्यादा बच्चे दूसरी खुराक से हैं वंचित
टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत 15-17 साल के जिन लाभार्थियों को कोवैक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है उनमें से 20 हजार से ज्यादा बच्चे दूसरी खुराक से अब तक वंचित हैं। इसका मुख्य कारण कोरोना संक्रमण दर का नीचे आना है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण के दौरान लोग डरे होते हैं और खुद के साथ ही अपने पूरे परिवार को सुरक्षित करने का जतन करते हैं। लेकिन काफी ज्यादा समय से संक्रमण दर कम होने के कारण यह डर खतम हो गया है। इस कारण बच्चों को दूसरी खुराक लगवाने में लापरवाही कर रहे हैं। जबकि यह ठीक नहीं है। अभियान के तहत अब तक 104.37 प्रतिशत बच्चों को टीके की पहली और 75.44 प्रतिशत को दूसरी और महज 2.43 प्रतिशत को बूस्टर डोज लगाई गई है।
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जिन्होंने एक भी खुराक नहीं लगवाई, विलंब न करें
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिन्होंने किसी भी टीके की एक भी खुराक नहीं लगवाई है वे कोवैक्सीन लगवा सकते हैं। ऐसे में उन्हें और विलंब नहीं करना चाहिए अन्यथा बची हुई खुराक खत्म हो गई और संक्रमण बढ़ गया तो फिर वे खतरे में होंगे। क्योंकि एक बार स्टॉक खत्म होने के बाद अगली खेप कब तक मिलेगी उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
कोट-
शिक्षा विभाग के साथ मिलकर एक बार फिर स्कूलों में विशेष शिविर लगाकर बच्चों का टीकाकरण करने की योजना बनाई जा रही है। परीक्षा के कारण टीका लगवाने से डरने की जरूरत नहीं है। यह संक्रमण से बचाएगा, जिससे आप बेफिक्र होकर परीक्षा देंगे।
-डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी