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बच्चों को आतंकवाद से बचाना है तो 18 वर्ष तक अनिवार्य शिक्षा देनी होगी, बोले कैलाश सत्यार्थी
Thu, 12 Sep 2019 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नवनीत छिब्बर, मोहाली
नवनीत छिब्बर, मोहाली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 12 Sep 2019 02:15 AM IST
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kailash satyarthi
- फोटो : अमर उजाला
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बच्चों को अपराध और आतंकवाद के दलदल से बचाना है तो शिक्षा के अधिकार को 14 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष किया जाना चाहिए। क्योंकि यही वो उम्र है जब बच्चों के बहकने का सबसे ज्यादा अंदेशा होता है। यह बात 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कही। वह बुधवार को मोहाली के नाबी में पहुंचे थे।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता ने बाल संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए समाज के चार वर्गों सरकार, कारपोरेट सेक्टर, सिविल सोसाइटी व धर्मगुरु को मिलकर काम करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि बचपन बचाओ आंदोलन के जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वह इन चारों वर्गों को साथ लाने की पहल कर चुके हैं। चारों वर्गों को साथ लाने के लिए सरकार पहल कर सकती है, अन्य लोग भी आगे आ सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि अलगाववादी ताकतें टीन एजर्स को अपना टारगेट करती हैं। शिक्षा रोजगारपरक होनी चाहिए ताकि युवा होने पर उसका भविष्य सुरक्षित हो सके। केंद्र व राज्य सरकारों को अपनी प्लानिंग का फोकस इसी पर रखना चाहिए। वह जोर देते हुए कहते हैं कि आज की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की है।
कैलाश सत्यार्थी बच्चों की सुरक्षा के लिए नैतिकता को भी महत्व देते हैं। उनका कहना है कि जब भारत सोने की चिडिया थी, तब विश्वगुरु भी था। इसका अर्थ था कि जिस सभ्य समाज का संदेश हम दुनिया को देते थे, उसे देश के अधिकांश लोग जीते थे। वहीं आज भारत दुनिया के हैपीनेस इंडेक्स में काफी नीचे है।