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माता-पिता जरूर ध्यान दीजिए... धीरे-धीरे मोबाइल एडिक्शन की चपेट में आ रहे बच्चे

Sun, 31 May 2020 04:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 31 May 2020 04:02 PM IST
सार

  • 13 से 19 साल तक के बच्चे मोबाइल को दे रहे हैं अधिक समय
  • शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ रहा प्रभाव
  • सुबह से लेकर शाम तक की सभी क्रियाएं हो रही हैं प्रभावित

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Children are slowly getting hit by mobile addiction
मोबाइल फोन - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

लॉकडाउन में स्कूल बंद हुए तो प्रबंधकों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दीं। स्कूल प्रबंधन ने सोचा इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। अब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बच्चे मोबाइल एडिक्शन की चपेट में आ रहे हैं। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक की सभी क्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। बच्चे सुबह समय से न उठ पा रहे हैं और न शाम को सो पा रहे हैं। लगता है जैसे बस मोबाइल ही उनकी दुनिया हो गई है। 

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पंजाब यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक विभाग के प्रोफेसर रोशन लाल का कहना है कि लॉकडाउन के कारण 13 से 19 साल तक के बच्चे मोबाइल को अधिक समय दे रहे हैं। इसके कारण मोबाइल एडिक्शन उन पर धीरे-धीरे हावी होता जा रहा है। 
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क्या है मोबाइल एडिक्शन...
प्रो. रोशन लाल के मुताबिक मोबाइल एडिक्शन का मतलब है शारीरिक और मानसिक विकास का प्रभावित होना। मोबाइल एडिक्शन से बच्चे सुबह से लेकर शाम तक क्रियाएं नहीं कर पाते हैं। उनके व्यवहार में सबसे पहले अंतर आना शुरू हो जाता है। उसके बाद चिड़चिड़ापन, नींद कम होना, बेचैनी, खाने का समय बदल जाना और पाचन शक्ति कमजोर हो जाना आदि नुकसान होने लगते हैं। 


क्या कदम उठाएं पैरेंट्स 
परिजन इसके लिए अपने बच्चों को प्रोत्साहित करें। उन्हें समझाएं और मोबाइल चलाने का शेड्यूल बनाकर उन्हें दें। उन पर शारीरिक दंड न डालें। प्रोत्साहन के जरिए ही इस आदत को बच्चे छोड़ पाएंगे। 

ध्यान रहे... यह नौबत न आए 
एक अनुमान के अनुसार मुंबई के बच्चों में यह समस्या लगातार बढ़ी तो वहां इसके लिए बाकायदा मोबाइल एडिक्शन क्लीनिक खोले गए हैं। यह लॉकडाउन हम सभी के लिए एक चुनौती है। ऐसे में बच्चों के मानसिक विकास को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

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