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अब MRI कराते हुए नहीं डरेंगे बच्चे, PGI ने की दिलचस्प कवायद

Fri, 05 Aug 2016 07:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Aug 2016 07:53 PM IST
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child special mri lab inaugrated in chandigarh pgi by minister jp nadda
चंडीगढ़ पीजीआई में बच्चों के ​लिए विशेष लैब - फोटो : फाइल फोटो
एमआरआई कराते हुए अब बच्चे डरेंगे नहीं। इसके लिए चंडीगढ़ पीजीआई प्रशासन ने बेहद दिलचस्प कवायद की है। पीजीआई ने बच्चों के लिए स्पेशल एमआरआई यूनिट खोली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा शनिवार को इसका उद्घाटन करेंगे। एडवांस कार्डियक सेंटर के पीछे बनी इस यूनिट में बच्चों को कार्टून फिल्म के माध्यम से पहले एमआरआई के बारे में समझाया जाएगा, ताकि उनका डर खत्म हो सके। उसके बाद उनका एमआरआई होगा।
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इसलिए पड़ी जरूरत
अक्सर बच्चे एमआरआई से पहले डर जाते हैं। फिर उनका एमआरआई करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर बच्चों को बेहोश कर उन्हें एमआरआई की मशीन में भेज देते हैं। कई बार तो बच्चों को तीन बार बेहोश करने वाली दवा दी जाती है। इतनी दवा देने के बाद उनकी रिकवरी मुश्किल होती है। बार-बार दवा से नुकसान का डर भी रहता है।
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पीजीआई ने अपनी एक स्थिति में पाया है कि कार्टून फिल्म दिखाने पर 50 प्रतिशत बच्चों को बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ी है। पीजीआई ने दावा किया है कि फिलहाल ऐसी सुविधा देश के किसी भी अस्पताल में नहीं है। इसमें करीब 13 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
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मोतियाबिंद की रोबोटिक सर्जरी
पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में फीम्टोसेकेंड कैटरेक्ट सुविधा की शुरुआत की गई है। इससे सर्जरी की सुरक्षा और सूक्ष्मता बढ़ जाती है। इसे आमतौर पर आल लेजर कैटरेक्ट (मोतियाबिंद) सर्जरी, ब्लेड लेस कैटरेक्ट सर्जरी व रोबटिक कैटरेक्ट प्रक्रिया भी कहते हैं। हाथ से सर्जरी के दौरान जिस एक स्तर पर जब परेशानी आती है तो उसमें फीम्टोसेकेंड का काम काफी कमाल का होता है। इसमें लेजर का काम कम होता है और रोशनी जल्द वापस आती है। इसमें काफी एडवांस फीचर हैं। जब लैंस फिट किया जाता है तो यह भी बताता है कि लैंस पूरी तरह से फिट बैठा है कि नहीं। इसमें करीब सात करोड़ रुपये का खर्च आया है।

स्लीप लैब
जेपी नड्डा नेहरू हास्पिटल में स्लीप लैब का भी उद्घाटन करेंगे। इसमें आब्स्ट्रैक्टिव स्लीप एपेनिया बीमारी को डाइग्नोज किया जाएगा। इसमें नींद के वक्त खर्राटा, सांस उखड़ना व साइलेंट हार्ट अटैक जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इसे ईएनटी डिपार्टमेंट ने नेहरू हास्पिटल में इंस्टाल किया है। इसमें पेशेंट को पूरी रात सुलाया जाएगा और उसके सोने के तरीकों का आकलन कर बीमारी का पता लगाया जाएगा। यह बीमारी होने पर लोगों में हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, पल्मनरी हाइपरटेंशन बढ़ता है।

इसरो-पीजीआई लिंक टेलीमेडिसिन सेंटर
दूर-दराज एरिया में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और इसरो के बीच एक समझौता हुआ है। समझौते के तहत पीजीआई टेलीमेडिसिन के तहत दूर-दराज इलाकों में अपने डाक्टरों के माध्यम से इलाज करेगा। यहां के डाक्टर वीडियोकांफ्रेंसेज के माध्यम से दूर-दराज के इलाकों में बैठे डाक्टरों को इलाज के लिए प्रतिशिक्षित करेंगे।


वहां के डाक्टरों अपने मरीजों का ब्योरा कांफ्रेंसेज के माध्यम से बताएंगे। हालांकि पीजीआई पहले से कई इलाकों में टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध करवा रहा है। शनिवार को तीन और सेंटरों में सुविधा शुरू होगी। इसमें हिमाचल का किन्नौर, केरल स्थित सबरीमाला का पंपा हॉस्पिटल, जम्मू कश्मीर स्थित अमरनाथ का शेषनाग सेंटर में यह सुविधा शुरू होगी।
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