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Hindi News ›   Chandigarh ›   Child Marriages Record in Chandigarh, National Girl Child Day

राष्ट्रीय बालिका दिवस: तीन साल में चंडीगढ़ में आठ बेटियों का बाल विवाह, ये है सजा का प्रावधान

Thu, 23 Jan 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 23 Jan 2020 10:43 AM IST
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Child Marriages Record in Chandigarh, National Girl Child Day
सांकेतिक तस्वीर
‘‘बाबल तेरा देस में, एक बेटी एक बैल। हाथ पकड़के दीनाजामे, परदेसी के गैल’’ मेवात (हरियाणा) के जनकवि सादुल्लाह ने यह लाइनें बाल विवाह को चोट दिए जाने को लेकर कही थीं। पिछले तीन साल में सादुल्लाह की ये लाइनें चंडीगढ़ में भी प्रासंगिक हैं। 2017 से 2019 तक आठ लड़कियों के बाल विवाह किए जा चुके हैं। बाल विवाह की यह कुप्रथा भले ही देश में 1929 से बंद करने का दम भरा जा रहा हो, लेकिन चंडीगढ़ जैसे स्मार्ट सिटी में आज भी यह कुप्रथा जारी है।
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इसे रोकने के लिए किए जाने वाले सर्वे में शिक्षा के गिरते स्तर को कारण बताया गया था, लेकिन चंडीगढ़ में शिक्षा का स्तर 2011 की जनगणना के अनुसार 86.43 प्रतिशत पहुंच चुका है। पढ़े-लिखे लोग होने के बाद भी यहां पर तीन साल से लगातार लड़कियों के बाल विवाह किए जा रहे हैं। 2017 में चार, 2018 में तीन और 2019 में एक लड़की का बाल विवाह हुआ।
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एनएचएफएस-4 में 12.7 प्रतिशत लड़कियों के बाल विवाह का खुलासा
नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे रिपोर्ट (एनएचएफएस)-4 की जारी हुई रिपोर्ट में भी पढ़े-लिखे इस शहर में लड़कियों के साथ बाल विवाह होने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में 12.7 प्रतिशत लड़कियों का बाल विवाह हुआ है।
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बाल विवाह से होने वाले नुकसान

- कम उम्र में विवाह के कारण बेटियों को हिंसा, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का अधिक सामना करना पड़ता है।
- लड़कियों और लड़कों के शारीरिक, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक विकास पर असर।
- सबसे बड़ा नुकसान बेटियों और बेटों के शिक्षा के अवसर का कम होना।

अब तक क्या-क्या हुआ
बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए 1929 में सबसे पहले कानून बनाया गया। इसके बाद 1949, 1978 में कई और संशोधन किए गए। इसके बाद भी देश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर अंकुश नहीं लग पाया और 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ और संशोधन किए गए।

अब यह है सजा का प्रावधान
2006 में हुए संशोधनों को नवंबर 2007 को लागू किया गया। इसके तहत अब बाल विवाह कराने वाले व्यक्ति को दो साल तक कठोर कारावास तथा एक लाख रुपये जुर्माना देना होगा।

चंडीगढ़ में ‘लाडो’ अभियान की जरूरत

मध्य प्रदेश की तरह अब चंडीगढ़ को लाडो अभियान की जरूरत है। मध्य प्रदेश में बाल विवाह कानून की असफलताओं को देखते हुए वर्ष 2013 में लीक से हटते हुए लाडो अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रमुख लोगों को जोड़ा गया था। प्रदेश में इस अभियान के शुरू होने के बाद बाल विवाह के प्रतिशत में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी।

केंद्र शासित प्रदेशों में बाल विवाह की स्थिति
नाम---------------शिक्षा स्तर(प्रतिशत)--------बाल विवाह(प्रतिशत)
लक्षद्वीप-----------------92.28-------------------0.7
पुडुचेरी------------------86.55-------------------9.7
अंडमान निकोबार---------86.27-----------------11.9
चंडीगढ़-----------------86.43-----------------12.7
दिल्ली-------------------86.34-----------------14.4
दादर नागर हवेली----------77.65-----------------27
दमनदीव-----------------87.07----------------31.7

नोट: आंकड़े नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे रिपोर्ट-4 पर आधारित हैं।
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