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पीजीआई चंडीगढ़ः पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा, बच्चे की मौत गलत इंजेक्शन से हुई या नहीं

Wed, 20 Nov 2019 11:48 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 20 Nov 2019 11:48 AM IST
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child death in pgi chandigarh case enquiry
pgi chandigarh
12 वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पीजीआई ने जांच शुरू कर दी है। पीजीआई ने उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल जाएगा कि उसकी मौत की वजह क्या थी? परिजन गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा रहे हैं।
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पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से साफ हो जाएगा कि बच्चे के शरीर में इंजेक्शन गया है या नहीं। हालांकि, नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि परिजन केमिस्ट से गलत इंजेक्शन लाए जरूर थे, लेकिन उसे लगाया नहीं गया है। बच्चे के पैरेंट्स की शिकायत पर पीजीआई में वरिष्ठ चिकित्सकों की अगुवाई में एक कमेटी गठित कर दी है।
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कमेटी में बाल रोग विशेषज्ञ व प्रमुख डॉ. सुरजीत सिंह, इंटरनल मेडिसिनर के डॉ. संजय जैन, नेफ्रोलाजी विभाग के डॉ. मनीष राठी व फोरेंसिक मेडिसिन व हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है। कमेटी अपनी रिपोर्ट इस हफ्ते दे देगी। दूसरी ओर, परिजनों ने मंगलवार को ट्रामा सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वे इंसाफ चाहते हैं। उनके बच्चे की मौत के जिम्मेदार को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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बच्चे के पिता बाबू राम ने बताया कि 11 नवंबर को उसके बेटे सोनू की तबियत खराब हो गई थी। उसे सेक्टर छह हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया है। पीजीआई में दाखिल उसका बेटा ठीक होने लगा था, लेकिन रविवार शाम दिए एक इंजेक्शन से उसकी तबियत खराब होने लगी और उसने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ने उन्हें वैंकोमाइसिन इंजेक्शन लिखकर दिया था। परिजन अमृत फार्मेसी पहुंचे तो वहां उन्हें रोक्रोनियम इंजेक्शन दे दिया गया। नर्स ने बिना देखे उसे लगा दिया और बच्चे की मौत हो गई। पीजीआई से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वेंकोमाइसिन बैक्टीरियल इंफेक्शन पर दिया जाता है, जबकि रोक्रोनियम मांसपेशियों को ढीला करने के लिए।

दोनों की शीशी में काफी अंतर है। वेंकोमाइनसिन की शीशी चौड़ी और गोल है, जबकि रोक्रोनियम पतली शीशी में आता है। हाथ में आते ही पहचान लिया जाता है कि कौन सा इंजेक्शन है। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। फिर भी किसी ने आरोप लगाए हैं तो उसकी जांच होनी चाहिए। आखिर बच्चे की मौत का मामला है।

उधर, पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
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