हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद अपनी जिंदगी से जुड़े एक खौफनाक पल की पूरी दास्तान बताई। ये वाकया कितना खौफनाक रहा होगा इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दो दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें हर एक लम्हा याद है। ट्रेन में लटके मनोहर लाल को एक जांबाज ने कैसे बचाया ये उन्होंने खुद अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में साझा किया।
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल सन 1995 की उस रात को याद करके आज भी घबराते हैं, जब चलती ट्रेन में 15 मिनट तक खिड़की पर लटके रहे। लेकिन किसी ने बोगी का दरवाजा नहीं खोला। काफी देर बाद रतिया के कालूराम ने हिम्मत दिखाते हुए रात के अंधेरे में उन्हें पहचानकर ट्रेन के अंदर खींचा और उनकी जान बचाई।
वर्ष 1994 में उन्हें भाजपा का संगठन मंत्री बनाया गया था। उसके बाद वर्ष 1995 में मुंबई में भाजपा का राष्ट्र स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन था। उनके नेतृत्व में हरियाणा से 1700 वर्कर ट्रेन में मुंबई पहुंचे और ट्रेन से ही वापस आए। वापसी में उन्हें बताया गया कि एक बोगी में अंबाला से तत्कालीन एमएलए और कुछ महिला कार्यकर्ताओं का झगड़ा हो गया है।
ट्रेन रुकने पर बीच-बचाव करने वे उस बोगी में जा पहुंचे। मामला सुलझाने के बाद जब वे चार बोगी पीछे अपनी सीट पर जाने लगे तो ट्रेन चल पड़ी। अब तो न इधर के न उधर के। बस जो बोगी सामने आई मनोहर लाल उसी में लटक गए।
रात के करीब 11.30 बजे थे, सब सो रहे थे, ऐसे में चलती ट्रेन और बंद दरवाजा। ट्रेन चल रही थी और वे चलती ट्रेन में दरवाजे पर लटके थे। खिड़की को जोर-जोर से पीटकर यात्रियों से दरवाजा खोलने को कह रहे थे। किसी ने दरवाजा खोलने की हिम्मत नहीं की।
एक बार तो सोचा नदी में कूद जाऊं
सीएम ने बताया कि जब वे लटके हुए थे तो बीच में एक नदी भी आई थी, एक बार तो मन में आया कि वे नदी में कूद जाएं, लेकिन सोचते-सोचते ही नदी भी निकल गई। लगा बस अब तो भगवान ही बचाए। बस उसी समय बोगी में मौजूद कालूराम की नींद खुली।
सीएम ने खिड़की से आवाज लगाई कालूराम मैं मनोहर लाल दरवाजा खोलो, बस फिर कालूराम ने चलती ट्रेन का दरवाजा खोलकर उन्हें अंदर खींच लिया। ट्रेन के भीतर पहुंचने के बाद उनकी जान में जान आई। फिर तो कोई हाथ मसलने लगा और कोई पांव, बस भगवान ने बचा लिया और आज आपके सामने हूं।