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जाट आरक्षण आंदोलन और हिंसा मामले में बड़ी कार्रवाई, दो DSP चार्जशीट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 19 Jan 2017 03:08 PM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मामले में दो डीएसपी पर गाज गिरी है। प्रदेश की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों डीएसपी को चार्जशीट किया है। अब इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था।
सबसे अधिक तबाही उपद्रवियों ने रोहतक में मचाई थी। चार्जशीट किए गए डीएसपी में से एचपीएस अमित दहिया उस समय रोहतक में ही ड्यूटी पर तैनात थे। वहीं, चार्जशीट डीएसपी राजबीर सिंह भिवानी के लोहारू में सेवारत थे। प्रकाश सिंह कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान संदेहास्पद पाया है।
इसके आधार पर ही सरकार ने दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई है। माना जा रहा है कि सरकार जाट आंदोलन के दौरान हीलाहवाली करने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठा सकती है। आने वाले दिनों में और अफसरों पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं। जाटों ने दोबारा से 29 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी दी हुई है, इसलिए सरकार कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है।
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आंदोलन के दौरान आगजनी, लूटपाट और हिंसा में संदेहास्पद भूमिका के आरोप में पहले से एचसीएस, एचपीएस और चार-चार आईएएस-आईपीएस अधिकारी निलंबित चल रहे हैं। सरकार इनके जवाब से संतुष्ट है, जिसके आधार पर इन्हें बहाल किया जा सकता है।
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सबसे अधिक तबाही उपद्रवियों ने रोहतक में मचाई थी। चार्जशीट किए गए डीएसपी में से एचपीएस अमित दहिया उस समय रोहतक में ही ड्यूटी पर तैनात थे। वहीं, चार्जशीट डीएसपी राजबीर सिंह भिवानी के लोहारू में सेवारत थे। प्रकाश सिंह कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान संदेहास्पद पाया है।
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इसके आधार पर ही सरकार ने दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई है। माना जा रहा है कि सरकार जाट आंदोलन के दौरान हीलाहवाली करने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठा सकती है। आने वाले दिनों में और अफसरों पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं। जाटों ने दोबारा से 29 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी दी हुई है, इसलिए सरकार कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है।
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आंदोलन के दौरान आगजनी, लूटपाट और हिंसा में संदेहास्पद भूमिका के आरोप में पहले से एचसीएस, एचपीएस और चार-चार आईएएस-आईपीएस अधिकारी निलंबित चल रहे हैं। सरकार इनके जवाब से संतुष्ट है, जिसके आधार पर इन्हें बहाल किया जा सकता है।