चंडीगढ़: नहीं देखी ऐसी स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, बसों की लाइव ट्रैकिंग, चालक-परिचालक और सवारी...सब पर कमांड कंट्रोल सेंटर की नजर
सार्वजनिक परिवहन का नया सवेरा चंडीगढ़ में देखने को मिल रहा है। यहां की स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दूसरों के लिए उदाहरण बन गई है। सभी सरकारी बसों की लाइव ट्रैकिंग की जा रही है। चालक-परिचालक और सवारी सब पर कमांड कंट्रोल सेंटर की नजर है। कोई गलती करे, तुरंत चेतावनी दी जाती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऐप की मदद से ओला-ऊबर की तरह अब बसों को ट्रैक कर सकते हैं। टिकट खरीदने की व्यवस्था भी बदल गई है। मेट्रो के जैसे स्मार्ट कार्ड शुरू कर दिए गए हैं। मोबाइल से रिचार्ज कराइए और किसी भी बस में घूमें। अब पुराने दिन बीत चुके हैं, जब बस चालक अपनी मर्जी से बस चलाता था। जहां मन किया बस रोक दी, रूट बदल लिया। स्पीड की कोई चिंता नहीं होती थी। अब अगर कोई चालक-परिचालक या सवारी भी कोई गलती करेगी, तो तुरंत इसकी जानकारी आईएसबीटी-43 में बने कमांड कंट्रोल सेंटर में पहुंच जाएगी और फिर ड्राइवर को चेतावनी जारी कर दी जाएगी।
ये भी पढ़ें-अलर्ट : हरियाणा के सीएम मनोहर लाल को राष्ट्र विरोधी ताकतों से खतरा, अफसरों की उड़ी नींद
दूसरों के लिए उदाहरण बना चंडीगढ़
जीपीएस से सभी बसों की लाइव ट्रैकिंग हो रही है। कितने लोग बस में बैठे हैं, किराया दिया है या नहीं, कहां चढ़ा और कहां उतरा...सभी चीजों पर नजर रखी जा रही है। चालक-परिचालक या सवारी ने मास्क पहना है या नहीं, इसकी रोजाना रिपोर्ट बन रही है। सीटीयू की सभी बसों में पांच-पांच कैमरे लगाए गए हैं। किसी भी स्मार्ट शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कैसी होनी चाहिए, चंडीगढ़ इसका एक उदाहरण बन गया है।
देखिए...ऐसे रखी जा रही है नजर
- एक-बसों के अंदर नजर रखी जा रही थी। सिटी बस सर्विस के जीएम यशजीत गुप्ता ने देखा कि एक बस में परिचालक ने मास्क नहीं पहना था।
- दो-वीडियो पर क्लिक किया गया तो पता चला कि बस का नंबर सीएच-01जीए5005 था।
- तीन-बस नंबर पर क्लिक करते ही चालक और परिचालक का मोबाइल नंबर आ गया। तुरंत कमांड सेंटर से फोन मिलाया गया और परिचालक को चेतावनी जारी की गई।
ये भी पढ़ें-बहादुरगढ़ हादसा: धार्मिक यात्रा से लौट रहे फिरोजाबाद के परिवार के लिए काल बने ट्रक, आठ लोगों की ले ली जान, दो बेटियां ही बच सकीं
रूट पर कितनी बसें, कितने चालक-परिचालक
एक स्क्रीन पर ये पता चलता है कि कितनी बसें रूट पर चल रही हैं। कितनी डिपो में खड़ी हैं। कौन देरी से चल रही है। चालक-परिचालक कितने हैं। छुट्टी पर कौन है और कितनों को रिजर्व में रखा गया है।
किस एरिया में ज्यादा मिल रहीं सवारी
एक स्क्रीन पर दिखाई देता है कि सुबह 6 बजे बस सर्विस के शुरू होने के बाद रात 10 बजे तक कुल कितने लोगों ने सफर किया। लाइव कितने लोग सफर कर रहे हैं। किस एरिया में सवारी ज्यादा हैं। किराया कितना एकत्रित हुआ। कार्ड से कितनी पेमेंट हुई।
ये भी पढ़ें-रिठाल हत्याकांड: रोहतक में हत्या की दोषी दो महिलाओं समेत चार लोगों को उम्रकैद, साढ़े 4 लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा
इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- 358 बसों को बनाया गया स्मार्ट।
- नवंबर 2019 में काम शुरू, अप्रैल 2021 में पूरा और अगस्त में उद्घाटन।
- आईएसबीटी-43 में कमांड कंट्रोल सेंटर।
- परियोजना की लागत 23.41 करोड़।
- इनमें से 15.32 करोड़ वर्ल्ड बैंक ने दिए।
- पांच साल तक इसे चलाने के लिए 14 करोड़ खर्च होंगे।
ये भी पढ़ें-चंडीगढ़: 20 माह में 19 पेशी, अवैध पीजी में अग्निकांड की भेंट चढ़ी हिसार की मुस्कान को आज भी इंसाफ का इंतजार
trycityBus मोबाइल एप के फायदे
- आप जहां खड़े हैं, वहां से सबसे पास बस स्टॉप कहां है।
- दो बस स्टॉप के बीच चलने वाली बस की जानकारी।
- रूट के अनुसार बस की ट्रैकिंग।
- लाइव ट्रैकिंग, अभी बस कहां हैं और आप तक अब पहुंचेगी।
- स्मार्ट कार्ड के लिए आवेदन, रिचार्ज, रिप्लेस, हिस्ट्री देखने और ब्लॉक करने का विकल्प।
- शिकायत, किराया और बस स्टॉप की सूची।
- समस्या में इमरजेंसी अलर्ट की व्यवस्था।
- पसंदीदा रूट को मार्क कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें-महेंद्रगढ़: परिजन जिसे दो दिन से ढूंढ रहे थे, वह युवती अनाज मंडी के कुएं में गिरी मिली, बीएससी तक कर चुकी है पढ़ाई
सीटीयू से संबंधित शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 18002747400
इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम से शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से बदल गई है। मोबाइल एप से बसों को लाइव ट्रैक किया जा सकता है। इससे समय भी बचेगा। एक बस में पांच सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इससे हर कोई पूरी तरह से सुरक्षित है। लोगों को अब सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना शुरू कर देना चाहिए।
-प्रद्युमन सिंह, निदेशक, परिवहन विभाग