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लड़- झगड़कर केंद्र से फंड लाकर चंडीगढ़ को संवारा, भाजपा ने हाशिए पर रखा : पवन कुमार बंसल

Wed, 14 Jan 2026 02:46 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 02:46 AM IST
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Chandigarh was developed by fighting and getting funds from the Centre, but the BJP marginalized it: Pawan Kumar Bansal
चंडीगढ़। चंडीगढ़ की मौजूदा स्थिति दयनीय हो चुकी है। कांग्रेस के कार्यकाल में बतौर सांसद रहते चंडीगढ़ को संवारने के लिए बहुत कुछ किया लेकिन भाजपा ने बीते कुछ वर्षों में इसे हाशिए पर लाकर रख दिया। यह बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल ने अमर उजाला चंडीगढ़ से विशेष बातचीत में कही। बंसल ने कहा कि जब वह सांसद थे और केंद्र में उनकी सरकार थी, तब वह अपने वरिष्ठ नेताओं से लड़- झगड़कर केंद्र से चंडीगढ़ के लिए फंड लेकर आते थे। पीजीआई, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ रेलवे से लेकर कई अहम प्रोजेक्टों की शुरुआत उनके कार्यकाल में हुई। केंद्र से हर बार वह फंड लाने में इसलिए कामयाब रहते थे क्योंकि वह चंडीगढ़ के मुद्दों और जरूरतों को प्रमुखता से केंद्र के समक्ष रखते थे। भाजपा से पूर्व सांसद किरण खेर अपने कार्यकाल में केंद्र से हर बार अतिरिक्त फंड लाने में नाकाम रहीं, यही कारण है कि शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं।
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सवाल-शहर में मेट्रो की जरूरत है या नहीं, इस बारे में आप क्या सोचते हैं ?
जवाब-मैं चार बार शहर का सांसद रहा और केंद्रीय मंत्री तक का कार्यभार संभाला। मैंने हमेशा मेट्रो की जरूरत पर जोर दिया। चंडीगढ़ में मेट्रो जरूर आनी चाहिए। अब मेट्रो की जरूरत केवल ट्राइसिटी तक ही नहीं बनूड़, डेराबस्सी, राजपुरा, अंबाला से लेकर 40 से 50 किलोमीटर के दायरे तक इसका नेटवर्क होना चाहिए। मेट्रो शहर के लिए बेहद जरूरी है। मैंने अपने कार्यकाल में इसकी फाइल केंद्र से क्लीयर करवा ली थी लेकिन पूर्व सांसद किरण खेर इस प्रोजेक्ट को नहीं चाहती थी।
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सवाल-मालिकाना हक, शेयर वाइज रजिस्टरी जैसे कई अहम मांगें लंबित पड़ी है, इस पर केंद्र को क्या रुख अपनाना चाहिए?
जवाब-मालिकाना हक, शेयर वाइस रजिस्टरी, लाल डोरा, नीड बेस्ड चेंज, लीज टू फ्री होल्ड जैसे कई अहम मुद्दे समय की मांग है। चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है, ऐसे में यहां कोई भी बदलाव प्रशासनिक स्तर पर नहीं हो सकता। केंद्र में भाजपा की सरकार है। ऐसे में इन मुद्दों को हल करवाने के लिए संसद में भी प्रस्ताव मंजूर होने जरूरी है। मैं समझता हूं कि जब शहर के सभी गांव नगर निगम के अधीन आ गए हैं तो लाल डोरा का मुद्दा प्रशासन को खत्म कर देना चाहिए। शेयर वाइस रजिस्ट्री को लेकर प्रशासन को नई पॉलिसी बनानी चाहिए ताकि शहर का स्वरूप भी न बिगड़े और लोगों को राहत भी मिल सके। मालिकाना हक के पुराने मामलों में दस्तावेजों की जांच कर प्रशासन को लोगों को राहत देनी चाहिए।
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सवाल-चंडीगढ़ पर पंजाब-हरियाणा की दावेदारी और मेयर कार्यकाल बढ़ाना चाहिए या नहीं ?
जवाब-चंडीगढ़ पर पंजाब और हरियाणा का पूरा अधिकार है। यूटी में दोनों राज्यों का 60-40 का जो अनुपात है, उसकी पालना होनी चाहिए। चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल बढ़ाना चाहिए। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का सीधा चुनाव होना चाहिए। यहां तक की वार्डों की संख्या 35 से बढ़ाकर 45 से 50 की जानी चाहिए। शहर की आबादी बढ़ चुकी है। हर सेक्टर का अलग पार्षद होना चाहिए।

सवाल-लोग कहते हैं आप अब राजनीति में उतने सक्रिय नहीं और पार्टी के मंच पर भी दिखाई नहीं देते। सांसद मनीष तिवारी के अभी तक के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?

जवाब-मैं आज भी लोगाें के बीच जाता हूं, उनसे मिलता हूं। चंडीगढ़ का स्ट्रक्चर ऐसा है कि बतौर सिटिंग एमपी होने के नाते राजनीतिक गतिविधियां एक एमपी के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। बतौर एमपी और पार्टी के ढांचे में बदलाव भी जरूरी होता है बाकी पार्टी आज भी उन्हें जो जिम्मेदारी देती है वह उसे निभाते हैं। कांग्रेस से सांसद मनीष तिवारी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। एक सांसद के लिए संसद में उपस्थिति बेहद जरूरी होती है, वह चंडीगढ़ के मुद्दों को संसद में लगातार उठा रहे हैं। केंद्र में विपक्ष की सरकार होने से कुछ दिक्कतें जरूर आती हैं।
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