{"_id":"63c25986e1ec2e5bdc16bcc5","slug":"chandigarh-transport-department-proposed-to-increase-bus-routes-with-many-states-2023-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: कई रुटों पर बसें बढ़ाएगा चंडीगढ़, हिमाचल के साथ 30 तो पंजाब के साथ 15 साल बाद होगा नया समझौता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: कई रुटों पर बसें बढ़ाएगा चंडीगढ़, हिमाचल के साथ 30 तो पंजाब के साथ 15 साल बाद होगा नया समझौता
Sat, 14 Jan 2023 05:18 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 14 Jan 2023 05:18 PM IST
सार
आईएसबीटी-17 से अभी आपसी समझौते के आधार पर बसें चलाईं जा रहीं हैं। विभाग का अन्य रोडवेज की बसों पर कोई कंट्रोल नहीं है। वो मनमर्जी से बसें चला रहे हैं। आईएसबीटी-17 से विभिन्न राज्यों की उन जिलों के लिए भी बसें चल रही हैं, जिनकी मंजूरी नहीं दी गई है।
विज्ञापन
सीटीयू बस
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन का परिवहन विभाग वर्षों बाद पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली समेत कई राज्यों के साथ दोबारा पारस्परिक समझौता करने जा रहा है। चंडीगढ़ ने सभी राज्यों में मौजूदा किमी को 25 से 30 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है ताकि रूट बढ़ाए जा सकें।
वर्तमान में इन राज्यों के साथ जिस समझौते के आधार पर बसें चलाई जा ही हैं, वह बहुत पुराना है। पंजाब के साथ वर्ष 2008 में और हिमाचल के साथ वर्ष 1992 में आखिरी पारस्परिक समझौता हुआ था। बाकी राज्यों के साथ भी 10-15 साल पहले ही समझौता हुआ था लेकिन इतने वर्षों में स्थिति काफी बदल गई है। जनसंख्या बढ़ गई है और गाड़ियों की संख्या भी काफी ज्यादा बढ़ चुकी है।
चंडीगढ़ ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में अपना किमी 25 से 30 किलोमीटर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें राजस्थान, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड से जवाब आ गया है और वो नए समझौते के लिए तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर और यूपी से अभी जवाब नहीं आया है। दिल्ली भी राजी है। बता दें कि राज्यों के बीच बसें चलाने के लिए कुल किलोमीटर का समझौता होता है और फिर उसके अनुसार रूट तय होते हैं।
विज्ञापन
नए समझौते के बाद पता होगा कितनी बसें आ रही चंडीगढ़
वर्तमान में चंडीगढ़ को पता नहीं है कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल समेत अन्य राज्यों से कुल कितनी बसें पहुंच रहीं हैं। इससे शहर को टैक्स का भी नुकसान हो रहा है। बीते दिनों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, यूपी समेत अन्य राज्यों के परिवहन सचिवों की संयुक्त बैठक हुई थी, जिसमें इस समस्या पर चर्चा हुई और नए पारस्परिक समझौते का फैसला हुआ। अब आने वाले दिनों में एक और बैठक होगी जिसमें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को तय किया जाएगा। नए समझौते के लागू होने के बाद से चंडीगढ़ को पता होगा कि विभिन्न राज्यों से कितनी बसें चंडीगढ़ पहुंच रहीं हैं। परिवहन सचिव ने कहा कि नए समझौते का मकसद है कि शहर में सभी राज्य रेगुलेटेड बसें चलाएं। इसमें सभी के लिए सहूलियत होगी।
समझौता नहीं होने की वजह से आ रहीं समस्याएं
आईएसबीटी-17 से अभी आपसी समझौते के आधार पर बसें चलाईं जा रहीं हैं। विभाग का अन्य रोडवेज की बसों पर कोई कंट्रोल नहीं है। वो मनमर्जी से बसें चला रहे हैं। आईएसबीटी-17 से विभिन्न राज्यों की उन जिलों के लिए भी बसें चल रही हैं, जिनकी मंजूरी नहीं दी गई है। इससे चंडीगढ़ को टैक्स का भी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा अगस्त 2022 में चंडीगढ़ की बस को राजस्थान के चुरू में रोक लिया गया था, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इसके बाद चंडीगढ़ ने भी राजस्थान रोडवेज की सात बसों को जब्त कर लिया। अन्य राज्यों के साथ भी सीटीयू का विवाद हुआ था। नया समझौता होने के बाद इन विवादों से मुक्ति मिलेगी।
सभी राज्यों के साथ हुआ पारस्परिक समझौता बहुत पुराना है। अब बहुत कुछ बदल चुका है। पर्यटन बढ़ गया है। हिमाचल, पर्यटन-धार्मिक स्थल जाने वाले लोगों की संख्या में बेहद इजाफा हुआ है। किमी बढ़ाने की जरूरत है ताकि जनसंख्या के साथ गाड़ियों की संख्या को मैच किया जा सके। लोगों की सुविधाओं के लिए नया समझौता किया जा रहा है। - नितिन यादव, परिवहन सचिव, चंडीगढ़
विज्ञापन
वर्तमान में इन राज्यों के साथ जिस समझौते के आधार पर बसें चलाई जा ही हैं, वह बहुत पुराना है। पंजाब के साथ वर्ष 2008 में और हिमाचल के साथ वर्ष 1992 में आखिरी पारस्परिक समझौता हुआ था। बाकी राज्यों के साथ भी 10-15 साल पहले ही समझौता हुआ था लेकिन इतने वर्षों में स्थिति काफी बदल गई है। जनसंख्या बढ़ गई है और गाड़ियों की संख्या भी काफी ज्यादा बढ़ चुकी है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में अपना किमी 25 से 30 किलोमीटर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें राजस्थान, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड से जवाब आ गया है और वो नए समझौते के लिए तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर और यूपी से अभी जवाब नहीं आया है। दिल्ली भी राजी है। बता दें कि राज्यों के बीच बसें चलाने के लिए कुल किलोमीटर का समझौता होता है और फिर उसके अनुसार रूट तय होते हैं।
विज्ञापन
नए समझौते के बाद पता होगा कितनी बसें आ रही चंडीगढ़
वर्तमान में चंडीगढ़ को पता नहीं है कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल समेत अन्य राज्यों से कुल कितनी बसें पहुंच रहीं हैं। इससे शहर को टैक्स का भी नुकसान हो रहा है। बीते दिनों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, यूपी समेत अन्य राज्यों के परिवहन सचिवों की संयुक्त बैठक हुई थी, जिसमें इस समस्या पर चर्चा हुई और नए पारस्परिक समझौते का फैसला हुआ। अब आने वाले दिनों में एक और बैठक होगी जिसमें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को तय किया जाएगा। नए समझौते के लागू होने के बाद से चंडीगढ़ को पता होगा कि विभिन्न राज्यों से कितनी बसें चंडीगढ़ पहुंच रहीं हैं। परिवहन सचिव ने कहा कि नए समझौते का मकसद है कि शहर में सभी राज्य रेगुलेटेड बसें चलाएं। इसमें सभी के लिए सहूलियत होगी।
समझौता नहीं होने की वजह से आ रहीं समस्याएं
आईएसबीटी-17 से अभी आपसी समझौते के आधार पर बसें चलाईं जा रहीं हैं। विभाग का अन्य रोडवेज की बसों पर कोई कंट्रोल नहीं है। वो मनमर्जी से बसें चला रहे हैं। आईएसबीटी-17 से विभिन्न राज्यों की उन जिलों के लिए भी बसें चल रही हैं, जिनकी मंजूरी नहीं दी गई है। इससे चंडीगढ़ को टैक्स का भी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा अगस्त 2022 में चंडीगढ़ की बस को राजस्थान के चुरू में रोक लिया गया था, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इसके बाद चंडीगढ़ ने भी राजस्थान रोडवेज की सात बसों को जब्त कर लिया। अन्य राज्यों के साथ भी सीटीयू का विवाद हुआ था। नया समझौता होने के बाद इन विवादों से मुक्ति मिलेगी।
सभी राज्यों के साथ हुआ पारस्परिक समझौता बहुत पुराना है। अब बहुत कुछ बदल चुका है। पर्यटन बढ़ गया है। हिमाचल, पर्यटन-धार्मिक स्थल जाने वाले लोगों की संख्या में बेहद इजाफा हुआ है। किमी बढ़ाने की जरूरत है ताकि जनसंख्या के साथ गाड़ियों की संख्या को मैच किया जा सके। लोगों की सुविधाओं के लिए नया समझौता किया जा रहा है। - नितिन यादव, परिवहन सचिव, चंडीगढ़