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द लास्ट सैल्यूट में दिखाया इराक का खौफनाक मंजर

Wed, 22 Jan 2020 02:21 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 02:21 AM IST
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टैगोर थियेटर में मंगलवार को अरविंद गौड़ के निर्देशन में नाटक ‘द लास्ट सैल्यूट’ का मंचन किया गया। इसका आगाज फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट ने अपने उस लेटर को पढ़ते हुए किया जो उन्होंने व्हाइट हाउस का डिनर का इनविटेशन वापस करते हुए लिखा था। यह नाटक 14 दिसंबर 2008 को हुई एक घटना पर आधारित था। इसमें दिखाया गया कि इराक मीडिया के पत्रकार मुंतजर अल जैदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूता फेंका था। ये कोई आतंकवादी हमला नहीं, बल्कि इराक के लोगों के अंदर धधकते ज्वालामुखी का नमूना था, जो पूरी दुनिया के सामने आया।
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इस नाटक में दिखाया गया कि जैदी कोई आतंकवादी नहीं, बल्कि उसका ये कदम बिल्कुल वैसा ही है जैसा की भगत सिंह का हमला करना। दोनों का मकसद ऊपर बैठे लोगों तक अपना पैगाम पहुंचाना था कि वो ऐसा न करें। यह किस्सा एक आम इंसान की ताकत को बहुत ही सही तरीके से सामने रखता है। यह नाटक बताता है कि खुद की जिंदगी अपनी मर्जी से जीना सपना नहीं, हकीकत है। किसी का गुलाम बनकर रहना किस्मत नहीं, बल्कि बुझदिली है। अगर सही वक्त पर सही तरीके से बुराई के खिलाफ आवाज उठाई जाए तो एक साथ बहुत बड़ा बदलाव संभव है।
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नाटक में बॉलीवुड के उभरते कलाकार इमरान जाहिद ने उस इराकी पत्रकार मुंतजर अल जैदी की भूमिका निभाई, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूता फेंक इराक में अमेरिकी सेनाओं के अत्याचार का विरोध जताया था। इस नाटक में दिखाया गया कि किस तरह से अमेरिकी व उसके मित्र देशों की सेना इराक में तानाशाह राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के शासन के खात्मे के लिए पहुंचती है। असल में वह तानाशाह का अंत नहीं, बल्कि अपनी तानाशाही वहां की जनता पर थोपती है। नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों ने भी इराकी जनता की संवेदना प्रकट की। अमेरिकी सेना के हमले में बेमौत मरने वालों के दृश्यों ने ऑडिटोरियम में बैठे लोगों को झकझोर कर रख दिया। यह नाटक वर्ष 2003 में इराक युद्ध पर इसी नाम से लिखी गई पुस्तक का रूपांतरण है। इसका निर्माण महेश भट्ट ने किया। इसकी पटकथा राजेश कुमार ने लिखी है।
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एक साथ 80 कलाकार मंच पर
नाटक को मंच पर जीवंत करने के लिए अरविंद गौड़ के निर्देशन में एक साथ 80 कलाकारों ने अपने किरदार से पूरी कहानी को जीवंत बना दिया। नाटक के बीच में चलने वाली वीडियोज ने सभी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। इमरान जाहिद, जो इस नाटक में नायक की भूमिका में थे, उन्होंने कहा कि 2011 में जब हमने पहली बार इस नाटक का मंचन किया तो खुद अल जैदी वहां मौजूद थे। हालांकि उन्हें हिंदी नहीं आती पर फिर भी नाटक देखने के बाद वे काफी भावुक हो गए थे।

महेश भट्ट बोले, नाटक में ऊर्जा पहले जैसी
इस मौक पर अरविंद गौड़ ने कहा कि वास्तव में नाटक एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से अपनी बात सहजता से कही जा सकती है। इस मौके पर महेश भट्ट ने कहा कि अब 12 वर्ष हो गए हैं लेकिन नाटक में ऊर्जा वैसी ही है। उन्होंने कहा कि सिनेमा और थियेटर में अंतर है। उन्होंने कहा कि घटना के सत्रह वर्ष बीत गए हैं पर जब भी हम यह नाटक करते हैं तो सारा मंजर जीवंत हो जाता है।
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