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अब आकाश की ओर चंडीगढ़: दिखेंगी ऊंची इमारतें और मिक्स्ड कॉरिडोर, मास्टर प्लान-2031 में बदलाव का ड्राफ्ट जारी
Sat, 23 May 2026 09:00 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 23 May 2026 09:00 AM IST
सार
अब चंडीगढ़ का विकास मॉडल हॉरिजॉन्टल से वर्टिकल ग्रोथ की ओर बढ़ेगा। प्रशासन का तर्क है कि सीमित भूमि, बढ़ती आबादी, पार्किंग संकट और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए उपलब्ध जमीन का अधिकतम और योजनाबद्ध उपयोग जरूरी हो गया है।
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आवासीय योजना
- फोटो : फाइल
विस्तार
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ अब अपने सबसे बड़े शहरी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार को मास्टर प्लान-2031 में व्यापक संशोधनों का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
प्रस्तावित बदलावों के तहत शहर में पहली बार बड़े स्तर पर हाईराइज हाउसिंग, हाई डेंसिटी ग्रुप हाउसिंग, मिक्स्ड लैंड यूज कॉरिडोर, आधुनिक इंडस्ट्रियल विस्तार और संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है।
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद जारी ड्राफ्ट में साफ संकेत दिए गए हैं कि अब चंडीगढ़ का विकास मॉडल हॉरिजॉन्टल से वर्टिकल ग्रोथ की ओर बढ़ेगा। प्रशासन का तर्क है कि सीमित भूमि, बढ़ती आबादी, पार्किंग संकट और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए उपलब्ध जमीन का अधिकतम और योजनाबद्ध उपयोग जरूरी हो गया है। यह ड्राफ्ट केंद्र सरकार की डी-रेगुलेशन 1.0 और 2.0 नीति के तहत तैयार किया गया है। प्रशासन ने आरडब्ल्यूए, उद्योग संगठनों, व्यापारियों और आम लोगों से 21 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
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गांव मलोया के निकट पॉकेट-7 की करीब 178 एकड़ भूमि को आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित करने की योजना बनाई गई है। यहां 250 व्यक्ति प्रति एकड़ घनत्व के साथ एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी श्रेणी की परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी। प्रशासन के मुताबिक इससे हाउसिंग स्टॉक बढ़ेगा और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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प्रस्तावित बदलावों के तहत शहर में पहली बार बड़े स्तर पर हाईराइज हाउसिंग, हाई डेंसिटी ग्रुप हाउसिंग, मिक्स्ड लैंड यूज कॉरिडोर, आधुनिक इंडस्ट्रियल विस्तार और संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है।
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प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद जारी ड्राफ्ट में साफ संकेत दिए गए हैं कि अब चंडीगढ़ का विकास मॉडल हॉरिजॉन्टल से वर्टिकल ग्रोथ की ओर बढ़ेगा। प्रशासन का तर्क है कि सीमित भूमि, बढ़ती आबादी, पार्किंग संकट और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए उपलब्ध जमीन का अधिकतम और योजनाबद्ध उपयोग जरूरी हो गया है। यह ड्राफ्ट केंद्र सरकार की डी-रेगुलेशन 1.0 और 2.0 नीति के तहत तैयार किया गया है। प्रशासन ने आरडब्ल्यूए, उद्योग संगठनों, व्यापारियों और आम लोगों से 21 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
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प्लॉट कल्चर से ग्रुप हाउसिंग मॉडल की ओर बढ़ेगा शहर
मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधनों में सबसे बड़ा बदलाव आवासीय विकास मॉडल को लेकर किया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में व्यक्तिगत प्लॉट आधारित आवंटन व्यवस्था को सीमित कर बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार शहर में लगभग 215 एकड़ भूमि पहले ही चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीचएबी) को आवासीय परियोजनाओं के लिए आवंटित की जा चुकी है लेकिन उसका विकास अब तक नहीं हो पाया। इसके अलावा फेज-3 क्षेत्रों में करीब 146 एकड़ खाली भूमि और शहर के बाहरी हिस्सों की रिक्त जमीन पर उच्च घनत्व वाली बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।गांव मलोया के निकट पॉकेट-7 की करीब 178 एकड़ भूमि को आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित करने की योजना बनाई गई है। यहां 250 व्यक्ति प्रति एकड़ घनत्व के साथ एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी श्रेणी की परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी। प्रशासन के मुताबिक इससे हाउसिंग स्टॉक बढ़ेगा और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
हाईराइज हाउसिंग के साथ पार्किंग संकट पर भी फोकस
ड्राफ्ट में फेज-2 और फेज-3 क्षेत्रों में हाईराइज सरकारी आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही शहर में बढ़ती पार्किंग समस्या को देखते हुए स्टिल्ट और बेसमेंट पार्किंग को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने की तैयारी है। रिहायशी और संस्थागत क्षेत्रों में इन व्यवस्थाओं को लागू कर सड़क किनारे पार्किंग के दबाव को कम करने की योजना बनाई गई है। मौलीजागरां, शिवालिक एन्क्लेव और पंचकूला सेक्टर-18 के आसपास विकसित हाउसिंग बोर्ड पॉकेट्स में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवन निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।मिक्स्ड लैंड यूज कॉरिडोर से बदलेगा डेवलपमेंट पैटर्न
प्रशासन ने शहर के आर्थिक और व्यावसायिक विकास को गति देने के लिए मिक्स्ड लैंड यूज मॉडल को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। विकास मार्ग के साथ प्रस्तावित मिक्स्ड लैंड यूज कॉरिडोर को दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 1.5 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। यह विस्तार यूटी-पंजाब सीमा तक होगा और मोहाली के पीआर-5 मार्ग से जुड़ेगा।सेक्टर-43 स्थित लगभग 78 एकड़ खाली सब-सिटी सेंटर क्षेत्र को भी मिक्स्ड लैंड यूज श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 की करीब 60 एकड़ अविकसित भूमि को भी मिक्स्ड लैंड यूज के तहत विकसित किया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक इससे वर्क टू वॉक मॉडल को बढ़ावा मिलेगा जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और कार्यालय गतिविधियां एक ही कॉरिडोर में विकसित होंगी। इससे ट्रैफिक दबाव कम करने और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।