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Chandigarh News: विकास की दौड़ में चंडीगढ़ की पहचान न खोए
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ का विकास उसकी मूल पहचान और हैरिटेज स्वरूप से बिना किसी छेड़छाड़ के होना चाहिए। मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधनों पर तीन दिन तक चली आपत्तियों और सुझावों की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों ने अमर उजाला से बातचीत में यही राय रखी। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत शहर की विरासत और नियोजित स्वरूप को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
मास्टर प्लान-2031 पर आपत्तियों की सुनवाई के लिए गठित नौ सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता आईएएस प्रेरणा पुरी कर रही हैं। तीन दिन तक प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन करने के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट और विजन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी। कमेटी में पूर्व टाउन एंड कंट्री प्लानर आर. श्रीनिवास, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के प्रो. सेवा राम, यूटी के पूर्व मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया तथा पंजाब के पूर्व मुख्य नगर योजनाकार के.के. कौल भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंडीगढ़ में हाईराइज इमारतों की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि ऊंची इमारतें शहर की मूल अवधारणा, बुनियादी ढांचे और हैरिटेज चरित्र के अनुरूप नहीं हैं। पानी, सीवरेज, ड्रेनेज और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं की क्षमता पहले से सीमित है। ऐसे में विकास के लिए वैकल्पिक मॉडल अपनाने की जरूरत है।
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पॉकेट-6 का योजनाबद्ध आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए
मनीमाजरा को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि पॉकेट-6 (मोटर मार्केट और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स क्षेत्र) का योजनाबद्ध आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। यहां स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला इमारतों का प्रस्ताव पार्किंग समस्या के समाधान और सीमित भूमि के बेहतर उपयोग के लिहाज से उपयुक्त हो सकता है लेकिन इससे पहले क्षेत्र की भौगोलिक और बुनियादी परिस्थितियों का विस्तृत आकलन जरूरी है।
इंडस्ट्री को अधिक सुविधाएं देकर विकास को गति दें
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इंडस्ट्री को अधिक सुविधाएं देकर विकास को गति दी जाए। उनका कहना है कि पुरानी इमारतों को तोड़ने के बजाय मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाए। मिक्स लैंड यूज और खाली पड़ी जमीनों के बेहतर उपयोग से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखा जा सकता है।
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मास्टर प्लान-2031 पर आपत्तियों की सुनवाई के लिए गठित नौ सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता आईएएस प्रेरणा पुरी कर रही हैं। तीन दिन तक प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन करने के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट और विजन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी। कमेटी में पूर्व टाउन एंड कंट्री प्लानर आर. श्रीनिवास, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के प्रो. सेवा राम, यूटी के पूर्व मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया तथा पंजाब के पूर्व मुख्य नगर योजनाकार के.के. कौल भी शामिल हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि चंडीगढ़ में हाईराइज इमारतों की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि ऊंची इमारतें शहर की मूल अवधारणा, बुनियादी ढांचे और हैरिटेज चरित्र के अनुरूप नहीं हैं। पानी, सीवरेज, ड्रेनेज और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं की क्षमता पहले से सीमित है। ऐसे में विकास के लिए वैकल्पिक मॉडल अपनाने की जरूरत है।
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पॉकेट-6 का योजनाबद्ध आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए
मनीमाजरा को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि पॉकेट-6 (मोटर मार्केट और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स क्षेत्र) का योजनाबद्ध आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। यहां स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला इमारतों का प्रस्ताव पार्किंग समस्या के समाधान और सीमित भूमि के बेहतर उपयोग के लिहाज से उपयुक्त हो सकता है लेकिन इससे पहले क्षेत्र की भौगोलिक और बुनियादी परिस्थितियों का विस्तृत आकलन जरूरी है।
इंडस्ट्री को अधिक सुविधाएं देकर विकास को गति दें
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इंडस्ट्री को अधिक सुविधाएं देकर विकास को गति दी जाए। उनका कहना है कि पुरानी इमारतों को तोड़ने के बजाय मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाए। मिक्स लैंड यूज और खाली पड़ी जमीनों के बेहतर उपयोग से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखा जा सकता है।