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बेशक देख नहीं सकते, पर हुनर इतना गजब कि औरों की दुनिया रोशन करते हैं

Thu, 12 Oct 2017 01:52 PM IST
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 12 Oct 2017 01:52 PM IST
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chandigarh sector 26 blind institute students talent story
ब्लाइंड इंस्टीट्यूट स्टूडेंट्स
बेशक अपनी आंखों से देख नहीं सकते, रंगों की पहचान नहीं कर सकते, लेकिन इनमें हुनर इतना गजब है कि दूसरों की जिंदगी रोशन कर देते हैं। एक तरफ जहां पूरे देश में दीवाली की तैयारियां जोरों पर है, वहीं चंडीगढ़ के सेक्टर-26 के ब्लाइंड इंस्टीट्यूट में दृष्टिहीन बच्चों ने दूसरों की जिंदगी को रोशन करने का बीड़ा उठाया है। ये स्कूल में बनाई जाने वाली मोमबत्तियों और दीयों को आकर्षक रूप में पैक करने में मदद कर रहे हैं।
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यहां जो बच्चे रंगों की पहचान नहीं कर सकते, वो मेहनत और लगन से कई तरह की खूबसूरत मोमबत्तियों को सजा रहे हैं। यहां आपको 20 रुपये से लेकर 80 रुपये के बीच कई तरह की मोमबत्तियां मिल जाएंगी। जिनमें मिकी माउस कैंडल, रैबिट  कैंडल, क्रिसमस ट्री स्टाइल मोमबत्तियां आदि शामिल हैं। ये बच्चे अपनी कला और हुनर के जरिए दुनिया को रोशनी का पैगाम दे रहे हैं। ये बच्चे दीवाली से कुछ महीने पहले ही इस काम में जुट जाते हैं।
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ये अपनी पढ़ाई को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होने देते। बच्चे स्कूल का समय खत्म होने के बाद इकट्ठे होते हैं और मोमबत्ती पैकिंग का काम करते हैं। ये इनका जज्बा ही है कि इनके इस काम में बटाए हाथ से इंस्टीट्यूट को लाखों रुपये की आमदनी होती है।
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यहां पढ़े बच्चे आज सम्मानजनक पदों पर
इस इंस्टीट्यूट में करीब 153 स्टूडेंट हैं जिनमें कई हॉस्टल में ही रहते है। यहां पर नेत्रहीन बच्चों को आर्ट्स में 12वीं तक पढ़ाया जाता है। इसके  अलावा बेसिक कंप्यूटर शिक्षा, वैक्स कैंडल मेकिंग, लड़कियों के लिए सिलाई और बुनाई, संगीत आदि की भी शिक्षा दी जाती है। सेक्रेटरी बीडी शर्मा ने बताया कि यहां से पढ़े बच्चे आज कई सम्मानजनक पदों पर कार्य कर रहे हैं, जिनमें कई बैंक और हाउसिंग बोर्ड में कार्यरत हैं।

खरीदना है तो यहां आएं....
हम इन मोमबत्तियों को बेचने के लिए कोई स्टॉल नहीं लगाते हैं, खरीददार को सेक्टर-26 ही आकर ले जाना पड़ता है। बुधवार तक 2 लाख के करीब की सेल हो चुकी है। इस बार 5 लाख तक के सेल की उम्मीद है। हमारे कई रेगुलर ग्राहक हैं जो हर साल इन बच्चों द्वारा बनाई गई मोमबत्तियों को खरीदकर ले जाते हैं। पिछले कुछ सालों में ग्राहक की संख्या काफी बढ़ी है।

- प्रेम गिरधर, ज्वाइंट सेक्रेटरी, इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड

बच्चे स्कूल खत्म होने के बाद 3 बजे से 5 बजे तक मोमबत्तियों की पैकिंग करते हैं। इन बच्चों द्वारा तैयार की गई मोमबत्तियों से जो भी आमदनी होती है वह इन बच्चों पर ही खर्च की जाती है। इन बच्चों के लिए यहां सब कुछ फ्री है। इसके साथ ही इन्हें यहां हर की तरह की आजादी है।
- बीडी शर्मा, सेक्रेटरी, इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड
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