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स्कूलों की मनमानी पर अब जनहित याचिका के तौर पर होगी सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Jan 2017 12:20 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ के अधिकतर निजी स्कूलों में बच्चों को एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें पढ़ाने का मामला अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के तौर पर सुना जाएगा। जस्टिस आरके जैन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए याची को जनहित याचिका दाखिल करने की सलाह दी है।
चंडीगढ़ के नितिन गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि शहर के अधिकतर निजी स्कूल बच्चों को एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें पढ़ा रहे हैं। तय कानून के अनुसार स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्तावित किताबें पढ़ाना अनिवार्य है। बावजूद इसके निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। बच्चों पर महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है, जिनकी कीमत 10 गुना अधिक है। यह सारा खेल निजी स्कूल प्रबंधकों और निजी प्रकाशकों की मिलीभगत से चल रहा है।
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चंडीगढ़ के नितिन गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि शहर के अधिकतर निजी स्कूल बच्चों को एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें पढ़ा रहे हैं। तय कानून के अनुसार स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्तावित किताबें पढ़ाना अनिवार्य है। बावजूद इसके निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। बच्चों पर महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है, जिनकी कीमत 10 गुना अधिक है। यह सारा खेल निजी स्कूल प्रबंधकों और निजी प्रकाशकों की मिलीभगत से चल रहा है।
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सिंगल बेंच ने कहा, मामला बेहद गंभीर और अहम
highcourt
- फोटो : File Photo
गोयल ने हाईकोर्ट को बताया था कि कानून के तहत स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के साथ ही यह भी तय किया गया है कि ये सभी स्कूल वही पुस्तकें पढ़ाएंगे, जिन्हें एजुकेशन विभाग प्रस्तावित करेगा। इस कानून के बावजूद भी चंडीगढ़ का एजुकेशन विभाग न तो स्कूलों को एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने के लिए निर्देश दे रहा है और न ही कानून के तहत कोई कार्रवाई की है। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट ने भी ऐसे ही एक मामले में निर्देश दिए थे कि स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जानी चाहिए।
20 जुलाई 2015 में सीबीएसई ने भी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए थे कि निजी पब्लिशरों की अधिक पुस्तकें पढ़ाए जाने से बचा जाए। याचिकाकर्ता ने इस मामले को लेकर बीते साल सात नवंबर को चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव और एजुकेशन विभाग के निदेशक को रिप्रेजेंटेशन दी थी। याचिकाकर्ता की रिप्रेजेंटेशन पर कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याची ने अपील की थी कि हाईकोर्ट एजुुकेशन विभाग को निर्देश जारी करे कि इन स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएं। अब हाईकोर्ट ने इसे जनहित से जुड़ा हुआ मामला मानते हुए इस विषय को लेकर जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को निर्देश दे दिए हैं।
20 जुलाई 2015 में सीबीएसई ने भी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए थे कि निजी पब्लिशरों की अधिक पुस्तकें पढ़ाए जाने से बचा जाए। याचिकाकर्ता ने इस मामले को लेकर बीते साल सात नवंबर को चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव और एजुकेशन विभाग के निदेशक को रिप्रेजेंटेशन दी थी। याचिकाकर्ता की रिप्रेजेंटेशन पर कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याची ने अपील की थी कि हाईकोर्ट एजुुकेशन विभाग को निर्देश जारी करे कि इन स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएं। अब हाईकोर्ट ने इसे जनहित से जुड़ा हुआ मामला मानते हुए इस विषय को लेकर जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को निर्देश दे दिए हैं।