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पीयू के छोटे विभागों को विलय करने का खाका तैयार
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के छोटे नौ विभागों को बड़े विभागों में विलय करने का खाका तैयार हो गया है। कमेटी ने यह प्रस्ताव तैयार कर वीसी को भेज दिया है। अब विभागों के विलय की फाइल पर अंतिम मुहर वीसी लगाएंगे। माना जा रहा है कि इस बार इस पर कोई विवाद नहीं उपजेगा। विलय करने वाले विभागों को उनसे संबंधित विभागों से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाषा वाले विभागों को दो भागों में बांटा गया है। हालांकि कमेटी ने अपने प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किया है।
वर्ष 2015 में नैक की टीम ने ग्रेडिंग के लिए पीयू का दौरा किया था। इस टीम ने पीयू की कई खामियों को उजागर किया और फिर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इन सुझावों में एक यही था कि छोटे विभागों का विलय उनसे जुड़े दूसरे विभागों में कर दिया जाए। इसके पीछे तर्क था कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी होगी और शिक्षक भी ज्यादा तैनात होंगे। विभागों को एक कर दिया जाएगा तो कम स्टाफ में भी काम चलाया जा सकेगा और कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकेंगी। मालूम हो कि पीयू में छोटे-छोटे केंद्रों की स्थापना की थी। नैक की टीम को यह नहीं भाया। उन्होंने दूसरे विश्वविद्यालयों से सीख लेने को कहा। उन्होंने यूजीसी के मुताबिक छोटे विभाग न रखने की सलाह दी थी। छोटे-छोटे विभागों को बड़े विभागों में शामिल करने को कहा था।
इस तरह ठंडे बस्ते में रहा प्रस्ताव
नैक की टीम के सुझाव के बाद पीयू ने इसके लिए कमेटियां बनाईं, लेकिन ये कमेटियां कागजों में ही विभागों का विलय करती रहीं। कुछ न कुछ अड़चनें आती गईं। कई बार कमेटियां बनीं। वर्ष 2019 में भी कमेटी बनी। प्रस्ताव भी तैयार हुआ, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका। हालांकि उस प्रस्ताव को पसंद नहीं किया गया। उसके बाद दोबारा विभागों का प्रस्ताव तैयार होने लगा।
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इनसेट---
उर्दू भाषा को लेकर खड़ा हुआ था विवाद
पीयू की ओर से पिछले वर्षों में भाषा से जुड़े कोर्सेज को एक करने की तैयारी की थी। उर्दू को विदेशी भाषा में शामिल कर दिया गया। इस पर हंगामा हो गया। लोगों ने इसे मुद्दा बना दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस पर आपत्ति दायर की थी। उन्होंने कहा कि उर्दू विदेशी भाषा नहीं है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो इस प्रस्ताव को टाल दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अब जो प्रस्ताव तैयार हुआ है उसमें विवाद की गुंजाइश न के बराबर बताई जा रही है।
इनसेट----
विभागों के नए चेयरमैन कर सकते हैं विरोध
पीयू कमेटी ने विभागों के विलय को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों का कहना है कि छोटे विभागों के हाल ही में कई शिक्षक चेयरमैन बने हैं। वह लंबे समय से चेयरमैन कार्यकाल का इंतजार कर रहे थे। अब जैसे ही विभाग विलय होंगे तो चेयरमैन का पद नहीं रहेगा। उसकी जगह समन्वयक का पद होगा। सूत्रों का कहना है कि नए चेयरमैन इस प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा सकते हैं।
वर्जन---
विभागों के विलय के लिए बनाई गई कमेटी ने अपना कार्य पूरा कर दिया है। इसकी रिपोर्ट वीसी को भेज दी गई है। वहीं से उच्चाधिकारी उसे फाइनल करेंगे।
- प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई
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वर्ष 2015 में नैक की टीम ने ग्रेडिंग के लिए पीयू का दौरा किया था। इस टीम ने पीयू की कई खामियों को उजागर किया और फिर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इन सुझावों में एक यही था कि छोटे विभागों का विलय उनसे जुड़े दूसरे विभागों में कर दिया जाए। इसके पीछे तर्क था कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी होगी और शिक्षक भी ज्यादा तैनात होंगे। विभागों को एक कर दिया जाएगा तो कम स्टाफ में भी काम चलाया जा सकेगा और कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकेंगी। मालूम हो कि पीयू में छोटे-छोटे केंद्रों की स्थापना की थी। नैक की टीम को यह नहीं भाया। उन्होंने दूसरे विश्वविद्यालयों से सीख लेने को कहा। उन्होंने यूजीसी के मुताबिक छोटे विभाग न रखने की सलाह दी थी। छोटे-छोटे विभागों को बड़े विभागों में शामिल करने को कहा था।
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इस तरह ठंडे बस्ते में रहा प्रस्ताव
नैक की टीम के सुझाव के बाद पीयू ने इसके लिए कमेटियां बनाईं, लेकिन ये कमेटियां कागजों में ही विभागों का विलय करती रहीं। कुछ न कुछ अड़चनें आती गईं। कई बार कमेटियां बनीं। वर्ष 2019 में भी कमेटी बनी। प्रस्ताव भी तैयार हुआ, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका। हालांकि उस प्रस्ताव को पसंद नहीं किया गया। उसके बाद दोबारा विभागों का प्रस्ताव तैयार होने लगा।
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उर्दू भाषा को लेकर खड़ा हुआ था विवाद
पीयू की ओर से पिछले वर्षों में भाषा से जुड़े कोर्सेज को एक करने की तैयारी की थी। उर्दू को विदेशी भाषा में शामिल कर दिया गया। इस पर हंगामा हो गया। लोगों ने इसे मुद्दा बना दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस पर आपत्ति दायर की थी। उन्होंने कहा कि उर्दू विदेशी भाषा नहीं है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो इस प्रस्ताव को टाल दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अब जो प्रस्ताव तैयार हुआ है उसमें विवाद की गुंजाइश न के बराबर बताई जा रही है।
इनसेट----
विभागों के नए चेयरमैन कर सकते हैं विरोध
पीयू कमेटी ने विभागों के विलय को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों का कहना है कि छोटे विभागों के हाल ही में कई शिक्षक चेयरमैन बने हैं। वह लंबे समय से चेयरमैन कार्यकाल का इंतजार कर रहे थे। अब जैसे ही विभाग विलय होंगे तो चेयरमैन का पद नहीं रहेगा। उसकी जगह समन्वयक का पद होगा। सूत्रों का कहना है कि नए चेयरमैन इस प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा सकते हैं।
वर्जन---
विभागों के विलय के लिए बनाई गई कमेटी ने अपना कार्य पूरा कर दिया है। इसकी रिपोर्ट वीसी को भेज दी गई है। वहीं से उच्चाधिकारी उसे फाइनल करेंगे।
- प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई