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पीजीआई का काम प्रभावित करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करे चंडीगढ़ पुलिस : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। अनुबंध कर्मियों की विभिन्न यूनियनों की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हड़ताल के आह्वान व जॉइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन के पीजीआई में प्रवेश और गिरफ्तारी देने की घोषणा के मामले में पीजीआई चंडीगढ़ ने अवमानना याचिका दाखिल करते हुए कार्रवाई की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ के एसएसपी को आदेश दिया है कि कोई भी कर्मचारी यदि पीजीआई के काम में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करता है तो उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद उसके खिलाफ कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश भी दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित झांजी व एडवोकेट अभिषेक कुमार प्रेमी के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर, 2014 को आदेश जारी कर अनुबंध कर्मियों की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद पीजीआई पर इसे लागू करने का आदेश जारी हुआ, लेकिन संस्थान को इस मामले में अंतरिम तौर पर मोहलत मिल गई थी। इसके बाद से ही लगातार अनुबंध कर्मचारी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं।
हाईकोर्ट को बताया गया कि सफाई कर्मचारी, सिक्योरिटी गार्ड, हॉस्पिटल अटेंडेंट और इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन व इनकी जाॅइंट एक्शन कमेटी ने 18 से 20 जनवरी, 2024 तक हड़ताल का निर्णय लिया था और परिसर में नारेबाजी आरंभ कर दी थी। यूनियन और जाॅइंट एक्शन कमेटी की ओर से 7 फरवरी से हड़ताल का निर्णय लिया गया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस मामले में दखल दिया जाए।
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हाईकोर्ट ने 5 फरवरी, 2024 को अपने आदेश में कहा था कि हम कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी यूनियन की हड़ताल पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है और आदेश को बाईपास करने के लिए नए नाम से यूनियन बना ली गई हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि अब यह चंडीगढ़ के गृह सचिव की जिम्मेदारी है कि हमारे आदेश का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न हो और पीजीआई का दैनिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान पीजीआई ने बताया कि जाॅइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन अश्विनी कुमार मुंजाल नियमित कर्मचारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं। उसका अब पीजीआई से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वह अनुबंध कर्मियों का नेतृत्व कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए आदेश दिया है कि मुंजाल को पीजीआई के भीतर अगले आदेश तक प्रवेश की अनुमति न दी जाए।
अब इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि 5 फरवरी के आदेश के बावजूद कर्मचारी यूनियनों ने 15 फरवरी से हड़ताल का निर्णय लिया है और अश्विनी मुंजाल ने आदेश के बावजूद पीजीआई मेंं प्रवेश कर गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पीजीआई देश का अग्रणी संस्थान है और हजारों लोगों का जीवन इस पर निर्भर रहता है। कोर्ट ने एसएसपी को आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति पीजीआई के काम में बाधा पैदा करे तो उसे तुरंत हिरासत में लेना व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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याचिका दाखिल करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित झांजी व एडवोकेट अभिषेक कुमार प्रेमी के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर, 2014 को आदेश जारी कर अनुबंध कर्मियों की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद पीजीआई पर इसे लागू करने का आदेश जारी हुआ, लेकिन संस्थान को इस मामले में अंतरिम तौर पर मोहलत मिल गई थी। इसके बाद से ही लगातार अनुबंध कर्मचारी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि सफाई कर्मचारी, सिक्योरिटी गार्ड, हॉस्पिटल अटेंडेंट और इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन व इनकी जाॅइंट एक्शन कमेटी ने 18 से 20 जनवरी, 2024 तक हड़ताल का निर्णय लिया था और परिसर में नारेबाजी आरंभ कर दी थी। यूनियन और जाॅइंट एक्शन कमेटी की ओर से 7 फरवरी से हड़ताल का निर्णय लिया गया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस मामले में दखल दिया जाए।
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हाईकोर्ट ने 5 फरवरी, 2024 को अपने आदेश में कहा था कि हम कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी यूनियन की हड़ताल पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है और आदेश को बाईपास करने के लिए नए नाम से यूनियन बना ली गई हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि अब यह चंडीगढ़ के गृह सचिव की जिम्मेदारी है कि हमारे आदेश का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न हो और पीजीआई का दैनिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान पीजीआई ने बताया कि जाॅइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन अश्विनी कुमार मुंजाल नियमित कर्मचारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं। उसका अब पीजीआई से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वह अनुबंध कर्मियों का नेतृत्व कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए आदेश दिया है कि मुंजाल को पीजीआई के भीतर अगले आदेश तक प्रवेश की अनुमति न दी जाए।
अब इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि 5 फरवरी के आदेश के बावजूद कर्मचारी यूनियनों ने 15 फरवरी से हड़ताल का निर्णय लिया है और अश्विनी मुंजाल ने आदेश के बावजूद पीजीआई मेंं प्रवेश कर गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पीजीआई देश का अग्रणी संस्थान है और हजारों लोगों का जीवन इस पर निर्भर रहता है। कोर्ट ने एसएसपी को आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति पीजीआई के काम में बाधा पैदा करे तो उसे तुरंत हिरासत में लेना व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।