दिल्ली कैब कांड से चंडीगढ़ ने लिया ये सबक
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दिल्ली में एक कैब में महिला से हुए दुराचार के मामले में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने चंडीगढ़ में टैक्सी-कैब ऑपरेटर्स की सरप्राइज चेकिंग शुरू कर दी है। सोमवार को स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के एडिशनल सेक्रेटी राजीव तिवारी खुद सड़क पर निकले और उन्होंने एक कैब हायर की।
उन्होंने बाद में कैब ऑपरेटर्स को कॉल कर गाड़ी की लोकेशन पूछी। ऐसे ही उन्होंने तीन-चार और कैब की जांच की। हालांकि इनका जीपीएस सिस्टम सही ऑपरेट कर रहा था, लेकिन एसटीए ने सख्ती शुरू कर दी है। तिवारी ने कहा कि आगे भी चेकिंग जारी रहेगी।
मांगा ड्राइवर्स का रिकॉर्ड और नाम, पता
तिवारी ने बताया कि उन्होंने सभी कैब ऑपरेटर्स से उनके ड्राइवर्स का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। जिसमें ड्राइवर का मोबाइल नंबर, पता, लाइसेंस नंबर और कैरेक्टर वैरीफिकेश रिपोर्ट होगी। तिवारी ने कहा कि सभी को मंगलवार को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
कैब में जीपीएस सिस्टम लगाना जरूरी
एसटीए की गाइडलाइंस के मुताबिक हर कैब में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम(जीपीएस)लगा होना चाहिए। कैब ऑपरेटर्स के पास उनकी हर गाड़ी का हर समय का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए।
करीब 200 कैब हैं शहर में
शहर में केवल 3 कैब ऑपरेटर्स मेगा कैब, आरबीटीसी और फैब कैब ही एसटीए से रजिस्टर्ड हैं। इनकी करीब 200 गाडि़यां शहर में चल रही हैं।
कोट
जो भी टैक्सी ऑपरेटर्स रजिस्टर्ड हैं, उनके सभी ड्राइवर्स की पुलिस वैरीफिकेशन करवाई जाती है। यदि कोई ड्राइवर यात्रियों से मिसबिहेव करता है तो उसके खिलाफ फौरन एक्शन भी लिया जाता है। हमारे पास सभी ड्राइवर्स का रिकॉर्ड भी है रहता है।
रमेश आहूजा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ टैक्सी ऑपरेटर्स एसोसिएशन
बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड पर समय समय पर चेकिंग की जाती है। पुलिस की ओर से एतिहयात के लिए हरेक कंपनी के कर्मचारियों का डाटा लिया जाता है और इसी क्रम में टैक्सी आपरेटर आते हैं। हम अब पुलिस के नियमों के मुताबिक नियमित आधार पर टैक्सी आपरेटरों पर चेकिंग की जाएगी।
डा. सुखचैन सिंह गिल, एसएसपी चंडीगढ़
स्टैंड पर जाकर ही कैब हायर करना सेफ
दिल्ली में हुए कैब रेप मामले ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि जिले में टैक्सी या कैब लेकर सफर करने में इस तरह की मुश्किल वाली कोई बात नहीं है।
जानकारों के मुताबिक महिला अकेली ली हो या परिवार सहित, कहीं भी सफर करना हो, ऐसे में टैक्सी स्टैंड से गाड़ी लेना सबसे बढ़िया रहता है। क्योंकि जब स्टैंड से गाड़ी ली जाती है। तो स्टैंड पर रखे रजिस्ट्रर में बकायदा एंट्री होती है कि कौन सी गाड़ी कहां जा रही है।
गाड़ी में कौन सी सवारी जा रही है, गाड़ी को कौन सा ड्राइवर चला रहा है। इसके अलावा टूर कितने दिन का रहेगा। साथ ही टैक्सी चालक पर जीपीएस से भी नजर रखी जाती है। इसके अलावा गाड़ियों में ट्रैकिंग सिस्टम भी इंस्टाल किया जाता है।
स्टैंड पर रखा जाता है ड्राइवर का पूरा रिकॉर्ड
जिस टैक्सी स्टैंड के प्रमुख जसवंत सिंह बताते हैं कि टैक्सी स्टैंड पर जो गाड़ियां लगती है। उसके लिए काफी सख्त नियम होते हैं। ड्र्राइवर के लाइसेंस से लेकर उसकी ड्रेस तक सब देखे जाते हैं। साथ ही उसका पूरा रिकॉर्ड गाड़ी मालिक के पास रहता है।
इतना ही नहीं अब तो गाड़ियों में स्पीड गवर्नर तक लगाए जा रहे हैं। ऐसे में यदि ड्राइवर गाड़ी को काफी तेज भगाता है। तो उस पर भी नजर रखी जाती है। साथ ही उसे डॉयरेक्शन दी जाती है।
वहीं, एसपी सिक्योरिटी एंड ट्रैफिक शविंदरजीत सिंह बैंस ने बताया कि टैक्सी स्टैंड पर बकायदा रजिस्ट्रर होता है। उसमें सारी चीजें लिखी जाती है। इसके अलावा लाइसेंस और अन्य चीजों का गाड़ी मालिक को देखना होता है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस भी तैनात रहती है।