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चंडीगढ़: विदेशियों को मौत के रहस्य सुलझाने की कला सिखाएगा पीजीआई, दक्षिण पूर्व देशों के साथ शुरू होगी सीपीसी
Thu, 28 Sep 2023 03:19 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 28 Sep 2023 03:19 PM IST
सार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई में टेली मेडिसिन की गुणवत्ता युक्त सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया है। इसके अंतर्गत अब देश के अन्य चिकित्सा संस्थान किसी गंभीर बीमारी में निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति होने पर पीजीआई के विशेषज्ञों से सलाह लेंगे।
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पीजीआई
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई अब विदेशियों को मरीजों के मौत के अनसुलझे कारणों को सुलझाने की कला सिखाएगा। इसमें उन मरीजों के इलाज से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने की जानकारी दी जाएगी, जिनका क्लीनिकल पोस्टमार्टम यानी फॉरेंसिक रिपोर्ट में मौत के कारणों की पुष्टि नहीं होती। पीजीआई के विशेषज्ञ अब तक देश के लगभग 80 चिकित्सा संस्थानों में इसका ज्ञान दे रहे हैं, लेकिन अब इस ज्ञान के देश के बाहर भी विस्तार की योजना बनाई गई है। सबसे पहले दक्षिण पूर्व के देशों को इसका पाठ पढ़ाया जाएगा।
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पीजीआई के क्लीनिकल एटाप्सी और टेलीमेडिसिन के प्रभारी डॉ. बिमान साकिया ने बताया कि दक्षिण पूर्व के देशों के साथ जल्द ही क्लिनिकोपैथोलॉजिकल कॉन्फ्रेंस (सीपीसी) की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए वे देश इच्छुक हैं, क्योंकि इसका परिणाम गंभीर मरीजों के इलाज में बेहद कारगर है।
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डॉ. बिमान साकिया ने बताया कि रेफरल सेंटरों में आने वाले गंभीर मरीजों की इलाज के दौरान मर्ज के सही कारण की जानकारी लेने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए अलग अलग तरह के डाइग्नोसिस कराए जाते हैं। उन जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज की रणनीति में बदलाव किए जाते हैं। लेकिन कई मरीजों में इलाज के बावजूद परिणाम संतोषजनक नहीं आता और उसकी मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में भी मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हो पाती। उन मामलों में मौत के सही कारणों की जांच के लिए मरीज के ऑगर्न सुरक्षित रख लिए जाते हैं, जिसका बाद में क्लिनिकोपैथोलॉजिकल कॉन्फ्रेंस या सीपीसी के जरिए खुलासा किया जाता है। सीपीसी में शामिल विशेषज्ञ एटाप्सी के आधार पर मौत के कारणों की जानकारी देते हैं जिससे इलाज करने वाले डॉक्टर को अपनी चूक का पता चलता है।
सीपीसी का उद्देश्य इलाज में किसी भी तरह के चूक की गुंजाइश न रहने देना
डॉ. बिमान साकिया ने बताया कि सीपीसी का मुख्य उद्देश्य इलाज में किसी भी तरह के चूक की गुंजाइश को न रहने देना है। इसके लिए ऐसे मामलों में मौत के कारणों का खुलासा किया जाता है जो इलाज करने वाले डॉक्टर की समझ से परे था। इसके आधार पर डॉक्टर को वैसे मामलों में इलाज के दौरान लिए जाने वाले निर्णय के स्तर पर प्रशिक्षित करता है जिससे वे उस मरीज के समान आने वाले अन्य मरीजों का समय रहते सही इलाज कर उनकी जान बचा सके।
दक्षिण पूर्व के ये देश लेंगे ज्ञान
ब्रुनेई, बर्मा (म्यांमार), कंबोडिया, तिमोर-लेस्ते, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम।
आप भी जान लें सीपीसी
सीपीसी समस्या-समाधान दृष्टिकोण द्वारा चिकित्सा सीखने की एक केस आधारित पद्धति है, जिसमें प्रस्तुतकर्ता उन नैदानिक उपकरणों के परिणाम बताते हुए इतिहास, शारीरिक परीक्षण और सभी प्रासंगिक जांच प्रस्तुत करता है। प्राप्त नैदानिक अध्ययन उसी क्रम में प्रस्तुत किए जाते हैं जिस क्रम में इसे एकत्र किया गया था। सीपीसी का दूसरा रूप पोस्टमॉर्टम हिस्टोलॉजी पर आधारित है जहां पोस्टमॉर्टम से पहले निदान अस्पष्ट था। क्लिनिकल चर्चाकर्ता को सभी उपलब्ध रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाते हैं, और क्लिनिकोपैथोलॉजिक सहसंबंध स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। इससे किसी दिए गए रिपोर्ट में मृत्यु दर के कुछ अज्ञात कारणों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
पीजीआई टेलीपैथालॉजी में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई में टेली मेडिसिन की गुणवत्ता युक्त सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया है। इसके अंतर्गत अब देश के अन्य चिकित्सा संस्थान किसी गंभीर बीमारी में निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति होने पर पीजीआई के विशेषज्ञों से सलाह लेंगे। इसके लिए वे मरीज की पैथालॉजिकल रिपोर्ट की कॉपी पीजीआई को भेजेगा। इसके आधार पर यहां के विशेषज्ञ उन्हें बेहतर चिकित्सा से संबंधित राय देंगे।
पीजीआई ने कोविड में टेलीमेडिसिन के माध्यम से लाखों मरीजों को अस्पताल आए बिना इलाज मुहैया कराया। संस्थान की टेलीमेडिसिन की उच्च गुणवत्ता को देखते हुए ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। अब हम सीपीसी के जरिए विदेशी डॉक्टरों को जानकारी देने की योजना बना रहे हैं। जल्द ही दक्षिण पूर्व के देशों में यह कार्यक्रम शुरू होगा। -प्रो. विवेक लाल, निदेशक पीजीआई