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बुरी खबरः रद्द हो सकती है PGI सुपरिंटेंडेंट की परीक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Dec 2015 02:35 PM IST
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बुरी खबर, पीजीआई चंडीगढ़ में पिछले साल आयोजित सुपरिंटेंडेंट के एग्जाम को विजिलेंस सेल ने रद्द करने की सिफारिश की है। परीक्षा में धांधली के आरोप लगे थे। इस बारे में हेल्थ मिनिस्ट्री से लेकर सीवीसी और विजिलेंस को शिकायत दी गई थी। उसके बाद पीजीआई ने अपनी विजिलेंस सेल से जांच कराने का फैसला लिया।
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जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई। कमेटी ने सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की तो पाया कि परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली हुई है। इसके बाद कमेटी ने सर्वसम्मति से परीक्षा को रद करने की सिफारिश की है। विजिलेंस सेल से रिपोर्ट मिलने के बाद पीजीआई ने एग्जाम को कैंसिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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दो हफ्ते पहले पीजीआई ने एमआरटी का एग्जाम कैंसिल किया था, लेकिन उसमें शामिल अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मुद्दे को अमर उजाला ने जोर-शोर से उठाया था।
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एक और धांधली की तैयारी
आरोप लगाया गया है कि एमआरटी के लिए कांट्रैक्ट के तौर पर भर्ती करने के लिए कंपनियों से टेंडर मांगे गए थे। इसमें एक सिक्योरिटी कंपनी ने सुदर्शन नामक कंपनी से टेंडर अप्लाई कर दिया है। आरोप है कि टेंडर अप्लाई करने के लिए कम से कम तीन साल का अनुभव होना जरूरी है, लेकिन सुदर्शन कंपनी को मात्र छह महीने का ही अनुभव है।
कुछ समय पहले सिक्योरिटी कंपनी उस समय विवादों में आ गई थी जब पता चला था कि कर्मचारियों का पीएफ सिक्योरिटी कंपनी अपने नाम के बजाय सुदर्शन कंपनी के नाम से जमा करवा रही थी। अब उसके बाद सुदर्शन कंपनी ने एमआरटी के लिए अप्लाई कर दिया है।
दो हफ्ते पहले एमआरटी का एग्जाम किया था कैंसिल
दो हफ्ते पहले पीजीआई ने मेडिकल रिकार्ड टेक्नीशियन का एग्जाम कैंसिल कर दिया था। इसमें धांधली की शिकायत हुई थी। जब इसकी विजिलेंस से जांच करवाई गई तो साफ हो गया था कुछ अफसर अपने लोगों को फायदा पहुंचाने की फिराक में थे। इसी तरह से लोअर डिविजन क्लर्क के एग्जाम में धांधली हुई थी। उसकी भी जांच में धांधली की बात सामने आई थी और उसके बाद प्रशासन ने उसे कैंसिल कर दिया था।
यह मिली थी धांधली
सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि 11 पोस्टों के एग्जाम में जिन लोगों का सेलेक्शन हुआ था, उनकी कापियों को जांचने में बड़े स्तर पर धांधली की गई है। सेलेक्ट किए गए लोगों को अधिक नंबर दिए गए। हद तो यहां तक हो गई कि प्रश्नों का जवाब नहीं देने पर कुछ प्रतिभागियों को खुलकर नंबर दिए गए। जब इन आंसरशीट को आरटीआई के माध्यम से मांगा गया तब इसका खुलासा हुआ। इसके बाद साल 2015 में फरवरी, अप्रैल, जून, अगस्त व सितंबर महीने में इसकी शिकायत की गई। उसके बाद विजिलेंस का जांच कराने का फैसला लिया गया।
अफसरों पर होनी चाहिए कार्रवाई
धांधली की रिपोर्ट आने के बाद साफ हो गया है कि पीजीआई की नियुक्तियों में किसी तरह की मनमर्जी चल रही थी। यदि इस मामले को उठाया नहीं जाता तो योग्य लोगों को इंसाफ नहीं मिलता। इस मामले में अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
- सुभाष चंदर, चेयरमैन एंटी करप्शन फ्रंट, पीजीआई