Chandigarh: पीजीआई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैंसर मरीजों को देगा बेहतर इलाज, बना रहा इमेजिंग बायो बैंक
इस प्रोजेक्ट में कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे देश के श्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों का बायो बैंक डाटा उपलब्ध होगा। इसमें कैंसर के मरीजों की प्रत्येक पैथालॉजिकल यानी खून, यूरिन और अन्य पैथालॉजिकल जांचों की रिपोर्ट और रेडियोलॉजिकल स्कैन इमेज का ब्यौरा होगा।
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चंडीगढ़ पीजीआई का रेडियोडाइग्नोसिस विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए कैंसर के मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने पर काम कर रहा है। इस तकनीक का प्रयोग कर शरीर के विभिन्न अंगों के कैंसर वाले मरीजों का इमेजिंग बायोबैंक बना रहा है। इसमें उन मरीजों के रेडियोलॉजिकल और पैथालॉजिकल स्कैन इमेज को एकत्र किया जा रहा है। इस डाटा बैंक से कैंसर मरीजों को कम समय में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। भारत सरकारी के बायो टेक्नोलॉजी विभाग के इस प्रोजेक्ट में पीजीआई समेत दिल्ली एम्स, राजीव गांधी कैंसर संस्थान और टाटा मेमोरियल के विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं।
पीजीआई में इस प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषणकर्ता रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के चेस्ट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मंदीप गर्ग ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 28 फरवरी 2024 तक पूरा करना है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर कैंसर के मरीजों की राह आसान होगी। इसकी मदद से कैंसर के मरीजों को आसानी से चिह्नित कर उनके इलाज की रूपरेखा तत्काल तय की जा सकेगी क्योंकि उसके लिए हमारे सामने देश भर के मरीजों को ब्योरा होगा। नए मरीज की रिपोर्ट कंप्यूटर पर अपलोड करते ही एक क्लिक पर उसके समान वाले मरीज की रिपोर्ट सामने आ जाएगी। फिर हम उस मरीज को दिए गए इलाज और उसके परिणाम के आधार पर नए मरीज के इलाज से संबंधित निर्णय आसानी से ले सकेंगे।
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जांच रिपोर्ट बनेगी हथियार
शरीर के किसी भी अंग के कैंसर के इलाज में इस तकनीक का बहुत फायदा मिलेगा। डॉ. मंदीप गर्ग ने बताया कि पीजीआई रेडियोडाइग्नोसिस विभाग में मौजूदा समय में सिर, गले और फेफड़े के कैंसर वाले 100 मरीजों की क्लीनिकल डिटेल इमेजिंग बायोबैंक में सुरक्षित की जा चुकी है। उन मरीजों की स्कैन रिपोर्ट अपलोड करने के साथ ही उनके इलाज से जुड़ा ब्योरा और उसके प्रभाव की पूरी जानकारी भी शामिल की जा रही है ताकि इमेजिंग बैंक के साथ ही क्लीनिकल जानकारी भी उपलब्ध हो सके।
देशभर के मरीजों के ट्रेंड की मिलेगी जानकारी
इस प्रोजेक्ट में कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे देश के श्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों का बायो बैंक डाटा उपलब्ध होगा। इसमें कैंसर के मरीजों की प्रत्येक पैथालॉजिकल यानी खून, यूरिन और अन्य पैथालॉजिकल जांचों की रिपोर्ट और रेडियोलॉजिकल स्कैन इमेज का ब्यौरा होगा। उन रिपोर्ट को इमेज बैंक में सुरक्षित रखने के साथ ही सर्वर पर भी अपलोड रखा जाएगा ताकि नए पंजीकृत मरीज की रिपोर्ट को कंप्यूटर पर अपलोड कर उस डाटा बैंक से बेहतर ट्रीटमेंट गाइडलाइन प्राप्त किया जा सकेगा। साथ ही देशभर में हो रहे कैंसर के ट्रेंड का भी पता चलेगा।
इलाज के साथ पढ़ाना होगा आसान
इस इमेजिंग डाटा बैंक से जहां एक तरफ मरीजों के इलाज की राह आसान होगी वहीं अध्यापन कार्य भी आसान होगा। महज एक क्लिक पर संबंधित मरीज की समस्या से जुड़ी पूर्व के सभी मरीजों की सारी इलाज पद्धतियों की जानकारी सामने होगी। वहीं डाटा बेस की मदद से छात्रों को आसानी से जटिल तकनीक और बीमारियों के बारे में बताना आसान होगा। इस तकनीक के माध्यम से पीजीआई सिर्फ अपने डाटा बेस का ही नहीं देश के अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों के डाटा को भी माध्यम के तौर पर प्रयोग कर सकेगा।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसलिए महत्वपूर्ण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रभावी तकनीक साबित हुई है क्योंकि यह चिकित्सा उपकरण, डायग्नोसिस, शोध के क्षेत्र में काफी मददगार साबित हो रहा है। रोगों के बेहतर और तेजी से डायग्नोसिस के लिए कंप्यूटिंग तकनीकों का उपयोग करने के अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं। एआई सिस्टम डाटा के बड़े हिस्से को संभाल सकता है और उपचार के सर्वोत्तम तरीकों का सुझाव देने के लिए उनका विश्लेषण कर सकता है।