{"_id":"5f65a1058ebc3eb707597f63","slug":"chandigarh-people-withdraw-pf-during-corona-pandemic","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में संकट के दौर में पीएफ बना सहारा, गुजारे के लिए चंडीगढ़ियों ने निकाले 506 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में संकट के दौर में पीएफ बना सहारा, गुजारे के लिए चंडीगढ़ियों ने निकाले 506 करोड़
Sat, 19 Sep 2020 11:41 AM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 19 Sep 2020 11:41 AM IST
सार
- नौकरी गंवाने या तनख्वाह कम होने की स्थिति में कर्मचारी भविष्य निधि बनी बड़ा सहारा
- लॉकडाउन की घोषणा के दिन से 31 अगस्त के बीच ईपीएफ सदस्यों ने निकाली है यह रकम
विज्ञापन
कर्मचारी भविष्य निधि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना काल में नौकरी गंवाने वाले लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि काफी मददगार साबित हो रहा है। 25 मार्च से लेकर 31 अगस्त तक नौकरी जाने या आर्थिक परेशानी की वजह से शहर में लोगों ने 506.73 करोड़ रुपये अपने पीएफ खातों से निकाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, यह रकम बिहार, हिमाचल प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड समेत अन्य कई राज्यों में निकाली गई पीएफ की रकम से कहीं ज्यादा है। लॉकडाउन में एक ओर जहां कई लोगों की नौकरियां चली गईं, वहीं कम वेतन मिलने या समय पर नहीं मिलने संबंधी परेशानियां भी आ गईं हैं।
ऐसे में पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का सहारा ले रहे हैं। बदली परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने भी पीएफ निकासी के नियमों में छूट दे दी है, जिसका चंडीगढ़ वासियों ने बखूबी लाभ लिया। चंडीगढ़ के ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में इन दिनों पीएफ निकलवाने के लिए काफी भीड़ लग रही है। श्रम मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2020 के दौरान जितने भी भविष्य निधि दावों का निपटारा किया गया है, उनमें से 55 फीसदी दावे कोविड-19 अग्रिम निकासी वाले थे, जबकि 33 फीसदी बीमारी से जुड़े दावों से संबंधित थे।
श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा को दिए लिखित जवाब में बताया कि इस साल 25 मार्च से 31 अगस्त के बीच ईपीएफ खातों से 39,402.94 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इसमें चंडीगढ़ में 506.73 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। वहीं, हरियाणा में 2220.82 करोड़ तो पंजाब में 642.93 करोड़ रुपये निकाले गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे में पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का सहारा ले रहे हैं। बदली परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने भी पीएफ निकासी के नियमों में छूट दे दी है, जिसका चंडीगढ़ वासियों ने बखूबी लाभ लिया। चंडीगढ़ के ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में इन दिनों पीएफ निकलवाने के लिए काफी भीड़ लग रही है। श्रम मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2020 के दौरान जितने भी भविष्य निधि दावों का निपटारा किया गया है, उनमें से 55 फीसदी दावे कोविड-19 अग्रिम निकासी वाले थे, जबकि 33 फीसदी बीमारी से जुड़े दावों से संबंधित थे।
विज्ञापन
श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा को दिए लिखित जवाब में बताया कि इस साल 25 मार्च से 31 अगस्त के बीच ईपीएफ खातों से 39,402.94 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इसमें चंडीगढ़ में 506.73 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। वहीं, हरियाणा में 2220.82 करोड़ तो पंजाब में 642.93 करोड़ रुपये निकाले गए हैं।
विज्ञापन
(केस 1) मलोया में रहने वाले रिंकू कुमार सेक्टर-10 स्थित एक होटल में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे। 15 मार्च से ही काम बंद हो गया। कोई नई नौकरी मिली नहीं। इस बीच मलोया में मकान का किराया, बिजली और पानी का बिल भरना था, इसलिए जब कोई रास्ता नहीं मिला तो पीएफ का पैसा निकालना पड़ा। रिंकु कुमार ने पीएफ से 17 हजार रुपये निकाले, जिससे उनका खर्चा चल गया। रिंकू ने बताया कि लॉकडाउन से उनका और परिवार का जीवन काफी प्रभावित हुआ है।
(केस 2) मोहाली के सेक्टर-80 में रहने वाले मंजीत सिंह सिक्योरिटी का काम करते थे। लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई। इसके बाद खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया। मंजीत ने बताया कि वह मोहाली में किराए पर रहते हैं, इसलिए बिना नौकरी के मकान का किराया देना भी मुश्किल हो रहा था। खर्चे निकालने के लिए ही उन्होंने पीएफ का पैसा निकालने का सोचा। उन्होंने 6 हजार रुपये निकाले, जिससे उन्होंने मकान का किराया व अन्य जरूरत का काम किया।
(केस 3) रायपुर खुर्द में रहने वाले विपिन ठाकुर ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई। खर्चा निकलना काफी मुश्किल हो रहा है। पहले सेल का काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। इसकी वजह से कई महीनों से खाली बैठे हैं। अभी भी अच्छे से गुजारा नहीं चल पा रहा है इसलिए पीएफ निकलवाना चाहता हूं। लॉकडाउन की वजह से काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी है।
लॉकडाउन का सबसे बड़ा असर मजदूर, प्रवासी मजदूर, निम्न और मध्यम वर्ग परिवार पर पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं, जिसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में हुए आर्थिक नुकसान के लिए लोगों ने ईपीएफ से अपना पैसा निकाल अपनी किश्त, मकान का किराया, बच्चों का दाखिला व अन्य काम कर रहे हैं। वहीं, कई लोगों को ईपीएफ निकालने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लॉकडाउन के चलते ईपीएफ विभाग सीधे तौर पर शिकायत नहीं सुन रहे तो यूनियन ने आगे आकर उन समस्याओं का ऑनलाइन निपटारा कराने में मदद की।
- जीवाराज, नेशनल एक्जीक्यूट मेंबर, आईसीसीटीयू चंडीगढ़
(केस 2) मोहाली के सेक्टर-80 में रहने वाले मंजीत सिंह सिक्योरिटी का काम करते थे। लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई। इसके बाद खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया। मंजीत ने बताया कि वह मोहाली में किराए पर रहते हैं, इसलिए बिना नौकरी के मकान का किराया देना भी मुश्किल हो रहा था। खर्चे निकालने के लिए ही उन्होंने पीएफ का पैसा निकालने का सोचा। उन्होंने 6 हजार रुपये निकाले, जिससे उन्होंने मकान का किराया व अन्य जरूरत का काम किया।
(केस 3) रायपुर खुर्द में रहने वाले विपिन ठाकुर ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से नौकरी चली गई। खर्चा निकलना काफी मुश्किल हो रहा है। पहले सेल का काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। इसकी वजह से कई महीनों से खाली बैठे हैं। अभी भी अच्छे से गुजारा नहीं चल पा रहा है इसलिए पीएफ निकलवाना चाहता हूं। लॉकडाउन की वजह से काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी है।
लॉकडाउन का सबसे बड़ा असर मजदूर, प्रवासी मजदूर, निम्न और मध्यम वर्ग परिवार पर पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं, जिसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में हुए आर्थिक नुकसान के लिए लोगों ने ईपीएफ से अपना पैसा निकाल अपनी किश्त, मकान का किराया, बच्चों का दाखिला व अन्य काम कर रहे हैं। वहीं, कई लोगों को ईपीएफ निकालने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लॉकडाउन के चलते ईपीएफ विभाग सीधे तौर पर शिकायत नहीं सुन रहे तो यूनियन ने आगे आकर उन समस्याओं का ऑनलाइन निपटारा कराने में मदद की।
- जीवाराज, नेशनल एक्जीक्यूट मेंबर, आईसीसीटीयू चंडीगढ़