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सॉफ्टवेयर निर्यात करने में जवाब नहीं चंडीगढ़ का, पंचकूला-मोहाली काफी पीछे
अरविंद वाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 07 May 2017 04:37 PM IST
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साफ्टवेयर का निर्यात करने में चंडीगढ़ का जवाब नहीं। वर्ष 2016-17 में इस निर्यात का बिजनेस करने में पंचकूला और मोहाली पीछे रहे। वर्ष 2016-17 के दौरान ट्राइसिटी से कुल आईटी का निर्यात 1163 करोड़ रुपये का किया गया। इसमें चंडीगढ़ का योगदान 66 फीसदी रहा। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क आफ इंडिया (एसटीपीआई), मोहाली के ताजा आंकड़ों के अनुसार ट्राइसिटी में साफ्टवेयर के निर्यात में चंडीगढ़ पहले नंबर पर ही है।
चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क आफ इंडिया से रजिस्टर्ड आईटी कंपनियां कुल 115 हैं। इसमें भी दिग्गज कंपनियों में टेक महिंद्रा और इंफोसिस हैं। चंडीगढ़ के आईटी पार्क में कुल 90 कंपनियां हैं। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन में इंफोसिस, नान सेज जोन में 15 कंपनियां और डीएलएफ कैंपस में 38 कंपनियां हैं।
विप्रो आती तो बन जाती बात
चंडीगढ़ और मोहाली को आईटी की नामी कंपनी विप्रो के न आने का काफी नुकसान हुआ है। पहले विप्रो के लिए चंडीगढ़ में जमीन अलाट थी पर बाद में यह कंपनी नहीं आई। उसके बाद विप्रो के मोहाली में आसार बने पर वहां भी विप्रो की इंट्री नहीं हुई।
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सॉफ्टवेयर खरीदता है यूएस
ट्राइसिटी से सबसे ज्यादा साफ्टवेयर खरीदने वाला देश यूएस है। चंडीगढ़ के आईटी पार्क और मोहाली के सबसे ज्यादा साफ्टवेयर विदेशी कंपनियां पसंद करती हैं। ज्यादातर कंपनियां पब्लिक यूटिलिटी साफ्टवेयर डेवलप करवाती हैं।
सात वर्ष के मुकाबले ग्रोथ हुई कम
चंडीगढ़ में आईटी कंपनी के अधिकारी मुनीष जौहर ने कहा कि आईटी कंपनियों की ग्रोथ कम होने की वजह मार्केट में बिजनेस कम होना है। जितना काम पहले यूएस से आता है उतना अब नहीं आता है।
अब चमकेगी मोहाली की किस्मत
मोहाली में इंफोसिस के आफिस के बनने के साथ अब मोहाली की किस्मत चमक सकती है। चंडीगढ़ में भी आईटी एक्सपोर्ट में सबसे ज्यादा योगदान इंफोसिस का है। ऐसे में मोहाली में इंफोसिस के कैंपस से ही आशाएं हैं।
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चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क आफ इंडिया से रजिस्टर्ड आईटी कंपनियां कुल 115 हैं। इसमें भी दिग्गज कंपनियों में टेक महिंद्रा और इंफोसिस हैं। चंडीगढ़ के आईटी पार्क में कुल 90 कंपनियां हैं। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन में इंफोसिस, नान सेज जोन में 15 कंपनियां और डीएलएफ कैंपस में 38 कंपनियां हैं।
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विप्रो आती तो बन जाती बात
चंडीगढ़ और मोहाली को आईटी की नामी कंपनी विप्रो के न आने का काफी नुकसान हुआ है। पहले विप्रो के लिए चंडीगढ़ में जमीन अलाट थी पर बाद में यह कंपनी नहीं आई। उसके बाद विप्रो के मोहाली में आसार बने पर वहां भी विप्रो की इंट्री नहीं हुई।
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सॉफ्टवेयर खरीदता है यूएस
ट्राइसिटी से सबसे ज्यादा साफ्टवेयर खरीदने वाला देश यूएस है। चंडीगढ़ के आईटी पार्क और मोहाली के सबसे ज्यादा साफ्टवेयर विदेशी कंपनियां पसंद करती हैं। ज्यादातर कंपनियां पब्लिक यूटिलिटी साफ्टवेयर डेवलप करवाती हैं।
सात वर्ष के मुकाबले ग्रोथ हुई कम
चंडीगढ़ में आईटी कंपनी के अधिकारी मुनीष जौहर ने कहा कि आईटी कंपनियों की ग्रोथ कम होने की वजह मार्केट में बिजनेस कम होना है। जितना काम पहले यूएस से आता है उतना अब नहीं आता है।
अब चमकेगी मोहाली की किस्मत
मोहाली में इंफोसिस के आफिस के बनने के साथ अब मोहाली की किस्मत चमक सकती है। चंडीगढ़ में भी आईटी एक्सपोर्ट में सबसे ज्यादा योगदान इंफोसिस का है। ऐसे में मोहाली में इंफोसिस के कैंपस से ही आशाएं हैं।