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चंडीगढ़: घरों में दरार, सड़कों पर सीवरेज का पानी... लगता ही नहीं यह भी है सिटी ब्यूटीफुल

Sun, 09 Aug 2020 04:54 PM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 09 Aug 2020 04:54 PM IST
सार

  • गंदगी, बदहाली और हजार समस्याओं के बीच जीने को मजबूर सेक्टर-38 वेस्ट के लोग
  • 1120 परिवारों को किया शिफ्ट, 11 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग

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Chandigarh News in Hindi; See the condition of Sector-38 West in pictures
कुछ ऐसा है सेक्टर- 38 वेस्ट का हाल।

विस्तार

चंडीगढ़ के सेक्टर-38 वेस्ट में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की तरफ से 1120 परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत साल 2009 में शिफ्ट किया गया, लेकिन अब वह लोग किस स्थिति में रह रहे हैं, सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन मकानों में दरार पड़ गई है। सड़कों पर सीवरेज का पानी बह रहा है। यहां की तस्वीर को देखकर लगता ही नहीं है कि यह भी सिटी ब्यूटीफुल है।

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सेक्टर-38 वेस्ट में रह रहे एक हजार से ज्यादा परिवारों के लिए न तो डिस्पेंसरी बनाया, मार्केट बनाने का प्लान था, उसे भी बाद में रोक दिया गया। स्वास्थ्य सुविधाएं जीरो हैं। सड़कों की हालत खराब है। लोग शिकायत तो करते हैं, लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। यहां अब हालत यह है कि सीवर ब्लॉक हो गए हैं। हर ओर गंदगी है। स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं, पार्क में बड़ी-बड़ी घासें हैं। 
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सीवर का पानी ओवर फ्लो होकर सड़कों पर आ गया है। बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। पूरे इलाके में जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हैं। पार्क पूरी तरह से बदहाल स्थिति में हैं। कोई मेंटेनेंस नहीं है। यहां पार्क तो बना कर दिए, लेकिन न तो एक कुर्सी लगाई, न एक झूला और घासों की कटाई-छटाई के लिए तो कोई आया ही नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पुनर्वास कॉलोनी के पास ही हाउसिंग बोर्ड की एक सोसाइटी है, वहां किसी भी समस्या का तुरंत समाधान हो जाता है, लेकिन इन स्मॉल फ्लैट्स में उसी समस्या के निदान के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है।

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सीवर की समस्या सबसे बड़ी, टॉयलेट के रास्ते घर में घुस रहा पानी

सेक्टर-38 वेस्ट के स्मॉल फ्लैट्स में सबसे बड़ी समस्या सीवरेज की है। सीवर पूरी तरह से जाम हो गए हैं। सफाई नहीं होने की वजह से बिना बारिश के ही गटर ओवर फ्लो हो रहे हैं। हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। अब सीवरेज का पानी घर की टॉयलेट के रास्ते बाहर आने लगा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने सीवरेज की समस्या को लेकर कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। ऑनलाइन भी शिकायत दी जाती है, लेकिन बिना कुछ किए उस शिकायत पर ‘रिजॉल्व’ लिख दिया जाता है।

स्वच्छता का नारा सिर्फ वीआईपी सेक्टरों के लिए
स्थानीय लोगों ने कहा कि नगर निगम पूरे शहर में स्वच्छता अभियान चलाता है और जहां सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां कई दफा शिकायत करने के बाद जांच करने भी नहीं आते। यही अफसरों की कार्यप्रणाली है, जिसकी वजह से शहर की खूबसूरती खत्म होती जा रही है। इससे ऐसा लगता है कि स्वच्छता का नारा सिर्फ शहर के वीआईपी सेक्टरों के लिए है।

स्थानीय लोग ही पार्कों को बचाने में जुटे
निगम का सारा ध्यान सिर्फ कुछ सेक्टरों तक सीमित है। यहां सफाई व्यवस्था की स्थिति बदहाल है। अब बारिश का मौसम आ गया है, जगह-जगह जल भराव होता है, जिससे अन्य बीमारी बढ़ जाती हैं। लाखों रुपये पार्कों के रख रखाव के लिए पास किए गए। उसमें भी हमें ही पेड़ों को बचाने के लिए ईंटें लगानी पड़ रही हैं। -जीवा राज, महासचिव, आरसीडब्ल्यूए-38 वेस्ट

यहां सफाई न ही रखरखाव
दीवारों में पेड़ उग रहे हैं। जड़ पकड़ेगी तो दीवार कमजोर होगी। यहां सफाई कभी नहीं होती है। पार्क है लेकिन कोई देखने नहीं आता। साथ में एक और सोसाइटी है, वहां पर सबकुछ होता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। क्योंकि यह स्मॉल फ्लैट्स हैं, इसलिए भेदभाव होता है। - नीतिश कुमार, स्थानीय

घर से निकलने पर बदबू से होता है सामना

सबसे बड़ी समस्या सीवरेज की है। लोग गंदगी और बदबू में रहने को मजबूर है। घर से निकलते ही सबसे पहले सामना बदबू और गंदगी से होता है। हर बार शिकायत देते हैं, लेकिन सफाई करने के लिए कोई नहीं आता। रात के समय सिर्फ कुछ हिस्सों में स्ट्रीट लाइट जलती है, बाकी हर जगह अंधेरा रहता है। - सूरज कुमार, स्थानीय

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