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Chandigarh: चंडीगढ़ नगर निगम पर वित्तीय संकट की मार... 24 को प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की बैठक से आस

Mon, 21 Oct 2024 05:55 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 21 Oct 2024 05:55 AM IST
सार

चंडीगढ़ निगम को वर्तमान वित्त वर्ष के लिए 1110 करोड़ रुपयों की जरूरत है, लेकिन प्रशासन से मिले ग्रांट और खुद की कमाई से 910 करोड़ ही जुट पाएंगे। 200 करोड़ नहीं जुटाए गए तो कर्मियों को वेतन देने के भी निगम के पास पैसे नहीं बचेंगे।

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Chandigarh Municipal Corporation is facing financial crisis
चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल

विस्तार

पिछले काफी समय से चंडीगढ़ नगर निगम वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पैसे नहीं होने की वजह से विकास कार्य रुके हुए हैं। सिर्फ इमरजेंसी नेचर के कार्यों के टेंडर ही लग रहे हैं। अब पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने 24 अक्तूबर को बैठक बुलाई है।

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बैठक में नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर चर्चा होगी। इसमें प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के अलावा मेयर कुलदीप कुमार भी शामिल हो सकते हैं। नगर निगम ने अपने तमाम खर्चों और कमाई के स्रोत का लेखा-जोखा तैयार किया है, जो बैठक में प्रशासक के सामने रखा जाएगा। फंड की कमी के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी। 
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मेयर कुलदीप कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए निगम का कुल खर्च करीब 1110 करोड़ रुपये है लेकिन खुद की कमाई और प्रशासन से मिले ग्रांट से करीब 910 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सकेंगे। करीब 200 करोड़ का जरूरत है। अगर यह 200 करोड़ निगम को नहीं मिले तो कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो जाएगा। 
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उन्होंने कहा कि वह इस बैठक को लेकर काफी सकारात्मक हैं। उम्मीद है कि प्रशासक वित्तीय संकट का संज्ञान लेंगे और निगम को इससे बाहर निकालेंगे। बता दें कि वर्ष 2024-25 में प्रशासन ने निगम को कुल 560 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है। इसमें से 387 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

सड़कों की मरम्मत के लिए भी निगम के पास नहीं हैं पैसे

संयुक्त आयुक्त गुरिंदर सोढ़ी ने पिछली सदन की बैठक में बताया था कि निगम की हर महीने कमिटिड लायबिलिटी (प्रतिबद्ध देनदारियां) करीब 70 करोड़ रुपये की है। इसमें कर्मचारियों को वेतन, वेजेस, पेंशन व अन्य अनिवार्य बिलों का भुगतान आता है। वार्डों के विकास कार्यों पर किए जाने वाला खर्च अलग है। निगम की स्थिति इन दिनों ऐसी है कि उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली कई सड़कों की हालत खस्ता है, लेकिन पैसों की कमी की वजह से उन्हें बनवा नहीं पा रहा है। कुछ दिन पहले मेयर कुलदीप कुमार ने प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा से मुलाकात की थी और सड़कों की मरम्मत के लिए 54 करोड़ रुपये मांगे थे। निगम शहर की 2000 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग क्षेत्रों का रखरखाव करता है। इनमें से 270 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग स्थलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। इसके लिए करीब 54 करोड़ रुपये चाहिए।

प्रशासन से मांग रहे ऐसे विभाग, जिससे बढ़े राजस्व : मेयर

मेयर ने कुछ दिन पहले जब पहली बार प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से पंजाब राजभवन में मुलाकात की थी तो उन्होंने लिखित में करीब 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त ग्रांट की मांग की थी। कहा था कि निगम वित्तीय संकट में है, इसलिए कुछ ऐसे विभाग दिए जाए जिससे निगम का राजस्व बढ़ सके। 


कुलदीप कुमार ने बताया कि निगम के पास जितने भी विभाग हैं, वो लोगों को सेवाएं देने वाले विभाग हैं, जो नो प्रॉफिट-नो लॉस पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में नगर निगम को अतिरिक्त करीब 200 करोड़ रुपये के ग्रांट की जरूरत है क्योंकि एरियर, सैलरी और पेंशन आदि देने हैं। साथ ही ऐसे विभाग भी मांगे जिससे निगम का राजस्व बढ़ सके।

पानी के बिल, संपत्ति कर व अन्य से नगर निगम की कमाई (एक अप्रैल 2024 से सितंबर 2024)

महीना              राशि
अप्रैल            35 करोड़
मई               46 करोड़
जून              26 करोड़
जुलाई           21 करोड़
अगस्त          24 करोड़
सितंबर          15 करोड़ (23 सितंबर तक)
कुल 167 करोड़
(नोटः अप्रैल और मई महीने में संपत्ति कर जमा होते हैं। इसलिए इन दो महीनों में राजस्व ज्यादा आता है।)

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