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सदन की बैठक में बड़ा फैसला, घर बैठे मिलेगी नक्शे की मंजूरी और एनओसी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 16 May 2017 09:16 AM IST
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शहरवासियों को जल्द ही अपनी इमारत के निर्माण के नक्शे की मंजूरी और अन्य एनओसी घर बैठे ही मिल जाएगी। अगर किसी को तत्काल 24 घंटे के भीतर सुविधा चाहिए तो वह भी मिलेगी।
कमिश्नर ने बताया कि इस समय गांव का नक्शा और फायर समेत अन्य एनओसी निगम की ओर से दी जाती है। यह सुविधा जल्द ही ऑनलाइन मिलनी शुरू हो जाएगी। हैदराबाद का सिस्टम शहर में लागू होगा। इसके लिए प्रशासन पोर्टल बना रहा है क्योंकि अधिकतर प्रॉपर्टी के नक्शे और एनओसी की मंजूरी प्रशासन ही देता है उनके पास सिर्फ गांव की प्रॉपर्टी ही है। ऐसे में निगम भी उस पोर्टल का हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके तहत 20 वास्तुकार नियुक्त कर दिए जाएंगे, जिसके तहत ऑनलाइन धारक नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन कर देगा।
संतुष्टि के लिए भी आएगा फोन
सदन की बैठक में निर्णय लिया गया है कि हेल्पलाइन नंबर पर जब किसी की शिकायत आती है तो समस्या दूर होने के बाद उन्हें मैसेज के साथ-साथ अगले दिन संतुष्टि के लिए फोन होना चाहिए। पूर्व मेयर अरुण सूद ने बताया कि 90 प्रतिशत मामलों में यह देखा गया है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद समस्या दूर होने का मैसेज मोबाइल पर भेज दिया जाता है। जबकि समस्याएं उस समय तक दूर नहीं होती है। ऐसे में अलग से सेल बनाया जाए, जिसमें कर्मचारी शिकायतकर्ता को फोन करके उनकी संतुष्टि पूछे।
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कमिश्नर ने बताया कि इस समय गांव का नक्शा और फायर समेत अन्य एनओसी निगम की ओर से दी जाती है। यह सुविधा जल्द ही ऑनलाइन मिलनी शुरू हो जाएगी। हैदराबाद का सिस्टम शहर में लागू होगा। इसके लिए प्रशासन पोर्टल बना रहा है क्योंकि अधिकतर प्रॉपर्टी के नक्शे और एनओसी की मंजूरी प्रशासन ही देता है उनके पास सिर्फ गांव की प्रॉपर्टी ही है। ऐसे में निगम भी उस पोर्टल का हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके तहत 20 वास्तुकार नियुक्त कर दिए जाएंगे, जिसके तहत ऑनलाइन धारक नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन कर देगा।
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संतुष्टि के लिए भी आएगा फोन
सदन की बैठक में निर्णय लिया गया है कि हेल्पलाइन नंबर पर जब किसी की शिकायत आती है तो समस्या दूर होने के बाद उन्हें मैसेज के साथ-साथ अगले दिन संतुष्टि के लिए फोन होना चाहिए। पूर्व मेयर अरुण सूद ने बताया कि 90 प्रतिशत मामलों में यह देखा गया है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद समस्या दूर होने का मैसेज मोबाइल पर भेज दिया जाता है। जबकि समस्याएं उस समय तक दूर नहीं होती है। ऐसे में अलग से सेल बनाया जाए, जिसमें कर्मचारी शिकायतकर्ता को फोन करके उनकी संतुष्टि पूछे।
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अधिकारी नहीं लाए पानी की बोतल
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मुंबई, पुणे और विशाखापट्टम में बजट कई गुना, लेकिन यहां पैसा कहां से आएगा
कमिश्नर ने बैठक के अंत में कहा कि हम सभी अच्छी सुविधाएं शहर में लागू करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए पैसा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि पार्षद मुंबई, पुणे और विशाखापट्टम स्टडी टूर का दौरा करके आए, लेकिन वहां का बजट चंडीगढ़ निगम के मुकाबले में कई गुना है। ऐसे में चंडीगढ़ निगम कहां से पैसा लेकर आए। उन्होंने पार्षदों को शहर में नए टैक्स लगाने के लिए दबाव भी डाला लेकिन पार्षद फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हुए। पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि पहले लोगों को अच्छी सुविधा देनी चाहिए। उसके बाद टैक्स का रेट बढ़ाने की बात होनी चाहिए।
अधिकारी नहीं लाए पानी की बोतल
पिछले सदन की बैठक में पार्षदों और अधिकारियों को पानी की खाली स्टील की बोतलें एक कंपनी की ओर से दिलवाई गई थी, ताकि लोग अपने घर से पानी भरकर लाएं। पार्षद तो घर से स्टील की बोतलें भरकर लाए लेकिन अधिकतर अधिकारी बोतलें ही नहीं लाए। उन्होंने मिनरल वाटर ही पिया।
कमिश्नर ने बैठक के अंत में कहा कि हम सभी अच्छी सुविधाएं शहर में लागू करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए पैसा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि पार्षद मुंबई, पुणे और विशाखापट्टम स्टडी टूर का दौरा करके आए, लेकिन वहां का बजट चंडीगढ़ निगम के मुकाबले में कई गुना है। ऐसे में चंडीगढ़ निगम कहां से पैसा लेकर आए। उन्होंने पार्षदों को शहर में नए टैक्स लगाने के लिए दबाव भी डाला लेकिन पार्षद फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हुए। पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि पहले लोगों को अच्छी सुविधा देनी चाहिए। उसके बाद टैक्स का रेट बढ़ाने की बात होनी चाहिए।
अधिकारी नहीं लाए पानी की बोतल
पिछले सदन की बैठक में पार्षदों और अधिकारियों को पानी की खाली स्टील की बोतलें एक कंपनी की ओर से दिलवाई गई थी, ताकि लोग अपने घर से पानी भरकर लाएं। पार्षद तो घर से स्टील की बोतलें भरकर लाए लेकिन अधिकतर अधिकारी बोतलें ही नहीं लाए। उन्होंने मिनरल वाटर ही पिया।