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हार से सकते में कांग्रेस, बंसल को बहुत भारी पड़ी ये गलती!

Wed, 21 Dec 2016 10:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 Dec 2016 10:38 AM IST
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chandigarh municipal corporation elections, congress big loss
हार से सकते में कांग्रेस
नगर निगम चुनावों में मिले भाजपा को भारी बहुमत से कांग्रेस सकते है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा को अपनी पार्टी के भीतर ही पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के गुट से पंगा लेना महंगा पड़ा। 
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मनीष तिवारी गुट के एक भी नेता को टिकट नहीं दी गई जिसका खामियाजा भी कांग्रेस को भुगतना पड़ा। पूर्व पार्षद चंद्रमुखी शर्मा के भाई सूरजमुखी शर्मा ने वार्ड नंबर-1 से निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा जिसका खामियाजा यह हुआ कि इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार एचएस लक्की चुनाव हार गए। सूरजमुखी शर्मा को करीब एक हजार वोट मिले है यह वोट कांग्रेस के ही थे जो अगर अगर शर्मा न खड़े होते तो इसका फायदा कांग्रेस को मिलता। तिवारी गुट कांग्रेस की हार का ठिकरा पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल पर फोड़ा है।
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कांग्रेस को नोटबंदी के मुद्दे से काफी आस थी लेकिन इसका कोई फायदा पार्टी को नहीं मिला। कांग्रेस की बुरी तरह से हार का कारण सगठन के कमजोर होने को बताया जा रहा है। 
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पैतृक सीटें भी कांग्रेस ने गवाईं

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Chandigarh Congress
कांग्रेस के निचले स्तर पर सगठन कमजोर है जबकि इसके मुकाबले में भाजपा का सगठन मजबूत है। भाजपा के मंडल और जिला ईकाईयां मजबूत है जबकि कांग्रेस में कई जगह ऐसे है जहां पर उनके ब्लाक ईकाईयां भी नहीं है हालाकि छाबड़ा ने दो साल में सगठन को मजबूत करने का काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की पत्नी के चुनाव हार जाने से ज्यादा किरकिरी हो रही है।

राशनबंदी का भी कोई असर नहीं रहा 
कांग्रेस को कालोनी की सीटों से जीत मिलने की उम्मीद थी। कांग्रेस नेताओं को लगता था कि कालोनियों में राशनबंदी का भी असर भाजपा पर पड़ेगा। भाजपा के नेता भी ऐसा मान रहे थे कि उन्हें नुकसान होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धनास की सीट छोड़कर बाकी सभी कालोनी की सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। डडूमाजरा, मलोया, पलसौरा की सीट पर पिछले 15 साल से कांग्रेस का कब्जा था लेकिन इन पैतृक सीटों को भाजपा ने छीन लिया है।

जबकि वार्ड नंबर-15 में पहली बार कांग्रेस ने 20 साल में जीत दर्ज की है। वार्ड नंबर-9 में भी लगातार तीसरी बार कांग्रेस जीती है। वार्ड नंबर-3 पर 15 साल से कांग्रेस का कब्जा था जो कि भाजपा ने छीन ली है। जबकि वार्ड नंबर-12 की सीट भी भाजपा ने छीन ली है। 
 
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