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मास्टर प्लानः भविष्य का चंडीगढ़ कुछ खट्टा-कुछ मीठा
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Apr 2015 09:35 AM IST
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लीजिए वर्ष-2031 तक चंडीगढ़ की जरूरतों का मास्टर प्लान तैयार है। बाबुओं द्वारा तैयार इस प्लान के लिए पब्लिक और व्यवसायियों से सुझाव तो मांगे गए मगर उन पर ध्यान नहीं दिया गया। मास्टर प्लान में कई बातें बहुत अटपटी हैं। खासकर व्यवसायियों और व्यापारियों के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
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मास्टर प्लान में एक निष्कर्ष यह है कि सेक्टर-7 से 42 में जितनी कमर्शियल साइट्स बनी हैं, वे सेक्टरों की वर्ष 2031 तक की जरूरतों से कहीं ज्यादा हैं। इनमें चार सेक्टर अपवाद हैं। यह निष्कर्ष इस आधार पर निकाला गया है कि 200 व्यक्तियों पर एक कमर्शियल साइट पर्याप्त है। इसी आधार पर यह सिफारिश भी की गई है कि अगले 15 साल में इन सेक्टरों में नई दुकानों, शोरूम, बूथ की जरूरत नहीं है जो हैं वे जरूरत से कहीं ज्यादा हैं।
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चार सेक्टरों में जरूरत से कमः
नए मास्टरप्लान के मुताबिक सेक्टर-10, 21, 29 और 30 में जरूरत से कम कमर्शियल साइट्स हैं। मगर साथ ही कहा गया है कि यहां नई साइट्स बनाने की जरूरत नहीं है।
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विकास मार्ग पर होगा विकास
मास्टर प्लान के अनुसार सेक्टर-43 से 47 तक विकास मार्ग पर स्थित सेक्टरों में कमर्शियल एरिया बढ़ाया जाएगा सेक्टर-48 से 56, 61 से 63 में नेहबरहुड दुकानें बनाई जाएंगी। फिलहाल इन सेक्टरों में कमर्शियल एरिया नहीं है और लोग खरीददारी के लिए अन्य सेक्टरों या मोहाली जाते हैं। सेक्टर-43 से 52 तक नई आटो मार्केट बनाने का प्रावाधान रखा गया है।
अंडरपास से जुड़ेंगी दो मार्केट
नेबरहुड कांसेप्ट के तहत आमने-सामने के सेक्टरों की मार्केट वी-3 रोड पर अंडरपास बनाकर लिंक की जाएंगी। इससे ग्राहक पैदल ही एक से दूसरे सेक्टर की मार्केट में आ जा सकेंगे। इस समय ऐसा ही अंडर पास सेक्टर-17 बस स्टैंड और सेक्टर-22 के बीच है।
कन्वीनेंट शॉप्स
फेज दो और तीन में बने सेक्टरों में 10 से 15 कन्वीनेंट शॉप्स का कलस्टर होगा। यह बूथ से भी छोटी होंगी। संभवत: यह खोखा मार्केट जैसी हो सकती हैं। हालांकि प्लान में सिर्फ यही कहा गया है कि कमर्शियल साइट्स की हायारिकी में ये सबसे निचले क्रम पर होंगी।
दो वेयर हाउस
प्लान के अनुसार शहर में पहली बार दो वेयर हाउस का निर्माण किया जाएगा। पहला वेयरहाउस सेक्टर-38 वेस्ट और दूसरा औद्योगिक क्षेत्र के फेज-3 में बनाया जाएगा। इसके अलावा सेक्टर-56 में मार्डन टर्मिनल मार्केट बनेगी।
नई कमर्शियल बेल्ट
मास्टर प्लान में मनीमाजरा के लिए वर्ष 1990 के प्रस्तावों को वर्ष 2031 के लिए रख लिया गया है। इसके तहत पॉकेट नंबर 2 से छह तक कमर्शियल बेल्ट बनेंगी।
किताबी निष्कर्ष और हकीकत में फर्क
मास्टर प्लान के प्रस्तावों और निष्कर्षों से व्यापारी वर्ग खुश नहीं है। जो निष्कर्ष निकाले गए हैं, उनमें जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। सेक्टर-19 और 22 के उद्हारण से इसे समझ सकते हैं। यहां कमर्शियल साइट्स की संख्या का आकलन वर्ष 2031 तक सेक्टर की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर किया गया है।
मास्टर प्लान के अनुसार सेक्टर-19 की जरूरत के लिए 173 कमर्शियल साइट काफी हैं। मगर यहां 114 एससीएफ, 74 बूथ, एक कोयला डिपो और 564 साइट्स रेहड़ी मार्केट हैं। इस तरह कुल 754 कमर्शियल साइट्स है, जिन्हें मास्टर प्लान में जरूरत से चार गुना ज्यादा बताया गया है।
यह बताते वक्त यहां की रेहड़ी मार्केट में ग्राहकों की भीड़ और अन्य सेक्टरों से आने वालों की संख्या को ध्यान में नहीं रखा गया। इसी तरह सेक्टर-22 में 671 साइट्स हैं और मास्टर प्लान के अनुसार यहां की जरूरत के हिसाब से 299 साइट्स काफी हैं।
200 लोगों पर एक दुकान का मानक ही गड़बड़ है। दस घंटे में इतने ग्राहक का मतलब हर ग्राहक को तीन मिनट। जाहिर है कमर्शियल साइट्स की संख्या सरप्लस बताना अव्यवहारिक है। यह मानक सौ लोगों का होना चाहिए था। कमर्शियल एरिया बढ़ाने से कई तरह की दिक्कतें दूर होंगी। नए बाजार बनेंगे तो पार्किंग की दिक्कत भी कम होगी।
-राजन महाजन, व्यापारी सेक्टर-24, सह सचिव, व्यापार मंडल
कमर्शियल एरिया में एफआर बढ़ाने और ऊपरी मंजिलों पर निर्माण को मंजूरी दी जानी चाहिए थी, मास्टर प्लान में व्यापारियों के इन सुझावों की पूरी तरह अनदेखी की गई। सुझाव मांगे गए मगर उनकी अनदेखी की गई। मास्टर प्लान शहर के लोगों की जरूरतों के लिए था मगर अधिकारियों ने इस तथ्य की अनदेखी की।
-चरंजीव सिंह, अध्यक्ष, व्यापार मंडल
सेक्टर-7 से 42 तक अगर नई दुकानें प्रशासन नहीं बनाना चाहता तो पहले से बनी दुकानों में ही जरूरत के बदलावों को मंजूरी दे दी जाए। बूथों पर भी एक और मंजिल बनाने की इजाजत दी जानी चाहिए।
-बलदेव गोयल, अध्यक्ष, बिजनेस काउंसिल
दो नए वेयर हाउस का निर्माण का प्रस्ताव काफी अच्छा है मगर व्यापारियों को जरूरत के अनुसार बदलाव करने की इजाजत नहीं दी गई। प्रशासन हमारी जरूरतों को वायलेशन कहता है और जुर्माना लगाता है। इस मानसिकता को छोड़कर मास्टर प्लान बनाना चाहिए था। यह शहर के लोगों की जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए था।
-जगदीश कपूर, सलाहकार, व्यापार मंडल