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मास्टर प्लान: ग्रीन बेल्ट होगी तो कहां रहेंगे हम
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 09:46 AM IST
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ड्राफ्ट मास्टर प्लान सिटी के लोगों के लिए अड़चन बन गया है। किसी को ग्रीन बेल्ट पर आपत्ति है तो किसी को कामर्शियल बेल्ट पर।
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यूटी गेस्ट हाउस में ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2013 को लेकर पर्सनल हियरिंग में 32 लोगों को बुलाया गया था। सुबह के सत्र में नौ और शाम के सत्र में 13 लोग ही आए।
सोमवार को पेरीफेरी और चंडीगढ़ के गांवों के लोगों की सुनवाई की गई। बोर्ड ऑफ इंक्वायरी हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन सत्यगोपाल है।
इसमें चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर, आईटी सचिव प्रेरणा पुरी, चीफ इंजीनियर एसके चड्ढा, एक्स मेयर रविंदरपाल सिंह पाली और नगर निगम के कमिश्नर विजय प्रताप सिंह भी शामिल हैं।
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सोमवार को यहां खुड्डा अली शेर, मलोया, कैंबवाला और कजेहड़ी के लोग पहुंचे।
कजहेड़ी में कॉमर्शियल बेल्ट बनी परेशानी
आनंदपुर कांप्लेक्स वेलफेयर सोसायटी कजेहड़ी के सदस्यों ने बस स्टैंड के सामने विकसित की जा रही कॉमर्शियल बेल्ट पर आपत्ति जताई है।
सोसायटी के प्रधान नसीब सिंह सेवक ने प्रशासन की इस समिति से कहा कि यहां ग्रामीण करीब बाइस साल से हैं। मास्टर प्लान में बस स्टैंड के सामने कॉमर्शियल बेल्ट हैं।
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अगर बेल्ट तैयार की जाती है तो कजेहड़ी के कुछ घर उनके बीच में आ जाएंगे। मास्टर प्लान में सड़क से करीब तीन सौ फीट की आवश्यकता प्रशासन को है।
जनरल सेक्रेटरी आनंदपुर कांप्लेक्स वेलफेयर सोसायटी सतिंदर पाल ने हरेक जगह पर माप करने के बाद ही प्लान की तैयारी करने का सुझाव दिया।
पाल के अनुसार प्रशासन ने आश्वासन दिया गया है कि मंगलवार को कॉमर्शियल बेल्ट की जगह और रेजिडेंशियल इलाके की माप की जाएगा।
उसके बाद यदि कोई घर तीन सौ फीट के बीच में आता है तो उसका नंबर दे दिया जाएगा।
निवासियों के लिए परेशानी
दीप कांप्लेक्स हल्लो माजरा के सुखदेव सिंह ने बताया कि हल्लो माजरा गांव में एक हजार से ज्यादा घर बसे हुए हैं। प्रशासन के मास्टर प्लान में इसको ग्रीन बेल्ट बताया है।
ऐसी स्थिति में ग्रीन बेल्ट होने से सारे निवासियों के लिए परेशानी हो जाएगी। यदि यह उनको हटा देंगे तो ग्रामीण कहां बसेंगे? हल्लोमाजरा के बीएस रावत ने भी यही आपत्ति रखी।
हमको भी दीजिए तीन मंजिला
मलोया वेलफेयर सोसायटी धनास के प्रधान कुमेर चंद, ज्वाइंट सेक्रेटरी एचआर गुप्ता और सचिव गौतम दीवान ने कहा कि मिल्क कॉलोनी धनास को रेजिडेंशियल एरिया में घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद फ्री होल्ड भी लागू कर दिया गया। अब जो नीतियां धनास में लागू होती हैं वहीं यहां भी लागू होंगी। ऐसी स्थित में तीन मंजिल बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए।