खेल दिवस: राष्ट्रीय खेल समारोह में छाया चंडीगढ़... माका ट्रॉफी समेत मिले पांच अवार्ड
राष्ट्रीय खेल समारोह में शनिवार को चंडीगढ़ के खिलाड़ी छाए रहे। माका ट्राफी समेत पांच अवार्ड चंडीगढ़ की झोली में आए। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर हर साल मनाया जाने वाला खेल समारोह इस बार कोरोना की वजह से फीका रहा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्चुअल माध्यम से सभी खिलाड़ियों को खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया।
उत्तर भारत के खिलाड़ियों को चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में अवार्ड दिए गए। चंडीगढ़ के फुटबॉलर संदेश झिंगन को अर्जुन अवार्ड, मुक्केबाजी के कोच शिव सिंह को द्रोणाचार्य अवार्ड से नवाजा गया। वहीं, पंजाब, हरियाणा और जम्मू कश्मीर के खिलाड़ियों और कोचों को भी खेल पुरस्कार दिए गए।
चंडीगढ़ के दो खिलाड़ी शहर से बाहर हैं, इसलिए उन्होंने हैदराबाद ओर पुणे में अपना पुरस्कार प्राप्त किया। ओलंपियन मंजीत सिंह आर्मी में सूबेदार हैं, इसलिए उन्होंने हैदराबाद में आयोजित आनलाइन समारोह में ध्यानचंद अवार्ड लिया, जबकि मुक्केबाज मनीष कौशिक ने पुणे में ऑनलाइन समारोह के माध्यम से अर्जुन अवार्ड प्राप्त किया।
पीयू को लगातार दूसरी बार माका ट्राफी अवार्ड
पंजाब यूनिवर्सिटी को लगातार दूसरी बार मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ट्राफी (माका ट्राफी) मिलने पर समानित किया गया। इस मौके पर पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर राजकुमार ने इस खास उपलब्धि का श्रेय पीयू के विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने कहा कि उनके विद्यार्थियों ने दिखा दिया कि खेलों में उनका कोई सानी नहीं है।
आने वाले वक्त पर विद्यार्थियों को और अधिक सुविधाएं मुहैया करवाने का प्रयास करेंगे। पुरस्कार मिलने के बाद वाइस चांसलर राजकुमार पीयू के डायरेक्टर स्पोर्ट्स के ऑफिस पहुंचे, वहां सेरेमनी का सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था। वहां पहुंचकर राजकुमार ने माका ट्राफी मिलने पर सबका धन्यवाद किया।
असम की रहने वाली लवलीना पटियाला में ले रही हैं ट्रेनिंग
महिला मुक्केबाज लवलीना कोरोना की वजह से पीपीई किट पहनकर पुरस्कार लेने चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय पहुंचीं। अर्जुन अवार्ड लेने के बाद वह बिना किसी से बात किए तुरंत गाड़ी में बैठकर निकल गईं। मूलरूप से असम की रहने वालीं लवलीना इस समय पटियाला में ट्रेनिंग ले रही हैं। किक बॉक्सिंग से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद वह मुक्केबाजी के खेल से जुड़ गई थीं। रूस में साल 2019 में उन्होंने वर्ल्ड मुक्केबाजी चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता व साल 2020 में ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली असम की पहली मुक्केबाज हैं।
रेड कोट डालने का ख्वाब पूरा हुआ: संदेश झिंगन
अर्जुन अवार्ड पाने वाले चंडीगढ़ के फुटबॉलर संदेश झिंगन देश के 27वें फटबॉल खिलाड़ी हैं, जिन्हें यह अवार्ड मिला है। समारोह के बाद झिंगन ने बताया कि जब वह 17 साल के थे तो सुनील क्षेत्री को साल 2011 में राष्ट्रपति भवन में रेडकोट में अर्जुन अवार्ड लेते देखा था। उसी दिन ठान लिया था कि एक दिन वे भी रेडकोट पहनकर अवार्ड लेंगे और वह सपना पूरा हो गया है।
संदेश एक प्रोफेशनल फुटबाल खिलाड़ी हैं। सिटी के सेट स्टीफंस स्कूल की फुटबॉल अकादमी से खेलना शुरू किया था और फिर भारतीय टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे। साल 2014 में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की ओर से युवा प्रतिभाशाली फुटबॉल प्लेयर ऑफ द इयर अवार्ड से नवाजा गया। साल 2015 में भारतीय फुटबॉल टीम में जगह बनाई।
सरकार को युवाओं के लिए रास्तें खोलने होंगे : कुलदीप सिंह
एथलेटिक्स में ध्यानचंद अवार्ड विजेता कुलदीप सिंह भुल्लर ने कहा कि पंजाब में नौकरी न होने के कारण युवा नशे की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार को युवाओं और खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। कुलदीप सिंह ने एशियन गेम्स 1982 में रजत पदक हासिल किया था जबकि एटीएफ जकार्ता में 1985 में कांस्य पदक जीता था।
हॉकी मेरे खून में है: अजीत सिंह
हॉकी मेरे खून में है। यह कहना पूर्व हॉकी खिलाड़ी अजीत सिंह का। उन्हें ध्यानचंद अवार्ड देकर सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा गगनजीत सिंह व भाई भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत की महिला व पुरुष टीमें लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
अवार्ड समारोह में पत्नी के साथ पहुंचे पूर्व कबड्डी चीफ कोच
भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कोच कृष्ण कुमार हुड्डा को द्रोणाचार्य अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। वह भारतीय टीम के 1999 से 2010 तक इंडिया टीम के चीफ कोच रहे हैं। इस दौरान टीम कई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने में कामयाब रही। टीम ने सेफ गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके साथ ही एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। अवार्ड सेरेमनी में वह अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे।
पहले देश सेवा की, अब बैंक खिलाड़ियों को दे रहे कोचिंग
द्रोणाचार्य अवार्ड पाने वाले हाकी कोच रोमेश पठानिया ने बताया कि वह 12 साल तक इंडिया सब-जूनियर टीम के कोच रहे हैं लेकिन इन दिनों पंजाब नेशनल बैंक दिल्ली में बैंक के खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं। सब-जूनियर वर्ग में इंडिया टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। 2003 में सब-जूनियर टीम ने एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक व साल 2013 में जूनियर टीम पदक जीतने में सफल रही है।
चंडीगढ़ के शिव सिंह की मेहनत का मिला फल
इंडिया टीम के मुक्केबाजी के पूर्व चीफ कोच शिव सिंह ने बताया कि यह अवार्ड उनकी मेहनत का फल है। साल 2018 में वर्ल्ड चैंपियनशिप का आयोजन दिल्ली में हुआ था, जिसमें मैरी कॉम ने खिताब जीता था। उस समय भी वह टीम के हेड कोच थे। शिव सिंह ने कहा कि मुक्केबाजी में टैलेंट की कमी नहीं है। युवा इस खेल में अधिक से अधिक आ रहे हैं। मनीष कौशिक की तारीफ करते हुए शिव सिंह ने कहा वह एक बेहतरीन मुक्केबाज के तौर पर उभरे हैं।
चंडीगढ़ के मंजीत ने हैदराबाद में लिया ध्यानचंद अवार्ड
चंडीगढ़ के रोवर मंजीत सिंह हैदराबाद में सूबेदार हैं। उन्होंने हैदराबाद में आयोजित ऑनलाइन सेरेमनी में ध्यानचंद अवार्ड लिया। अवार्ड मिलने पर चंडीगढ़ रोइंग एसोसिशन के अधिकारियों ने मंजीत सिंह को बधाई दी। एसोसिएशन के प्रधान अनमोल रतन सिद्धू, उपप्रधान डीपी सिंह, मानद सचिव राजीव शर्मा ने मंजीत सिंह को रोइंग का बेहतरीन खिलाड़ी बताया।
रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रधान राज लक्ष्मी सिंह ने भी मंजीत को बधाई देते हुए कहा कि यह रोइंग फेडरेशन के लिए गर्व की बात है। मंजीत सिंह ने साल 2005 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप में पांचवां स्थान, साल 2006 में रजत पदक, साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक, एशियन गेम्स 2010 में रजत पदक, साल 2015 नेशनल गेम्स में एक स्वर्ण व दो रजत पदक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया था।
ओलंपिक में स्थान पक्का करने वाले देश के नौवें मुक्केबाज
चंडीगढ़ एसडी कॉलेज के छात्र रहे मुक्केबाज मनीष कौशिक इस समय पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने पुणे में अर्जुन अवार्ड हासिल किया। वह भिवानी के देवसर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2015-16 में एसडी कॉलेज सेक्टर- 32 में बीए में एडमिशन हासिल किया था।
अगले साल जब वे बीए द्वितीय वर्ष में थे तो उन्हें फौज में नौकरी मिल गई थी। मनीष ने साल 2020 में होने वाले ओलंपिक में अपना स्थान पक्का किया था। उन्होंने पिछले साल 63 किलो भार वर्ग में ऑस्ट्रेलिया के मुक्केबाज हैरिसन गरसिडे को हराकर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग किया था। ओलंपिक में अपनी जगह पक्की करने वाले नौवें भारतीय मुक्केबाज बने थे।