{"_id":"65435d6bbe9aa24a4d05860e","slug":"chandigarh-is-at-30th-place-in-country-in-road-accidents-according-to-center-government-report-2023-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: चंडीगढ़ में बढ़ रहे हादसे, केंद्र की रिपोर्ट में दावा-सिटी ब्यूटीफुल देश में 30वें स्थान पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: चंडीगढ़ में बढ़ रहे हादसे, केंद्र की रिपोर्ट में दावा-सिटी ब्यूटीफुल देश में 30वें स्थान पर
Thu, 02 Nov 2023 02:46 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 02 Nov 2023 02:46 PM IST
सार
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सड़क हादसों में 42.9 प्रतिशत हादसे मोटरसाइकिल से जुड़े हैं। वहीं, पैदल लोगों से जुड़े हादसों का प्रतिशत 19.6 प्रतिशत रहा। इनके अलावा कार, वैन, जीप आदि का प्रतिशत 16.6 प्रतिशत जबकि ऑटो रिक्शा से जुड़े हादसे 5.6 प्रतिशत रहे।
विज्ञापन
डेमो इमेज
विस्तार
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क हादसों को लेकर साल 2022 की एक रिपोर्ट सार्वजनिक की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसों में चंडीगढ़ देशभर में 30वें स्थान पर है, जबकि साल 2021 में सिटी ब्यूटीफुल 31वें स्थान पर रहा था। चंडीगढ़ में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
दूसरी ओर, राहत की बात बस इतनी है कि साल 2021 के मुकाबले 2022 हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो शहर में पिछले वर्षों की अपेक्षा हादसों में 13.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साल 2021 में 208 हादसे हुए थे, जबकि साल 2022 में हादसों की संख्या 237 थी। साल 2020 में शहर के थानों में कुल 159 हादसे दर्ज किए गए थे।
यह भी पढ़ें: पंजाब में भीषण हादसा: ट्रक और तेल कैंटर के बीच पिसी कार, एक बच्चे समेत छह की मौके पर मौत
विज्ञापन
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी आई। वर्ष 2021 में 96 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2022 में यह संख्या 83 थी। वहीं, 2020 में सड़क हादसों में 53 लोगों की जान गई थी। जम्मू-कश्मीर में साल 2022 में सबसे ज्यादा 6,092 हादसे हुए। इसके बाद दिल्ली का नंबर है, जहां 5,652 हादसे हुए। वहीं, पुडुचेरी में 1,181 हादसे हुए, जबकि लद्दाख में 374 हादसे हुए थे। देशभर में हादसों में केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा मात्र 1.5 प्रतिशत है। दिल्ली में वर्ष 2022 में सबसे ज्यादा 1,461 लोगों की जान चली गई, जबकि चंडीगढ़ में साल 2021 में जहां 172 लोग हादसों में घायल हुए, वहीं 2022 में 203 लोग घायल हुए थे।
यह भी पढ़ें: Punjab: एक दिन में 1921 जगह जली पराली, टूटा दो साल का रिकॉर्ड, पंजाब के कई शहरों का एक्यूआई खराब श्रेणी में
दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसे सबसे अधिक
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सड़क हादसों में 42.9 प्रतिशत हादसे मोटरसाइकिल से जुड़े हैं। वहीं, पैदल लोगों से जुड़े हादसों का प्रतिशत 19.6 प्रतिशत रहा। इनके अलावा कार, वैन, जीप आदि का प्रतिशत 16.6 प्रतिशत जबकि ऑटो रिक्शा से जुड़े हादसे 5.6 प्रतिशत रहे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि तेजगति से वाहन चलाना यातायात नियमों का बड़ा उल्लंघन है, जो हादसों का कारण भी बन रहा है। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में पिछले वर्ष तेज रफ्तार के चलते 51,864 हादसे हुए थे। इनमें 11,190 लोगों की जान चली गई और 45,776 लोगों को चोटें आईं हैं।
सड़कों के गड्ढे और निर्माण कार्य हादसों की वजह
रिपोर्ट के मुताबिक जिन सड़कों पर गड्ढे और निर्माण या मरम्मत कार्य के चलते पैदा होने वाली कुछ अनियमितताएं भी हादसों का कारण बनती हैं। दस लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में सड़क एवं पुल निर्माण/मरम्मत 4.4 प्रतिशत सड़क हादसों का कारण बने हैं। वहीं ये 6.8 प्रतिशत मौतों और 4 प्रतिशत चोटों का कारण भी बने हैं। वर्ष 2022 में सड़कों के गड्ढे 0.8 प्रतिशत हादसों, 1.2 प्रतिशत मौतों और 0.7 प्रतिशत चोटों का कारण बने हैं।
विज्ञापन
दूसरी ओर, राहत की बात बस इतनी है कि साल 2021 के मुकाबले 2022 हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो शहर में पिछले वर्षों की अपेक्षा हादसों में 13.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साल 2021 में 208 हादसे हुए थे, जबकि साल 2022 में हादसों की संख्या 237 थी। साल 2020 में शहर के थानों में कुल 159 हादसे दर्ज किए गए थे।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: पंजाब में भीषण हादसा: ट्रक और तेल कैंटर के बीच पिसी कार, एक बच्चे समेत छह की मौके पर मौत
विज्ञापन
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी आई। वर्ष 2021 में 96 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2022 में यह संख्या 83 थी। वहीं, 2020 में सड़क हादसों में 53 लोगों की जान गई थी। जम्मू-कश्मीर में साल 2022 में सबसे ज्यादा 6,092 हादसे हुए। इसके बाद दिल्ली का नंबर है, जहां 5,652 हादसे हुए। वहीं, पुडुचेरी में 1,181 हादसे हुए, जबकि लद्दाख में 374 हादसे हुए थे। देशभर में हादसों में केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा मात्र 1.5 प्रतिशत है। दिल्ली में वर्ष 2022 में सबसे ज्यादा 1,461 लोगों की जान चली गई, जबकि चंडीगढ़ में साल 2021 में जहां 172 लोग हादसों में घायल हुए, वहीं 2022 में 203 लोग घायल हुए थे।
यह भी पढ़ें: Punjab: एक दिन में 1921 जगह जली पराली, टूटा दो साल का रिकॉर्ड, पंजाब के कई शहरों का एक्यूआई खराब श्रेणी में
दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसे सबसे अधिक
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सड़क हादसों में 42.9 प्रतिशत हादसे मोटरसाइकिल से जुड़े हैं। वहीं, पैदल लोगों से जुड़े हादसों का प्रतिशत 19.6 प्रतिशत रहा। इनके अलावा कार, वैन, जीप आदि का प्रतिशत 16.6 प्रतिशत जबकि ऑटो रिक्शा से जुड़े हादसे 5.6 प्रतिशत रहे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि तेजगति से वाहन चलाना यातायात नियमों का बड़ा उल्लंघन है, जो हादसों का कारण भी बन रहा है। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में पिछले वर्ष तेज रफ्तार के चलते 51,864 हादसे हुए थे। इनमें 11,190 लोगों की जान चली गई और 45,776 लोगों को चोटें आईं हैं।
सड़कों के गड्ढे और निर्माण कार्य हादसों की वजह
रिपोर्ट के मुताबिक जिन सड़कों पर गड्ढे और निर्माण या मरम्मत कार्य के चलते पैदा होने वाली कुछ अनियमितताएं भी हादसों का कारण बनती हैं। दस लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में सड़क एवं पुल निर्माण/मरम्मत 4.4 प्रतिशत सड़क हादसों का कारण बने हैं। वहीं ये 6.8 प्रतिशत मौतों और 4 प्रतिशत चोटों का कारण भी बने हैं। वर्ष 2022 में सड़कों के गड्ढे 0.8 प्रतिशत हादसों, 1.2 प्रतिशत मौतों और 0.7 प्रतिशत चोटों का कारण बने हैं।