चंडीगढ़ में ब्लैक आउट: 30 साल बाद एस्मा लागू, बिजली कर्मचारी अब छह माह नहीं कर सकते हड़ताल, उल्लंघन पर होगी गिरफ्तारी
एस्मा भारतीय संसद से पारित एक कानून है, जिसे 1968 में लागू किया गया था। केंद्र सरकार अथवा कोई भी राज्य सरकार इस कानून को अधिकतम छह महीने के लिए लगा सकती है। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध एवं दंडनीय है। इस आदेश से संबंधित किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को जबरन खत्म कराने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगा दिया है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आदेश में लिखा कि जनहित में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।
उधर, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की जानकारी होते हुए भी वैकल्पिक व्यवस्था करने में नाकाम रहा चंडीगढ़ प्रशासन मंगलवार देर शाम हरकत में आया। इसकी वजह भी हाईकोर्ट का हड़ताल को लेकर लिया गया स्वत: संज्ञान रहा। प्रशासन ने पूर्वी पंजाब के आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) 1968 के उप धारा-3 के तहत इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग के कर्मचारियों के अगले छह माह तक हड़ताल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
प्रशासन के गृह विभाग की ओर से सलाहकार धर्मपाल ने देर शाम एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि बिजली विभाग की हड़ताल से वितरण, हस्तांतरण (ट्रांसमिशन), संचालन और रखरखाव पर असर पड़ा है। बिजली एक अनिवार्य सेवा है, लिहाजा लोगों को इससे परेशानियां झेलनी पड़ी हैं, इसलिए हड़ताल पर रोक जरूरी है और ये जनहित में है। अगले छह माह तक बिजली विभाग के कर्मचारी कोई हड़ताल नहीं कर सकते।
प्रशासन पहले भी लगा चुका है एस्मा
चंडीगढ़ प्रशासन पहले भी प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर एस्मा लगा चुका है। 15 सितंबर 1987 और 23 सितंबर 1992 को प्रशासन ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाया था। 1992 में फेडरेशन ऑफ यूटी इंप्लाइज एंड वर्कर्स की ओर से डेली वेज कर्मचारियों को नियमित करने के लिए प्रदर्शन किया गया था। इससे पूरे शहर में जलापूर्ति बंद हो गई थी।
एक दिन की हड़ताल थी। उस समय करीब तीन सौ कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जलापूर्ति बहाल करने के लिए सेना को बुलाया गया था लेकिन जब सेना से भी जलापूर्ति ठीक से नहीं हो सकी, तब कर्मचारियों के जेल से छोड़ा गया। कोर्ट में कई वर्षों तक केस चला, जिसके बाद सभी कर्मचारी बरी हो गए थे।
1992 में 280 डेली वेज कर्मचारियों को किया गया था बर्खास्त
कोआर्डिनेशन कमेटी के महासचिव राकेश कुमार ने बताया कि कोआर्डिनेशन कमेटी की अगुवाई में वर्ष 1992 में 23 सितंबर को पब्लिक हेल्थ के कर्मचारियों ने डेली वेज कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर हड़ताल की थी। उस दौरान 280 डेली वेज कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था, जबकि 11 नियमित कर्मचारियों (जो नेता थे) को टर्मिनेट कर दिया गया था। इसकी अगुवाई कोआर्डिनेशन कमेटी के तत्कालीन संयोजक रमेश कांत ने की थी। उस वक्त राकेश कुमार कोआर्डिनेशन कमेटी के सह संयोजक थे।
राजनीति के चक्कर में लोगों की परेशानियां भूलीं पार्टियां
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी बिजली निजीकरण का विरोध कर कर्मचारियों का साथ देने का ढोंग रच रही हैं। कांग्रेस शासित मुंबई ने बिजली का निजीकरण कर दिया है और आप शासित दिल्ली में भी बिजली का निजीकरण किया गया है। दोनों पार्टियों ने 72 घंटे के लिए बिजली आपूर्ति के ब्रेकडाउन का समर्थन कर लोगों को परेशानी में डाला है। - अरुण सूद, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
प्रशासन को कर्मचारियों ने लगभग एक सप्ताह पहले हड़ताल की सूचना दे दी थी। प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों को समस्या हुई। अधिकारियों को अपनी तैयारी रखनी चाहिए थी। अब अपनी नाकामी को कर्मचारियों के ऊपर डालने की प्रयास किया जा रहा है। - प्रेम गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष, आप
प्रशासन के अधिकारियों को अपनी रणनीति बनानी चाहिए थी। पहले कर्मचारियों के साथ धोखा किया गया, अब जब अपनी लापरवाही से लोगों को समस्या हुई तो उसकी जिम्मेदारी भी लोगों को पर डाली जा रही है। एस्मा लगाने से विरोध खत्म नहीं होगा, हम कर्मचारियों के साथ हैं। - सुभाष चावला, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
प्रशासन को हड़ताली कर्मचारियों से बात करनी चाहिए। उनकी बातों को मानना चाहिए था। एस्मा लगाना ठीक नहीं है। यह तानाशाही है। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की नाकामी से ही लोगों को समस्या हुई। - हरदीप सिंह, प्रदेश अध्यक्ष व पार्षद शिरोमणि अकाली दल
उम्मीद है कर्मचारी जल्द हड़ताल को लेंगे वापस
यूटी प्रशासक ने बिजली कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि निजीकरण के बाद भी उनकी नौकरी को कोई खतरा नहीं होगा। उनके पे स्केल, रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कुछ बदला नहीं जाएगा। उनके घर भी रहेंगे। इसके अलावा निजीकरण के बाद कंपनी विभाग में निवेश करेगी, जो बेहतरी के लिए होगा। इसलिए कर्मचारियों को रोड़ा नहीं अटकाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि कर्मचारी जल्द हड़ताल को वापस लेंगे। - संजय टंडन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा