टीकाकरण अभियान: टीके की बर्बादी को रोककर चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने बनाया कीर्तिमान
कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 10,86,157 खुराक लगाई जा चुकी है। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों को 103 प्रतिशत, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को 215 प्रतिशत और टीका लगाया जा चुका है।
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कोरोना टीके की डोज को बर्बाद होने से रोकने में चंडीगढ़ की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मिसाल कायम की है। स्वास्थ्य विभाग ने कुल खुराक के 10 प्रतिशत नुकसान को होने से बचाने के साथ ही अतिरिक्त मिली खुराक लगाने के फॉर्मूले से कीर्तिमान बनाया है। स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि शुरुआती दौर में छोटे केंद्रों पर बची खुराक को उसके पास स्थित बड़े केंद्र पर भेज दिया गया, ताकि वहां के लाभार्थियों को लगा दिया जाए। इसके साथ ही जिन वॉयल में 10 की जगह 11 या 12 खुराक मिली उसका भी पूरा इस्तेमाल किया गया।
स्थिति यह है कि चंडीगढ़ में माइनस -2.17 फीसदी वेस्टेज है। करीब 23,569.6069 खुराक लगाई जा चुकी हैं, जो नुकसान की आशंका पर अतिरिक्त डोज मिली थी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभियान के तहत शहर की कुल चिह्नित आबादी को पहली खुराक लगाने का लक्ष्य 14 अगस्त को ही पूरा किया जा चुका है लेकिन अब भी पहली खुराक लगाने का क्रम जारी है।
स्वास्थ्य विभाग आसपास के प्रदेशों से आने वाले लाभार्थियों को अब भी पहली खुराक लगा रहा है। अभियान में स्वास्थ्य विभाग इससे पहले बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के सर्वश्रेष्ठ चार प्रदेशों में स्थान बनाने में सफल हो चुका है। वहीं, पहली खुराक लगाने के लिए तय किये गए डेट लाइन 15 अगस्त से पहले ही लक्ष्य पूरा कर प्रशासन की उम्मीद पर भी खरा उतरा है।
अब तक 10 लाख से ज्यादा खुराक दी गई
कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 10,86,157 खुराक लगाई जा चुकी है। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों को 103 प्रतिशत, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को 215 प्रतिशत और टीका लगाया जा चुका है। इसके साथ ही 18 से 44 साल के बीच के 4,42,803 को पहली और 41,907 को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। वहीं 45 से 60 साल के बीच के 1,76,292 को पहली व 1,00,469 को दूसरी खुराक लगाई जा चुकी है। जबकि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में 98,629 को पहली और 72,256 को दूसरी खुराक लगाई जा चुकी है।
टीकाकरण अभियान के तहत शुरू से ही ऐसी रणनीति के साथ काम किया गया कि टीके का नुकसान कम से कम हो। इसका लाभ काफी मिला। जहां तक निगेटिव वेस्टेज की बात है तो कंपनियां ज्यादातर वॉयल में कुछ डोज बढ़ाकर देती है। हमने उस डोज को भी लाभार्थियों को लगाकर निगेटिव वेस्टेज हासिल करने में सफलता हासिल की। डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य