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Chandigarh: मंकी पॉक्स का खतरा बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, पीजीआई ने बनाई कमेटी

Tue, 26 Jul 2022 03:07 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 26 Jul 2022 03:07 PM IST
सार

मंकी पॉक्स के जांच की व्यवस्था पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ही है इसलिए संदिग्ध मरीज के मिलने पर नमूना भी वहीं भेजा जाएगा। इसमें भी आरटीपीसीआर टेस्ट होता है लेकिन सैंपल लेने का तरीका अलग होता है।

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Chandigarh Health Department have become alert after increase in cases of monkey pox in Country
pgi chandigarh

विस्तार

देश में मंकी पॉक्स के बढ़ते केसों को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। पीजीआई ने इसके लिए कमेटी भी गठित कर दी है। इसमें पैरासिटालॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. राकेश सहगल के नेतृत्व में चार विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वायरोलॉजी विभाग की प्रो. मिनी पी सिंह को कोविड के साथ इसके डाइग्नोसिस से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई है। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि मंकी पॉक्स के बढ़ते केसों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बचाव के लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। पीजीआई की ओर से कमेटी गठित कर कार्य सौंप दिया गया है।

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प्रो. मिनी पी सिंह ने बताया कि अभी मंकी पॉक्स के जांच की व्यवस्था पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ही है इसलिए संदिग्ध मरीज के मिलने पर नमूना भी वहीं भेजा जाएगा। इसमें भी आरटीपीसीआर टेस्ट होता है लेकिन सैंपल लेने का तरीका अलग होता है। कोविड में मरीज के नाक या गले का स्वैब लेते हैं लेकिन इसमें मरीज के शरीर में बने रैशेज के अंदर का पानी निकालते हैं और उसकी जांच की जाती है।
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जिस तरह कोविड आरएनए वायरस है, उसी तरह यह डीएनए वायरस है। इस बीमारी की पहचान के लिए क्लीनिकल और डायग्नोस्टिक दोनों जांच जरूरी है। क्लीनिकल में यह देखा जाता है कि मरीज को फीवर के अलावा क्या-क्या परेशानी हो रही है। वहीं लैब में पीसीआर जांच में डीएनए का मिलान किया जाता है, अगर मिल जाता है तो मंकी पॉक्स की पुष्टि हो जाती है।

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ये हैं लक्षण

मंकी पॉक्स में दाने बुखार आने के 5 से 21 दिन के भीतर कभी भी आ सकते हैं। ये चेहरे के साथ हथेली और पैर के तलवे तक में नजर आते हैं। कुछ मामलों में जननांग में भी निकल जाते हैं। पानी वाले ये दाने दर्द भी देते हैं।

इसका रखें ध्यान

मंकीपॉक्स के मरीज को आइसोलेशन में रखें। जब भी उसके पास जाएं मास्क पहनें। उसके कपड़े अन्य कपड़ों से अलग धुलें और एंटिसेप्टिक लिक्विड का प्रयोग जरूर करें। मास्क लगाकर ही उसके कपड़ों को धुलें। मरीज के संपर्क में आने के बाद अपने कपड़े जरूर बदलें और उसे तत्काल धोने के बाद आप भी नहा लें ताकि मरीज के सूखे दाने की पपड़ियां या स्लाइवा के संपर्क में आने से बच जाएं।

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