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अब चंडीगढ़ के पार्कों में सैर करते दिखेंगे पालतू डाग्स, गाइडलाइन जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 01 Mar 2017 09:23 AM IST
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chandigarh parks
- फोटो : File Photo
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एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने चंडीगढ़ नगर निगम को गाइडलाइन जारी निर्देश दिया है कि शहर की ग्रीन बेल्ट्स और पार्कों में पेट डाग्स के जाने पर पाबंदी हटाई जाए।
नगर निगम कमिश्नर को इस बारे में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का भी फोन आया है। इन्हें लागू करने के लिए उनके पास कोई आप्शन भी नहीं है। बोर्ड से आई गाइडलाइन की जानकारी कमिश्नर ने सदन को बताई जिसको सुनकर पार्षद भी हैरान हो गए। पार्षदों ने इन निर्देशों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि पार्क में कुत्ते और आदमी एक साथ रहें। गाइडलाइन लागू न किया जाए।
मालूम हो कि शहर में 1600 से ज्यादा ग्रीन बेल्ट्स और पार्क हैं। जिसमे कुत्तों को सैर करने वालों पर 500 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। सभी प्रमुख पार्कों के बाहर इसके सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने निर्देश में कहा है कि पार्कों के बाहर से ये बोर्ड हटाए जाएं। बोर्ड की ओर से आए निर्देश में यह भी कहा गया है कि पेट डाग्स द्वारा फैलाई गई गंदगी उठाने की जिम्मेवारी डाग के मालिक की होगी। ऐसा न करने पर मालिक पर जुर्माना लगाया जाएगा। सदन में अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद यह गाइडलाइन बोर्ड ने जारी की है। भाजपा पार्षद देवेश मोदगिल ने कहा कि नगर निगम को एक ऐप लांच करना चाहिए जिससे अगर कोई पेट डाग गंदगी फैलाए तो उसकी फोटो खींचकर नगर निगम को भेजी जा सके।
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शहर में 20 हजार पेट डाग्स
शहर में इस समय 20 हजार पेट डाग्स होने की उम्मीद है। जबकि शहर में पेट डाग्स की ट्रेडिंग पर पाबंदी लगी हुई है। शहर में काफी पेट लावर है। जबकि नगर निगम के पास सिर्फ छह हजार पेट डाग्स ही रजिस्टर हैं।
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नगर निगम कमिश्नर को इस बारे में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का भी फोन आया है। इन्हें लागू करने के लिए उनके पास कोई आप्शन भी नहीं है। बोर्ड से आई गाइडलाइन की जानकारी कमिश्नर ने सदन को बताई जिसको सुनकर पार्षद भी हैरान हो गए। पार्षदों ने इन निर्देशों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि पार्क में कुत्ते और आदमी एक साथ रहें। गाइडलाइन लागू न किया जाए।
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मालूम हो कि शहर में 1600 से ज्यादा ग्रीन बेल्ट्स और पार्क हैं। जिसमे कुत्तों को सैर करने वालों पर 500 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। सभी प्रमुख पार्कों के बाहर इसके सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने निर्देश में कहा है कि पार्कों के बाहर से ये बोर्ड हटाए जाएं। बोर्ड की ओर से आए निर्देश में यह भी कहा गया है कि पेट डाग्स द्वारा फैलाई गई गंदगी उठाने की जिम्मेवारी डाग के मालिक की होगी। ऐसा न करने पर मालिक पर जुर्माना लगाया जाएगा। सदन में अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद यह गाइडलाइन बोर्ड ने जारी की है। भाजपा पार्षद देवेश मोदगिल ने कहा कि नगर निगम को एक ऐप लांच करना चाहिए जिससे अगर कोई पेट डाग गंदगी फैलाए तो उसकी फोटो खींचकर नगर निगम को भेजी जा सके।
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शहर में 20 हजार पेट डाग्स
शहर में इस समय 20 हजार पेट डाग्स होने की उम्मीद है। जबकि शहर में पेट डाग्स की ट्रेडिंग पर पाबंदी लगी हुई है। शहर में काफी पेट लावर है। जबकि नगर निगम के पास सिर्फ छह हजार पेट डाग्स ही रजिस्टर हैं।
गाइडलाइन में यह भी
गाइडलाइन में यह भी
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि फुटपाथ पर काफी ज्यादा लोग चलते हैं। ऐसे में पेट डाग्स को घुमाने के लिए जगह नहीं है। इसके साथ ही वहां पर पैदल चलने वाले भी डाग पेट्स से डरते है। पार्कों में पेट डाग्स जाने शुरू होने चाहिए। निर्देश में यह भी कहा है कि हर पेट डाग की एक्सरसाइज भी होनी चाहिए ऐसा न होने पर कुत्ते गुस्से वाले हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें ऐसा करने से रोकना नियमों की उल्लंघन है।
गाइडलाइन में कहा कि पार्काें में डाग्स को पट्टा बांधकर ही लेकर जाना चाहिए। यहां तक की जो नेबरहूड पार्क रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन रखरखाव कर रही हैं, शहर के 700 पार्क इस समय आरडब्ल्यूए रखरखाव कर रही हैं। सदन में कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि पार्क पेट डाग्स की एंट्री खोलने पर अराजकता बढ़ जाएगी। जबकि पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि यह गाइडलाइन है। इसे लागू करना या नहीं करना यह नगर का अधिकार है लेकिन कमिश्नर ने सदन में कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता।
पार्क और ग्रीन बेल्ट्स डाग्स के लिए नहीं खोलना चाहिए। लोग इसका विरोध करेंगे। ऐसे में तो पार्क कुत्तों के लिए ही बन जाएंगे। नगर निगम शहर के पार्कों पर हर माह लाखों रुपये रखरखाव पर खर्च करता है। पेट डाग्स आउटर साइड की सड़कों की खुली जगह पर घूमने के लिए तय कर देनी चाहिए।
चरणजीव सिंह, चेयरमैन, फासवेक
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि फुटपाथ पर काफी ज्यादा लोग चलते हैं। ऐसे में पेट डाग्स को घुमाने के लिए जगह नहीं है। इसके साथ ही वहां पर पैदल चलने वाले भी डाग पेट्स से डरते है। पार्कों में पेट डाग्स जाने शुरू होने चाहिए। निर्देश में यह भी कहा है कि हर पेट डाग की एक्सरसाइज भी होनी चाहिए ऐसा न होने पर कुत्ते गुस्से वाले हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें ऐसा करने से रोकना नियमों की उल्लंघन है।
गाइडलाइन में कहा कि पार्काें में डाग्स को पट्टा बांधकर ही लेकर जाना चाहिए। यहां तक की जो नेबरहूड पार्क रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन रखरखाव कर रही हैं, शहर के 700 पार्क इस समय आरडब्ल्यूए रखरखाव कर रही हैं। सदन में कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि पार्क पेट डाग्स की एंट्री खोलने पर अराजकता बढ़ जाएगी। जबकि पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि यह गाइडलाइन है। इसे लागू करना या नहीं करना यह नगर का अधिकार है लेकिन कमिश्नर ने सदन में कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता।
पार्क और ग्रीन बेल्ट्स डाग्स के लिए नहीं खोलना चाहिए। लोग इसका विरोध करेंगे। ऐसे में तो पार्क कुत्तों के लिए ही बन जाएंगे। नगर निगम शहर के पार्कों पर हर माह लाखों रुपये रखरखाव पर खर्च करता है। पेट डाग्स आउटर साइड की सड़कों की खुली जगह पर घूमने के लिए तय कर देनी चाहिए।
चरणजीव सिंह, चेयरमैन, फासवेक