{"_id":"65979fdb028ce94a490beb15","slug":"chandigarh-district-court-convicted-builder-in-case-of-bounce-of-seven-cheque-totaling-rs-1-80-crore-2024-01-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: 1.80 करोड़ के सात चेक बाउंस मामले में बिल्डर दोषी करार, हर मामले में दो-दो साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: 1.80 करोड़ के सात चेक बाउंस मामले में बिल्डर दोषी करार, हर मामले में दो-दो साल की कैद
Fri, 05 Jan 2024 11:54 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 05 Jan 2024 11:54 AM IST
सार
श्रीराम फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की तरफ से वकील मुनीष कुमार ने साल 2014 में जेएस बिल्डर के खिलाफ अदालत में केस दायर किया था। दायर की याचिका में कहा गया कि बिल्डर ने उनकी फाइनेंस कंपनी से सात वाहनों को खरीदने के लिए लोन लिया था। इसके लिए दिए गए सभी चेक बाउंस हो गए थे।
विज्ञापन
Cheque Bounce
- फोटो : Istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ जिला अदालत ने 1.80 करोड़ रुपये के कुल सात चेक बाउंस के मामले में एक बिल्डर को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी बिल्डर को सातों चेके बाउंस केस में दो-दो साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने बाउंस हुए चेक की कुल 1.80 करोड़ रुपये की रकम लौटाने के भी आदेश दिए हैं।
सजा पाने वाले बिल्डर की पहचान सेक्टर-34सी के रहने वाले जसविंदर सिंह के तौर पर हुई है। दायर मामले के तहत दोषी बिल्डर के खिलाफ श्रीराम फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ने अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया था। आरोपों के तहत यह वह 1.80 करोड़ रुपये की रकम थी, जो दोषी द्वारा सात भारी वाहन खरीदे जाने के दौरान अलग-अलग सात चेक के रूप में याचिकाकर्ता कंपनी को दी गई थी। लेकिन लोन की किस्तें जमा न होने पर जब कंपनी ने चेकों को बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गए।
पांच साल पहले भगोड़ा घोषित हो चुका है दोषी..
याचिकाकर्ता की ओर से दायर चेक बाउंस के मामले में आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। जिस पर अदालत ने उसे उक्त मामलों में दोषी जेएस बिल्डर को साल 2017 में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे नवंबर 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद दोषी के खिलाफ सातों मामलों में केस की सुनवाई चली और अदालत ने उसे दोषी करार दिया है।
विज्ञापन
क्या है मामला...
सात अलग-अलग वाहनों के लेकर दिए गए चेक बाउंस के मामले में श्रीराम फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की तरफ से वकील मुनीष कुमार ने साल 2014 में जेएस बिल्डर के खिलाफ अदालत में केस दायर किया था। दायर की याचिका में कंपनी की ओर से आरोप लगाते हुए कहा गया कि बिल्डर ने उनकी फाइनेंस कंपनी से सात वाहनों को खरीदने के लिए लोन लिया था। आरोपी ने लोन के लिए प्रत्येक वाहन के लिए अलग-अलग सात चेक कंपनी को दिए थे।
शिकायत में कहा गया कि आरोपी की आरे से दिए गए सात चेक में दो वाहनों के लिए 15-15 लख और पांच वाहनों के लिए 25-25 लाख रुपये के चेक दिए थे। कंपनी के आरोपों के तहत लोन की किश्त ना आने पर जब उन्होंने आरोपी की ओर से दिए गए चेकों को बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गए। जिसके बाद फाइनेंस कंपनी की ओर से आरोपी बिल्डर के खिलाफ अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया गया।
विज्ञापन
सजा पाने वाले बिल्डर की पहचान सेक्टर-34सी के रहने वाले जसविंदर सिंह के तौर पर हुई है। दायर मामले के तहत दोषी बिल्डर के खिलाफ श्रीराम फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ने अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया था। आरोपों के तहत यह वह 1.80 करोड़ रुपये की रकम थी, जो दोषी द्वारा सात भारी वाहन खरीदे जाने के दौरान अलग-अलग सात चेक के रूप में याचिकाकर्ता कंपनी को दी गई थी। लेकिन लोन की किस्तें जमा न होने पर जब कंपनी ने चेकों को बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गए।
विज्ञापन
पांच साल पहले भगोड़ा घोषित हो चुका है दोषी..
याचिकाकर्ता की ओर से दायर चेक बाउंस के मामले में आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। जिस पर अदालत ने उसे उक्त मामलों में दोषी जेएस बिल्डर को साल 2017 में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे नवंबर 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद दोषी के खिलाफ सातों मामलों में केस की सुनवाई चली और अदालत ने उसे दोषी करार दिया है।
विज्ञापन
क्या है मामला...
सात अलग-अलग वाहनों के लेकर दिए गए चेक बाउंस के मामले में श्रीराम फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की तरफ से वकील मुनीष कुमार ने साल 2014 में जेएस बिल्डर के खिलाफ अदालत में केस दायर किया था। दायर की याचिका में कंपनी की ओर से आरोप लगाते हुए कहा गया कि बिल्डर ने उनकी फाइनेंस कंपनी से सात वाहनों को खरीदने के लिए लोन लिया था। आरोपी ने लोन के लिए प्रत्येक वाहन के लिए अलग-अलग सात चेक कंपनी को दिए थे।
शिकायत में कहा गया कि आरोपी की आरे से दिए गए सात चेक में दो वाहनों के लिए 15-15 लख और पांच वाहनों के लिए 25-25 लाख रुपये के चेक दिए थे। कंपनी के आरोपों के तहत लोन की किश्त ना आने पर जब उन्होंने आरोपी की ओर से दिए गए चेकों को बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गए। जिसके बाद फाइनेंस कंपनी की ओर से आरोपी बिल्डर के खिलाफ अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया गया।