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चंडीगढ़ में दर्ज होगी डीडीआर तो ही मिलेगा डुप्लीकेट डीएल
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Jan 2017 09:47 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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दूसरे शहर में दर्ज डीडीआर की कापी से यदि चंडीगढ़ में डुप्लीकेट डीएल और आरसी बनवाने आए हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने इस पर रोक लगा दी है। अब डुप्लीकेट आरसी और डीएल बनवाने के लिए सिर्फ चंडीगढ़ में ही दर्ज की गई डीडीआर मान्य होगी। इस पर रोक लगाने के लिए आरएलए ने सारथी नामक सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया है।
गौरतलब है कि आरएलए ने डुप्लीकेट आरसी और डीएल में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर सारथी 4.0 इंस्ट्राल किया है। इसके बाद अन्य राज्यों में दर्ज हुई डीडीआर के साथ डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए आते हैं तो उसे सारथी सॉफ्टवेयर स्वीकार नहीं करता है। इसके बाद लोग चंडीगढ़ के पते पर डीडीआर दर्ज करवाने के लिए मजबूर हैं। यहीं नहीं जब लोग डीएल, आरसी की फाइल जमा कराने के लिए टोकन नंबर लेते हैं तो फाइल में दूसरी डीडीआर लगी होने के बारे में बताया जाता है।
इसके बाद लोगों को इस नये कानून के बारे में जानकारी मिलती है। इस कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सेक्टर-22 में डुुप्लीकेट डीएल और आरसी बनवाने आए रमेश शर्मा ने बताया कि उनकी आरसी और डीएल जीरकपुर में खो गया था। डीडीआर जीरकपुर की कटी होने के कारण डॉक्यूमेंट जमा नहीं हो पाए। इस कारण उन्हें चंडीगढ़ के पते पर डीडीआर दर्ज करवानी पड़ी है। इसके बाद आरसी और डीएल की फाइल जमा हो पाई है।
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डीएल और आरसी बनने में किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा न हो इसलिए चंडीगढ़ की डीडीआर मांगी जाती है। बाहरी राज्य में दर्ज डीडीआर से चंडीगढ़ की आरसी और डीएल नहीं बन पाएंगे।
-राकेश पोपली, आरएलए
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गौरतलब है कि आरएलए ने डुप्लीकेट आरसी और डीएल में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर सारथी 4.0 इंस्ट्राल किया है। इसके बाद अन्य राज्यों में दर्ज हुई डीडीआर के साथ डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए आते हैं तो उसे सारथी सॉफ्टवेयर स्वीकार नहीं करता है। इसके बाद लोग चंडीगढ़ के पते पर डीडीआर दर्ज करवाने के लिए मजबूर हैं। यहीं नहीं जब लोग डीएल, आरसी की फाइल जमा कराने के लिए टोकन नंबर लेते हैं तो फाइल में दूसरी डीडीआर लगी होने के बारे में बताया जाता है।
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इसके बाद लोगों को इस नये कानून के बारे में जानकारी मिलती है। इस कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सेक्टर-22 में डुुप्लीकेट डीएल और आरसी बनवाने आए रमेश शर्मा ने बताया कि उनकी आरसी और डीएल जीरकपुर में खो गया था। डीडीआर जीरकपुर की कटी होने के कारण डॉक्यूमेंट जमा नहीं हो पाए। इस कारण उन्हें चंडीगढ़ के पते पर डीडीआर दर्ज करवानी पड़ी है। इसके बाद आरसी और डीएल की फाइल जमा हो पाई है।
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डीएल और आरसी बनने में किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा न हो इसलिए चंडीगढ़ की डीडीआर मांगी जाती है। बाहरी राज्य में दर्ज डीडीआर से चंडीगढ़ की आरसी और डीएल नहीं बन पाएंगे।
-राकेश पोपली, आरएलए